कम बारिश, महंगी खाद और बढ़ती गर्मीः किसानों के लिए क्या है समाधान?      Publish Date : 07/06/2026

     कम बारिश, महंगी खाद और बढ़ती गर्मीः           किसानों के लिए क्या है समाधान?

                                                                                                                       प्रो0 आर. एस. सेंगर

कम बारिश, महंगी खाद और बढ़ती गर्मी जैसी चुनौतियों के बीच खरीफ सीजन किसानों के लिए कठिन हो सकता है। अल नीनो के संभावित प्रभाव से फसल उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे समय में जल संरक्षण, मिट्टी की सेहत सुधारने वाली तकनीकें और जैविक समाधान अपनाकर किसान फसल को सुरक्षित रखते हुए फसल के उत्पादन और अपना लाभ दोनों को ही बढ़ा सकते हैं।

भारत की कृषि मानसून पर आधारित है और हर वर्ष करोड़ों किसान खरीफ सीजन का इंतजार करते हैं, लेकिन वर्ष 2026 किसानों के लिए कई चुनौतियां लेकर आया है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण यूरिया और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम वैज्ञानिकों और विभिन्न वेदर एजेंसियों ने इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव को लेकर गंभीर चेतावनी दी जा रही है। ऐसी स्थिति में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बारिश सामान्य से कम हुई, तापमान अधिक रहा और रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हुई, तो फसलों को सुरक्षित और उत्पादक कैसे रखा जाए?

इन्हीं परिस्थितियों में जैविक और टिकाऊ कृषि तकनीकें किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही हैं। विशेष रूप से Zydex की Zytonic Technology आधारित Zytonic Suraksha और Zytonic Mini Kit किसानों को कम पानी, कम रासायनिक उर्वरक और कठिन मौसम परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद कर सकती हैं।

अल नीनो क्या है और यह किसानों के लिए चिंता का विषय क्यों है?

अल नीनो प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसका प्रभाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि दुनिया भर के मौसम चक्र को प्रभावित करता है। भारत में अल नीनो का संबंध अक्सर कमजोर मानसून, अनियमित वर्षा, लंबे सूखे अंतराल और बढ़े हुए तापमान के रूप में देखा जाता है।

जब अल नीनो सक्रिय होता है, तब कई राज्यों में मानसून की बारिश सामान्य से कम हो सकती है। कई बार बारिश देर से शुरू होती है या फिर बीच-बीच में लंबे अंतराल आ जाते हैं। इससे फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या तब उत्पन्न होती है जब फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं- जैसे अंकुरण, वृद्धि, फूल और दाना भरने के समय पानी की कमी हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों में पौधों का विकास रुक जाता है, पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो जाता है और अन्ततः उपज प्रभावित होती है।

उर्वरक संकट और बढ़ती लागत

इस वर्ष किसानों के सामने एक और बड़ी चुनौती उर्वरकों की संभावित कमी है। खरीफ सीजन में देश को लगभग 18 से 19.4 मिलियन टन यूरिया की आवश्यकता होती है, जबकि शुरुआती स्टॉक अपेक्षाकृत सीमित है।

अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा संकट के कारण यूरिया उत्पादन और आयात दोनों प्रभावित हुए हैं, परिणामस्वरूप उर्वरकों की वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है। भारत सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए खुदरा मूल्य में बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

जिला स्तर पर इसका प्रभाव यह हो सकता है कि बुवाई और शुरुआती वृद्धि के दौरान किसानों को खाद समय पर न मिले या अपेक्षित मात्रा में उपलब्ध न हो पाए। ऐसे समय में केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहना किसानों के लिए जोखिमपूर्ण सिद्व हो सकता है।

बदलते समय की जरूरतः जैविक और जैव-आधारित समाधान

आज कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य की खेती केवल रासायनिक उर्वरकों पर आधारित नहीं रह सकती। मिट्टी की सेहत, जल संरक्षण, पोषक तत्वों की दक्षता और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान जैविक एवं जैव-प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों में ही समस्या का समाध्धन छिपा हुआ है।

ऐसे समाधान न केवल पौधों को पोषण उपलब्ध कराते हैं बल्कि मिट्टी में मौजूद प्राकृतिक प्रक्रियाओं को भी सक्रिय बनाते हैं। यही कारण है कि जैव उर्वरक और सूक्ष्मजीव आधारित तकनीकें दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही हैं। Zydex की Zytonic Technology इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य पौधों और सूक्ष्मजीवों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाना है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।