भारत में दाल की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर      Publish Date : 12/03/2026

भारत में दाल की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर

                                                                           प्रोफेसर आर. एस. सेगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

भारत में दाल की बढ़ती मांग और आपूर्ति के बीच बने अंतर से निपटने के लिए केंद्र सरकार दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। एक और उपभोक्ताओं की सस्ती और निर्बाध दाल उपलब्ध कराने पर जोर है तो वहीं दूसरी ओर किसानों के हितों की सुरक्षा और घरेलू उत्पादन को मजबूत बनाने की कोशिश की जा रही है। इसी संतुलन को सजाते हुए भारत ने म्यांमार को भरोसा दिया है कि वह हर साल कम से कम साढे तीन लाख टन दाल का आयात जारी रखेगा।

इसमें ढाई लाख टन उड़द और एक लाख टन तूर दाल शामिल है। घरेलू या आयात नीति में बदलाव के बावजूद इस आयात में कटौती नहीं की जाएगी ताकि सप्लाई बाधित न हो। इसी भरोसे को बनाए रखने के लिए उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे इन दिनों म्यांमार दौरे पर है। मकसद साफ है कि जब तक घरेलू उत्पादन पूरी तरह मांग के अनुरूप नहीं हो जाता तब तक भरोसेमंद देश से आयात कर उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाया जाएगा। साथ ही मिशन मोड में उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय को मजबूत किया जाएगा।

                                 

दरअसल भारत की दाल जरूरत को देखते हुए म्यांमार समेत कुछ देश दलहन की खेती करते हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी दिक्कत संतुलन बनाए रखने की है आयात खुला रखने पर किसानों को दाम गिरने का डर रहता है, जिससे आयात पर सख्ती करते ही उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ता है। इसी कारण सरकार ऐसी रणनीति अपना रही है जिसमें रणनीतिक आयात के जरिए बाजार को इससे रखा जाए और साथ ही घरेलू उत्पादन को इतना मजबूत किया जाए कि भविष्य में आयात पर निर्भरता कम हो।

इसी दिशा में सरकार ने 6 वर्षीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया है। इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन का रकबा बढ़कर 310 लाख हेक्टेयर करना, उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना और औसत उपज 1130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना है। इस योजना पर करीब 11440 करोड रुपए खर्च किए जाएंगे हालांकि इस मिशन से उन देशों में कुछ बेचैनी है जो भारत के लिए दाल का उत्पादन करते हैं। भारत उन्हें स्पष्ट करना चाहता है की आत्मनिर्भरता का प्रयास किसी के खिलाफ नहीं है और जब तक जरूरत रहेगी आयात जारी रखा जाएगा। सरकार द्वारा लोगों को सस्ती दाल उपलब्ध कराने के साथ किसानों के हितों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

वर्ष 2025 में 70 लाख टन पहुंचा दाल का आयात

आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में देश का कुल दलहन उत्पादन लगभग 252 लाख टन रखा गया है जबकि मांग 270 से 280 लाख टन के बीच है। यानी अच्छे उत्पादन के बावजूद 20 से 30 लाख टन का अंतर बना हुआ है। उड़द और तूर जैसी दालें जिनका उत्पादन कुछ राज्यों और खास मौसम पर निर्भर करता है, बाजार में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव पैदा करती है। इसी कारण वर्ष 2025 में भारत का कुल दाल आयात रिकॉर्ड लगभग 70 लाख टन तक पहुंच गया है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।