
जहां किसानों ने दी जान वहां जमीनों के दाम 5 गुना Publish Date : 25/03/2026
जहां किसानों ने दी जान वहां जमीनों के दाम 5 गुना
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
बुंदेलखंड अब बदल रहा है। नए दौर की नई तस्वीर के साथ विकास की नई उंचाइयां छू रहा है। जहां हर साल किसान फसलों में नुकसान से तंग आकर आत्महत्या करते थे अब वहां खेतों के बीच एक्सप्रेसवे हैं, लिंक मार्गों का चौड़ीकरण है। इसके किनारे नई दुकानें हैं। दुकानों में मोबाइल से लेकर सोलर पैनल तक बिक रहे हैं। कई नई परियोजनाएं भी परवान चढ़ रही हैं। जगह-जगह प्लाटिंग चल रही है और प्रापर्टी डीलर पांच गुना तक महंगी हो चुकी जमीनों के लिए गांवों में डेरा डाले हुए हैं, लेकिन लोग जमीन बेचने को तैयार नहीं हैं। इटावा से शुरू होकर चित्रकूट तक बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे करीब 296 किलोमीटर का है।

यह जालौन के 64, चित्रकूट के 9, बांदा के 28, महोबा के 8 और हमीरपुर के 29 गांवों से गुजरता है। एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ सोलर प्रोजेक्ट लग रहे हैं। परियोजनाओं के लिए ली गई जमीनों के बदले किसानों को भारी मुआवजा मिला है। इससे पक्के मकान बन गए। घर के बाहर लग्जरी गाड़ियां खड़ी हो गई। बुंदेलखंड एक्सप्रेस से हम चित्रकूट के गोंडा गांव पहुंचे। यहां दुकानदार विजय शंकर पटेल पहले पत्थर खदान में काम करते थे। अब उनकी अपनी दुकान है और होटल बनाने की तैयारी में है।
हमीरपुर के सरीला निवासी देवमणि यहां जमीन तलाशने आए हैं। वह बताते हैं कि एक्सप्रेसवे के हर टोल प्लाजा के आसपास प्लाटिंग करने के लिए जमीन तलाश रहे हैं। मुंह-मांगी कीमत देने को तैयार हैं, लेकिन किसान जमीन बेचने को तैयार नहीं है। खोही में मिले किसान बरमपुर निवासी जय नारायण सिंह बताते हैं कि पहले पहाड़ी के आसपास ढाई से तीन लाख रुपये बीघा जमीन मिल जाती थी। अब 10 से 15 लाख में भी नहीं मिल रही है। इसकी वजह वह आवागमन की सुविधा बढ़ने से खरीदारों की संख्या बढ़ना बताते हैं।
बिना मोल मिट्टी हो गई अनमोल
बुंदेलखंड की बदलती तस्वीर देखने के लिए हमने चित्रकूट से बांदा का रुख किया। यहां के महोखर निवासी आशुतोष बताते हैं कि पिता को दो करोड़ रुपया मुआवजा मिला था। दो भाइयों में बंटवारे के बाद एक छोटा मकान बनवाया और बाकी पैसे से वह प्लाटिंग कर रहे हैं। जमीन के धंधे में मुनाफा खूब है। इसमें खेती न भी करें तो भविष्य में मुनाफा कमा सकें। बांदा के बंदा गांव के पूर्व प्रधान विवेक सिंह बताते हैं कि अब गिट्टी, मोरंग का काम छोड़ कर तमाम लोग जमीन के काम में उतर रहे हैं। खेती हो या न हो, लेकिन जमीन की खरीद बढ़ी है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के आसपास के जिलों में छोटी दुकानें अब बड़ी हो रही हैं। ढाबे बढ़ गए हैं। मैगी प्वाइंट से लेकर गेस्ट हाउस तक बन रहे हैं।
अब स्क्वायर फीट में बिक रही जमीन: यमुना और वेतवा पर फोरलेन हाईवे से खेती वाली जमीनों पर मकान बन रहे हैं। जो जमीन पांच सौ रुपये प्रति स्क्वायर फीट थी, वह 1500 से दो हजार तक पहुंच गई। हमीरपुर से कबरई के रास्ते खन्ना से आगे बढ़ते हो एक होटल पर रुके। होटल संचालक जयाशंकर लोधी पहले कानपुर में नौकरी करते थे। अब होटल चलाने के साथ उन्होंने गांव 30 लोगों को रोजगार दिया है। बताते हैं कि पहले शाम होते ही सिर्फ ट्रकें दिखती थीं, अब 24 घंटे आवागमन है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
