
काली मिट्ठी के गुणधर्म एवं उसका व्यवहार Publish Date : 29/05/2026
काली मिट्टी के गुणधर्म एवं उसका व्यवहार
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 निधि सिंह
काली मिट्टी के पत्थर बनने से पहले ही सावधान हो जाना आवश्यक है। अतः किसान भाईयों से अपील है कि वह मिट्टी के पीएच और क्षारीयता के जाल को भलीभांति समझें।
किसान भाई खेती करने के दौरान अपने खेत में खून-पसीना एक कर देते हैं, लेकिन अगर मिट्टी ही फसलों का साथ देने को तैयार न हो तो ऐसे में वह करें भी तो क्या करें? वर्तमान समय में बिना सोचे-समझे रासायनिक खादों का जो अधिकतम और लगातार उपयोग किया जा रहा है और इससे हमारे खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य पूरी तरह से बिगड़ चुका है। मिट्टी का pH (अम्लीयता) और बढ़ती क्षारीयता (Salinity) आज खेती के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। ऐसे में अगर आपके खेतों की जमीन पत्थर की तरह सख्त होने लगी है, तो समझ लीजिए कि आपके लिए खतरे की घंटी बज चुकी है।

आज के समय में उपजाऊ मिट्टी की पहचान यह है कि मिट्ठी का pH 6.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए। अगर यह सीमा पार हो जाए, तो आप चाहे कितनी भी महंगी खाद का प्रयोग क्यों न कर लें, तो भी उसका पूरा लाभ फसल को नहीं मिलने वाला। फसल की आवश्यकता से अधिक सिंचाई करना और सिंचाई के लिए खारे पानी का उपयोग करने से हमारी काली मिट्टी का दम घुटने लगा है। जब मिट्टी का E C (इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी) 2.5 से ऊपर चला जाता है, तो फसल सचमुच जलने लगती है और आपकी पैदावार मिट्टी के भाव हो जाती है।
इसका सबसे असरदार और मजबूत उपाय है गर्मी के मौसम में खेतों की गहरी जुताई करना। जब मिट्टी गर्म होती है, तो उसके विभिन्न प्रकार के दोष भी कम होने लगते हैं। इसके बाद प्रति एकड़ 4-5 टन जिप्सम का प्रयोग करें। जिप्सम मिट्टी के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। यह मिट्टी में मौजूद अतिरिक्त सोडियम को बाहर निकालता है और मिट्टी को फिर से ढीला व भुरभुरा बनाता है। जब मिट्टी भुरभुरी होती है, तो जड़ें गहराई तक जाती हैं और फसल तेजी से वृद्वि करती है।

इसलिए केवल रासायनिक खादों के पीछे ही न भागें, बल्कि मिट्टी की संरचना को बचाने के लिए अमोनियम सल्फेट और सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) जैसी खादों के उपयोग को बढ़ाएँ। यह खादें मिट्टी का रासायनिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। साथ ही गोबर की खाद और हरी खाद के उपयोग को बढ़ाकर यदि जैविक कार्बन को सुरक्षित रखा जाता है तो इससे आपकी खेती टिकाऊ बनती है।
अतः कहा जा सकता है कि जब मिट्टी बचेगी तभी किसान खुशहाल रहेगा, इसलिए अभी से सचेत बने और अपने खेतों की मिट्टी की जांच आवश्यक रूप से कराते रहें। इससे आप अपनी फसल में आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्वों का प्रयोग कर सकेंगे जिससे आपकी लागत कम होगी तथा मुनाफा बढेगा। अतः समय-समय पर मिट्ठी जांच करते रहें और अपनी आय को बढ़ाएं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
