
जामुनः एक चमत्कारिक वृक्ष Publish Date : 03/07/2026
जामुनः एक चमत्कारिक वृक्ष
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य
इस साल बाजार में जितनी तादाद में जामुन दिख रहे हैं, उतने तो मैंने पिछले तीन दशकों में कभी नहीं देखे हैं। ऐसा लगता है कि मानों जामुनों की तो जैसे बाढ़ आ गई है। जिन पेड़ों पर पिछले साल गिने-चुने फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुनों से लदे हैं। जिन पेड़ों पर फल आए थे, वहाँ तो जामुनों का ढेर लग गया है।
ये आखिर हो क्या रहा है?
पुराने समय में लोग बस यही कहती थे कि “जिस साल गर्मी में जामुनों का ऐसा ढेर लगता है, तो उस साल सूखा पड़ता है”। पुरानी पीढ़ी का यह पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान के हिसाब से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को “मास्टिंग” (Masting) या “स्ट्रेस फ्रूटिंग” (Stress Fruiting) कहा जाता है।

पेड़ों द्वारा खुद को झोंककर ज्यादा से ज्यादा फल देने की इस आखिरी कोशिश को कभी-कभी “सुसाइड फ्रूटिंग” (Suicide Fruiting) या “बंपर क्रॉप” भी कहते हैं।
ये आखिर है क्या और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, इसे आसान भाषा में समझते हैं:-
1. ‘सर्वाइवल इंस्टिंक्ट’ - अस्तित्व की लड़ाई
जैसा कि प्रोफेसर सेंगर ने बताया कि यह प्रकृति का “अपने जीन आगे बढ़ाने का” नियम है। जब पेड़ को जमीन के नीचे पानी की कमी महसूस होने लगती है या मौसम में बड़े बदलावों के संकेत मिलते हैं, तो पेड़ स्वयं ही “डिफेंस मोड” में चला जाता है।
पेड़ को यह आभास हो जाता है कि शायद वह आगे जी न पाए। ऐसे समय में खुद को बचाने के बजाय, अपनी प्रजाति को धरती पर बनाए रखने के लिए पेड़ अपनी पूरी ऊर्जा “बीज” यानी फल बनाने में लगा देता है।
2. नई पत्तियों-डालियों पर रोक
ऐसे साल में पेड़ नई पत्तियाँ फूटना या डालियाँ बढ़ाना पूरी तरह रोक देता है, क्योंकि नई पत्तियों को जिंदा रखने के लिए ज्यादा पानी और पोषण चाहिए होता है। पेड़ इस ऊर्जा को बचाकर सिर्फ और सिर्फ फलों का उत्पादन बढ़ाने पर लगाता है। इसी वजह से पिछले साल जिन पेड़ों पर थोड़े-बहुत फल थे, वे भी इस साल फलों से भर गए हैं।
3. पुरानी पीढ़ी की भविष्यवाणी और विज्ञान - सूखे से संबंध
- पुरानी पीढ़ी का अवलोकन बिल्कुल सटीक है, क्योंकि पेड़-पौधे मौसम में बदलाव को इंसानों से कहीं पहले और ज्यादा संवेदनशीलता से पहचानते हैं।
- जामुन की जड़ “मूसला जड़” (Taproot) होती है, जो जमीन की काफी गहराई तक जाती है।
- जब भूजल का स्तर बहुत ज्यादा नीचे चला जाता है, तभी इन जड़ों को तनाव (Water Stress) महसूस होता है और पानी का यही तनाव आने वाले सूखे या कड़ी गर्मी का संकेत होता है।
इसलिए, जिस साल गर्मी में जामुनों का ऐसा अभूतपूर्व ढेर लगता है, वह प्रकृति की तरफ से आने वाले सूखे समय की चेतावनी होती है।

संक्षेप में कहें तो जामुन का पेड़ आत्महत्या नहीं कर रहा, बल्कि अपना बलिदान देकर अपनी अगली पीढ़ी यानी बीजों को जन्म देने की कोशिश कर रहा है। प्रकृति का यह चक्र वाकई हैरान कर देने वाला है। दादी का पीढ़ियों पुराना अवलोकन और विज्ञान के सिद्धांत यहाँ बिल्कुल मिल जाते हैं।
अतः आपसे अपील है कि इस साल जामुन का स्वाद जरूर लें, लेकिन प्रकृति के इस “सूखे” के संकेत को भी गंभीरता से लें और पानी व संसाधनों का उपयोग सोच-समझकर करें, इससे तो हमारी समझ में यही आता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
