पानी की एक्सपायरी डेट क्या होती है?      Publish Date : 30/05/2026

       पानी की एक्सपायरी डेट क्या होती है?

                                                                                                              प्रो0 आर. एस. सेंगर 

अक्सर हम पानी की ‘एक्सपायरी डेट’अपनी सुविधा और सोच के हिसाब से ही निर्धारित कर लेते हैं, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता है। अब जरा इस विरोधाभास पर विचार कीजिएः-

  • शहरों में: जहाँ नल का पानी रोज आता है, वहाँ कल का पानी ‘बासी पानी’मानकर बहा दिया जाता है। इस प्रकार इस पानी की एक्सपायरी डेट हुई केवल 1 दिन।
  • जहाँ पानी दो या आठ दिन में आता हैः वहाँ पर वही पानी दो या आठ दिनों तक बिल्कुल ताजा और पीने योग्य बना रहता है और यही इस पानी की एक्सपायरी डेट भी होती है।
  • शादी-समारोहों में: जैसे ही हाथ में बिसलरी की नई बोतल आती है, पुरानी आधी भरी बोतल को भी तुरंत ही ‘बेकार’समझकर फेंक दिया जाता है, तो इस पानी की एक्सपायरी डेट भी इतनी ही होती है।

दूसरी तरफ की सच्चाई

                                 

  • रेगिस्तान में यात्रा करते समय पानी की एक-एक बूंद तब तक अमृत और ताजी रहती है, जब तक कि अगला जलस्रोत न मिल जाए।
  • प्रकृति में बांधों और तालाबों का पानी अगले मानसून तक (और सूखे की स्थिति में 2-3 साल तक) पूरी तरह से उपयोगी बना रहता और इस पानी की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती है।
  • बोरवेल में 50 से 500 फीट नीचे से जो पानी हम निकालते हैं, वह जमीन के अंदर सैकड़ों-हजारों साल पुराना स्टोर पानी होता है, लेकिन फिर भी वह हमारी सेहत के लिए सबसे सुरक्षित और शुद्ध माना जाता है।

निष्कर्षः

पानी के सम्बन्ध में यह एक सोचने वाली बात है कि-

  • कुल मिलाकर, पानी की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। पानी की एक्सपायरी केवल हमारी सोच और उसकी उपलब्धता के आधार पर तय होती है। जब पानी आसानी से मिलता है, तो हम उसे बासी कह देते हैं; जब किल्लत होती है, तो वही पानी हमारे लिए अनमोल हो जाता है।
  • अतः पानी का उपयोग विवेकशीलता, जिम्मेदारी और संयम से करना चाहिए। अन्यथा, पानी खत्म होने से पहले हमारी यह लापरवाह सोच ही हमें प्यासा मार डालेगी।

एक विनम्र अनुरोधः

                              

यह केवल एक विचार ही नहीं, बल्कि आने वाले कल को बचाने के लिए एक पुकार है। कृपया इसे केवल पढ़कर भूलने की कोशिश न करें, बल्कि अपने सभी प्रियजनों, रिश्तेदारों और ग्रुप्स में प्रेषित कर जल संरक्षण हेतु जागरूकता फैलाएं और इसमें अधिक से अधिक भागीदरी करें।

क्योंकि जल ही जीवन है, जल है तो कल है!

अतः ’स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अधिक से अधिक पानी बचाएं और सभी लोगों से पानी को बचाने की अपील करते रहें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।