गन्ना किसानों के हितः प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल      Publish Date : 14/04/2026

गन्ना किसानों के हितः प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल

                                                                                                                   प्रोफेसर आर. एस. सेंगर 

प्रदेश सरकार के द्वारा इस बार बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए 14.48 लाख हेकटेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सापेक्ष 8.71 लाख हेक्टेयर, लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्रफल पर सफलतापूर्वक गन्ने की बुवाई सम्पन्न भी की जा चुकी है। जबकि गत वर्ष निर्धारित लक्ष्य 13.55 लाख हेक्टेयर के सापेक्ष इस अवधि में कुल 7.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर ही गन्ने की बुवाई की जा सकी थी। प्रदेश में पहली बार गन्ना बीज प्रबन्धन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए 6.90 करोड़ कुन्तल शुद्व बीज आरक्षित कर उसे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किसानों के लिए उपलब्ध करा दिया गया है।

                                

उक्त बात गन्ना मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी के द्वारा विभागीय बैठक के दौरान कही गई है। इस बैठक में अपर मुख्य सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के संयुक्त प्रबन्ध निदेशक, उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ लिमिटेड तथा विभाग के समस्त वरिष्ठ अधिकारीगण, निदेशक गन्ना शोध परिषद और चीनी मिल प्रतिनिधियों के साथ ही मीडिया सहयोगी भी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान गन्ना मंत्री ने बताया कि एसएमएस सेवा और एसजीके पोर्टल के माध्यम से गन्ना किसानों को उनके निकटतम बीज की उपलब्धता के बारे में सूचना प्रदान की जा रही है। इस दौरान एसजीके पोर्टल पर गन्ना बीज की उपलब्धता का टैब देकर प्रदेश के ऐसे समस्त गन्ना किसान, जिनके यहाँ शुद्व बीज उपलब्ध है, उसकी जानकारी विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। इससे कोई भी गन्ना किसान केवल एक क्लिक से घर बैठे ही वांछित गन्ने के बीज को आसानी से मोबाइल के द्वारा ही गन्ने का बीज प्राप्त कर सकता है। प्रदेश के समस्त गन्ना किसानों को उन्नत एवं उच्च उत्पादकता प्रदान करने वाली गन्ना किस्मों को उपलब्ध कराने के लिए नई गन्ना प्रजातियों जैसे कि को.शा. 18231, को.शा. 17231, को.शा. 13235, को. लख. 16201, को. लख. 16202, को. लख. 14201, को. 0118, को. 15023, को. शा. 19231, को. से. 17451, को. से. 17018 और को. से. 18022 आदि किस्में अवमुक्त की गई हैं। बीज की उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता पर सतत निगरानी हेतु ‘सीड ट्रैक एंड ट्रैस’ एप का विकास भी किया जा रहा है, जिससे बीज के वितरण में होने वाली अनियमितताओं पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाया जा सकेगा। गन्ने के क्षेत्रफल और फसल की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के सहयोग से सैटेलाइट परियोजनाओं को संचालित किया जा रहा है।

महिलासशक्तिकरण के अन्तर्गत 3,184 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 60,000 महिलाएं गन्ने की नर्सरी तैयार कर रही हैं, जिससे महिलाओं को रोजगार प्राप्त होने के साथ ही साथ आत्मनिर्भरता भी प्राप्त हो रही है। चीनी मिलों एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है ि कवह गन्ना किसानों के प्रोत्साहन के लिए उन्हें बीज, परिवहन, उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य कृषि निवेशों में अधिक से अधिक सहायता प्रदान करना सुनिश्चित् करें।

गन्ने के बीज एवं बीज के यातायात हेतु 94 करोड़ रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त, कृषि ड्रोन के माध्यम से फसल में दवा के छिड़काव में तेजी और सटीकता आई है, जो कि किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्व हो रहा है। प्रदेश में पहली बार 01 लाख 48 हजार छोटी जोत वाली महिला किसानों को गन्ना आपूर्ति में प्राथमिकता प्रदान की जा रही है, जिससे उन्हें गौरव एवं सम्मान की अनुभूति भी मिल रही है।

वर्तमान समय में प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें कार्य कर रही हैं, जबकि इन चीनी मिलों में से 64 चीनी मिलों में 2,000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन करने वाली कोजन इकाइयाँ स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 53 चीनी मिलों में एथेनॉल प्लाण्ट भी स्थापित किया गया है, जिनकी ऐथेनॉल की उत्पादन क्षमता 258.67 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष तक की है।

गन्ना विभाग के द्वारा 148 सहकारी गन्ना एवं चीनी मिल समितियों में फार्म मशीनरी बैक स्थापित किए गए हैं, जिसमें 78 ट्रैक्टर एवं गन्ने की खेती के लिए उपयोगी 979 कृषि यंत्र रखे गए हैं। आगामी वर्ष में इन फार्म मशीनरी बैंकों में गन्ने की कटाई के मशीनीकरण हेतु मिनीकेन हॉर्वेस्टर एवं कृषि ड्रोन आदि को भी शामिल करना भ प्रस्तावित है। 

04 नई चीनी मिलों - पिपराइच, मुण्डेरवा, चांगीपुर और त्रिवटीनाथ की स्थापना की जा चुकी है इसके साथ ही 42 अन्य चीनी मिलों की क्ष्मताओं में भी विस्तार किया गया है।

प्रदेश की बन्द 6 चीनी मिलों के पुर्नसंचालन- वीनस (सम्भल), गागलहेड़ी, विडवी, वेब (बलन्दशहर), बघौली (हरदोई) और टोडरपुर (सहारनपुर) का चयन किया गया है। इसके साथ ही 4 नई चीनी मिलों की स्थापना (20,000 टी.सी.डी), 6 चीनी मिलों का पुर्नसंचालन (25,500 टी.सी.डी.) तथा 42 चीनी मिलों की क्षमता में विस्तार (79,000 टी.सी.डी.) किया जा चुका है। इस प्रकार से विगत 9 वर्षों में कुल 44 परियोजनाओं के अन्तर्गत कुल 1,24,500 टी.सी.डी. की अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन किया गया है। रू. 220 करोड़ की लागत से 2 चीनी मिलों अजवापुर (खीरी), रोहाना कलां (मुजफ्फरनगर) सी.बी.जी. प्लांट (कम्प्रेस्ड बायोगैस) भी स्थापित किए गए हैं। बलरामपुर चीनी मिल लि0 कुम्भी (खीरी) पी.एल.ए. बायोप्लास्टिक बनाने का संयंत्र रू. 2,850 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। 

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।