एआइ पर विश्वास अब वैश्विक अनिवार्यता      Publish Date : 20/03/2026

एआइ पर विश्वास अब वैश्विक अनिवार्यता

                                                                                   प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं इं0 कातिर्केय

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय समिट को संबोधित करते हुए साउथ एशियन इंस्टीट्यूट फार पीस एंड रिकान्सिलिएशन (एसएआइपीआर) के अध्यक्ष एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) 21वीं सदी की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक बन चुकी है।

आज जब विश्व अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है, जहां एक ओर जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अस्थिरता और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं, - वहीं दूसरी ओर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तीव्र विकास मानव इतिहास के एक निर्णायक मोड़ का संकेत दे रहा है।

                           

ऐसे समय में मानवता का भविष्य हमारी प्रत्येक चर्चा, प्रत्येक निर्णय और प्रत्येक नीति के केंद्र में होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस एआइ शिखर सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ यदि कोई है, तो वह है 'विश्वास'। विश्वास केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि उस मानव विवेक पर केन्द्रित है, जो उसे दिशा देता है।

विश्वास केवल एल्गोरिदम पर नहीं, बल्कि उन मूल्यों पर जो उन्हें संचालित करते हैं। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा दिए गए सूत्र को याद करते हुए कहा कि प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने जब मानवता पर संकट के बादल छा जाते हैं, तब उद्धार की राह भी उसी के भीतर से निकलती है। क्योंकि विनाश का कारण चाहे मनुष्य बने, पर सृजन और पुनर्निर्माण की क्षमता भी उसी में निहित है। मानवता ही वह शक्ति है जो स्वयं को संभालकर संसार को फिर से प्रकाश की ओर ले जा सकती है।

                               

वैदिक ग्रंथ के प्रसिद्ध श्लोक का उल्लेख करते हुए प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि जब संपूर्ण मानवता पर कोई संकट गहराता है, तब उस संकट से उबरने की शक्ति भी मानवता के भीतर ही जागृत होती है। हमारी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, विशेषकर संस्कृत की कालजयी भावना हमें यही सिखाती है कि मनुष्य की सामूहिक चेतना और सहअस्तित्व की भावना उसे हर विनाशकारी परिस्थिति से ऊपर उठाने में सक्षम बनाती है। आज मनुष्य ने कई आविष्कार किये हैं, लिकन उन सबमें मानव का दिमाग बहुत महत्वपूर्ण है।

यूनेस्को की गैब्रिएला रामोस, एनवाइयू की शांति संस्था मरीन कालिन्स रैगनेट तथा ग्लोबेथिक्स के पाओला गैल्वेज ने भी एआइ पर विश्वास अब वैश्विक अनिवार्यता विषय पर अपने अपने विचार रखे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।