
उत्तर प्रदेश सरकार का जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयास Publish Date : 19/05/2026
उत्तर प्रदेश सरकार का जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयास
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
उत्तर प्रदेश की सरकार किसानों, गोपालकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए बड़ी योजना लेकर आई है। अब प्रदेश के करीब 7,500 गो आश्रय स्थलों पर बड़े पैमाने पर गोबर से जैविक खाद तैयार कराई जाएगी। इस खाद को किसानों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार की योजना है कि इसे 50 किलो पैकेट में उपलब्ध कराया जाए, ताकि छोटे और बड़े सभी किसानों तक इसे आसानी से पहुंचाया जा सके।
यह पहल सिर्फ जैविक खेती को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि गोसंरक्षण को खेती, रोजगार और महिला सशक्तिकरण से सीधे जोड़ा जाए।
किसानों को कैसे मिलेगा योजना का लाभ

सरकार का मानना है कि जैविक खाद के इस्तेमाल से किसानों की खेती लागत कम होगी। रासायनिक खादों खासकर यूरिया और डीएपी पर निर्भरता घटेगी। इससे मिट्टी की उर्वरता भी बेहतर होगी और फसल उत्पादन लंबे समय तक टिकाऊ बनेगा। 50 किलो पैकेट में खाद मिलने से किसानों को खरीदने, ढुलाई करने और खेत तक पहुंचाने में आसानी होगी। छोटे किसानों के लिए यह योजना अधिक लाभकारी मानी जा रही है।
कहां होगी खाद की टेस्टिंग और खरीद
सरकार के अनुसार तैयार की गई जैविक खाद की गुणवत्ता जांच कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और अन्य एजेंसियों के माध्यम से कराई जाएगी। इसके बाद खाद की खरीद और वितरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे किसानों को प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाली खाद मिलने की उम्मीद है। साथ ही बाजार में नकली या घटिया खाद की समस्या भी कम हो सकती है।
गांवों में रोजगार के खुलेंगे नए रास्ते
इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। गोबर से खाद बनाने, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री जैसे कार्यों में बड़ी संख्या में लोगों को काम मिल सकता है। खासकर युवाओं, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इससे सीधा लाभ मिलने की संभावना है। सरकार इस काम के लिए प्रशिक्षण भी देगी, ताकि गांव स्तर पर प्रशिक्षित लोग तैयार किए जा सकें।
प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश सरकार की यह पहल ऐसे समय आई है, जब देशभर में प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। जैविक खाद किसानों को रासायनिक खाद का विकल्प दे सकती है। सरकार का मानना है कि गोबर और गोमूत्र आधारित खेती मॉडल अपनाने से खेती की लागत घटेगी, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और किसानों की आय बढ़ेगी।
गो आश्रय स्थलों को बनाया जाएगा उत्पादन केंद्र
प्रदेश के करीब 7,500 गो आश्रय स्थलों में इस समय लगभग 12.5 लाख गोवंश संरक्षित हैं। अब सरकार इन गोशालाओं को गोबर खाद उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करने जा रही है। एक अनुमान के अनुसार एक गाय से रोज करीब 10 किलोग्राम गोबर और 5 लीटर गोमूत्र प्राप्त होता है। इन्हीं संसाधनों का उपयोग जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा।
सरकार ने किया बड़ा बजट प्रावधान
गोसंरक्षण और इससे जुड़ी योजनाओं के लिए सरकार ने लगभग 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया किए हैं। वहीं बड़े गो-संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर जिले में कम से कम एक बड़ा आत्मनिर्भर गो-संरक्षण केंद्र स्थापित किया जाए।
किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी राहत
सरकार की मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत अब तक लाखों पशुपालकों को गोवंश सौंपा जा चुका है। गोवंश के पालन-पोषण के लिए सरकार प्रतिदिन सहायता राशि भी सीधे बैंक खातों में भेज रही है। इससे ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई योजना किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण युवाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। 50 किलो पैकेट में जैविक खाद मिलने से किसानों की लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर भी तैयार होंगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
