दालों की पैदावार और अधिक बढ़ानी होगी      Publish Date : 26/02/2026

  दालों की पैदावार और अधिक बढ़ानी होगी

                                                                                     प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

संयुक्त राष्ट्र की पहल पर हर वर्ष 10 फरवरी को विश्व दलहन दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दालों का हमारी सेहत के लिए जो महत्व है, उसके प्रति जागरूकता फैलाना है और इसकी खेती के बारे में लोगों को बताना है। दलहन की खेती पर्यावरण संरक्षण के हित में भी है, क्योंकि इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। यह देखते हुए कि दालों से हमें कई लाभ मिलते हैं, हमें इसकी खेती की तरफ और ध्यान देना चाहिए। दालों से मिलने वाले फायदे की बात करें, तो हरी मूंग हमारे पेट के लिए बहुत लाभकारी होती है। इसी तरह, चना और अरहर की दाल भी सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। बावजूद इसके, इसकी खेती को लेकर जरूरी जागरूकता नहीं दिखती, जो दुखद है।

                            

दलहन की पैदावार के लिए किसानों को मेहनत खूब करनी पड़ती है, पर जब मेहनत का उचित फल नहीं मिलता, तो उनकी रुचि दलहन की खेती को लेकर घटने लगती है। यह अच्छी बात है कि केंद्र सरकार ने दालों की पैदावार बढ़ाने के प्रयास किए हैं, लेकिन उसकी योजनाएं तभी कामयाब हो सकेंगी, जब कृषि विभाग, कृषि विशेषज्ञ और किसान मिलकर इस दिशा में काम करेंगे।

जैसे- कृषि विभाग की ओर से किसानों को जागरूक करने के प्रयास करने चाहिए। कृषि विशेषज्ञ मौसम चक्र के अनुसार या जहां दलहन की पैदावार न के बराबर होती है, वहां इसकी उपज बढ़ाने के लिए नई तकनीक विकसित करें, और किसानों को चाहिए कि वे संबंधित विभागों से जरूरी जानकारियां लेकर दलहन की खेती पर अपना ध्यान केंद्रित करें, ताकि इसकी पैदावार बढ़े। अगर इन तीनों का सही मायने में संगम हो गया, तो निस्संदेह देश में दलहन की खेती नई ऊंचाई को छू सकेगी और भारत जैसे कृषि प्रधान देश में किसी भी दाल की कीमत आसमान तक नहीं पहुंच सकेगी।

यह सब करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि भारत को दालों का ज्यादा से ज्यादा निर्यात करना चाहिए, ताकि देश की आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक असर पड़े और किसानों की आय बढ़ सके।करीब डेढ़ साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी लगभग 109 उन्नत किस्म के बीजों को जारी किया था, जो जलवायु परिवर्तन, अधिक उपज और जैविक कृषि को बढ़ावा देने वाले हैं। इनमें मुख्य तौर पर अनाज, तिलहन, फल और सब्जियां हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का यह बहुत ही अच्छा प्रयास रहा, लेकिन दलहन को लेकर भी ऐसी कोशिशें होनी चाहिए। हालांकि, इन सबकी सफलता तभी सुनिश्चित हो सकेगी, जब संबंधित विभागों और किसानों के बीच उचित तालमेल बनाया जाएगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।