
वर्ष 2026 में वर्ल्ड टेक्नोलॉजी किस प्रकार से बढ़ेगी आगे Publish Date : 02/01/2026
वर्ष 2026 में वर्ल्ड टेक्नोलॉजी किस प्रकार से बढ़ेगी आगे
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं इंजी0 कार्तिकेय
Agentic AI से लेकर Robotics तक, 2026 में कैसे आगे बढ़ेगी वर्ल्ड टेक्नोलॉजी, के बारें में जानकारी दे रहें हैं हमारे विशेषज्ञ-
वर्ष 2026 में भारत और दुनिया का टेक सेक्टर प्रयोग से निकलकर व्यावहारिक, संतुलित और मानव-केंद्रित टेक्नोलॉजी अपनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
अब 2025 का साल खत्म हो चुका है और हम नए साल यानी 2026 में प्रवेश कर चुके हैं। इस दौरान भारत का टेक्नोलॉजी सेक्टर भी कई बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है। भारत में अब सिर्फ ‘डिजिटल अपनाने’ का समय नहीं रह गया है, बल्कि अब ‘इंटेलिजेंट ऑटोनॉमी’ के युग की शुरूआत हो चुकी है। हमने देखा कि 2025 का साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI टेक्नोलॉजी के साथ प्रयोग करने का था, लेकिन 2026 में हम देखेंगे कि कैसे यह मॉर्डन टेक्नोलॉजी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन जाएंगी। इन टेक्नोलॉजी का स्पष्ट प्रभाव, खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा।
AI द्वारा सॉफ्टवेयर का पुनर्निर्माणः
फ्रांस की एक अग्रणी आईटी कंपनी कैपजेमिनी (Capgemini) ने अपने टेक ट्रेंड्स में एक दिलचस्प बात कही है- “सॉफ्टवेयर ने दुनिया को खा लिया और अब AI सॉफ्टवेयर को खा रहा है।’ यह कोई मामूली सेंटेंस नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफसाइकल के पूरी तरह से रूपांतरण का स्पष्ट संकेत है। अब तक डेवलपर्स कोड लिखने में व्यस्त रहते थे, लेकिन अब वे सिर्फ अपने इरादे व्यक्त करेंगे और AI खुद कोड जनरेट करेगा और उसे मेंटेन भी करेगा।
अब AI तेजी से सॉफ्टवेयर के विभिन्न हिस्सों को बनाने और बनाए रख रहा है। अब से डेवलपर्स परिणाम बताएंगे और AI कंपोनेंट्स तैयार करेगा, जिससे डिलीवरी साइकल छोटी होगी और क्वालिटी में भी सुधार होगा। हालांकि, इस प्रक्रिया में गवर्नेंस और निगरानी महत्वपूर्ण बनी रहेगी ताकि हैलुसिनेशन, सुरक्षा खामियों और साइलेंट एरर को रोका जा सके।
वर्ष 2026 में AI की मदद से बनाए जाएंगे सॉफ्टवेयरः

यह ‘रीबिल्डिंग सॉफ्टवेयर’ का नया युग पूरी वैल्यू चेन में AI-नेटिव बिजनेस बनने के साथ जुड़ा हुआ है। यह दृष्टिकोण स्टैटिक प्लेटफॉर्म के बजाय एडेप्टिव प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर देता है। इससे सॉफ्टवेयर सर्विस प्रोवाइड करने वाली कंपनियों पर निर्भरता कम होगी और अपनी जरूरत के हिसाब से बनाए गए प्रोडक्ट्स को सस्ते दामों पर बेचकर हम बाजार में अलग और बेहतर दिखाई देंगे।
2026: नेक्स्ट-जेनरेशन ऑटोनॉमस एजेंट्स का साल
2026 का सबसे रोमांचक ट्रेंड नेक्स्ट-जेनरेशन ऑटोनॉमस एजेंट्स का उदय होना है। अभी तक हम जानते हैं कि ट्रेडिशनल AI एजेंट निश्चित स्क्रिप्ट या वर्कफ्लो से बंधे होते थे, लेकिन नई जनरेशन के AI एजेंट्स अत्याधुनिक रीजनिंग, एडेप्टिव लर्निंग और मल्टी-एजेंट टीमवर्क का उपयोग कर सकेंगे। यह मुश्किल व्यावासायिक चीजों को समझेंगे, रियल-टाइम में फैसले लेंगे और कठिन या मल्टी-स्टेप चैलेंजेस वाले कामों में बिना रुके, करने के लिए पूरी तरह से मदद करेंगे।
AI-Beyond के को-फाउंडर जसप्रीत बिंद्रा का मानना है, कि 2026 में एजेंटिक AI की असली सफलता नौकरियों को बदलना नहीं, बल्कि नौकरियों को कई गुणा बढ़ाना होगा। हम AI को ‘कोपायलट’ से ‘सहकर्मी’ के रूप में देख रहे हैं। ऐसे एजेंट जो मानव के द्वारा किए जाने वाली थोड़ी बहुत निगरानी में पूरे वर्कफ्लो को शुरू से अंत तक चलाते हैं। यह हफ्तों के काम को कुछ घंटों में कर देगा, मानवीय प्रोडक्टिविटी को भी बढ़ाएगा लेकिन मानव की ज़रूरत या महत्व बिल्कुल ख़त्म नहीं होगी। इस रेस में जीत उन कंपनियों या संगठनों को मिलेगी, जो अपने काम को मानवं के फैसलों और ऑटोमेटेड स्मार्ट सिस्टम (Autonomous Agents) के इर्द-गिर्द दोबारा डिज़ाइन करेंगे, ना कि वो जो सभी चीजों को सिर्फ ऑटोमेट करने की कोशिश कर रहे हैं।
InCruiter के को-फाउंडर और CEO भी इस बात से सहमत हैं। उन्होंने ईटीवी भारत को बताया कि, ‘मेरे ख्याल से, मैं जो InCruiter में देख रहा हूं कि एजेंटिक AI का मतलब लोगों की जगह लेना बिल्कुल नहीं है, बल्कि यह तो मानवीय की क्षमताओं को कई गुना अधिक बढ़ा देगा। जरा सोचिए कि रिक्रूटर्स या टेक टीम वालों के पास ऐसा एक ऐसा AI एजेंट हो, जो रोज़-रोज़ के झंझट वाले कामों को खुद ही संभाल लें, जैसे-रिज्यूम को पढ़कर समझना, फोन पर शुरुआती इंटरव्यू लेना, कैंडिडेट्स को स्क्रीन करना, कोडिंग टेस्ट करवाना, इंटरव्यू का टाइम फिक्स करना और फीडबैक लिखना आदि, और वह भी बहुत कम समय में। इससे मानव को अन्य मुख्य कामों जैसे- सही-गलत का फैसला करना, लोगों से अच्छे रिलेशन बनाना और स्ट्रेटजी बनाने के लिए फ्री टाइम मिल सकेगा।
2026 तक जो टीम्स ये एजेंटिक AI को सोच-समझकर अपने काम में शामिल करेंगी, वो कई गुना ज्यादा प्रोडक्टिव हो जाएंगी। यह कंपनियां ना सिर्फ स्पीड के मामले में बल्कि फैसले लेने में भी एकदम सटीक और ज्यादा स्मार्ट हो जाएंगी।
हालांकि, pi-labs के सीईओ अंकुश तिवारी का नजरिया इससे अलग है। उनके अनुसार, ‘2026 में Agentic AI का सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि वह प्रोसेस जो ऑब्जेक्टिव तरीके से जज किए जा सकते हैं, उन्हें पूरी तरह ऑटोमेट कर देगा और जो काम सब्जेक्टिव हैं, मतलब जहां पर्सनल टच या फीलिंग्स की जरूरत है, वह और भी अधिक प्रीमियम हो जाएंगे।
2026 में क्या-क्या नया हो सकता है

उन्होंने आगे कहा, ‘पहले लोगों को डर था कि AI इंसानों की नौकरियां छीन लेगा, लेकिन 2025 ने साबित कर दिया कि असल में मानव ही वैल्यू क्रिएट करने में सबसे मजबूत हैं। कुछ बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों ने तो जोश में आकर ढेर सारे कर्मचारियों को निकाल भी दिया था, फिर बाद में पछताकर दोबारा हायरिंग शुरू कर दी है। उनका मानना है कि अब ब्रांड्स उन ग्राहकों से प्रीमियम चार्ज कर पाएंगे जो AI चैटबॉट से सटीक सॉल्यूशन लेने की बजाय मानव से बात करना पसंद करेंगे, जहां थोड़ा पर्सनल टच हो। लिहाजा, एजेंटिक AI प्रोडक्टिविटी को तो कई गुना बढ़ा देगा, लेकिन इसमें हमेशा मानवीय एलिमेंट की जरूरत बनी रहेगी।
Turinton के चीफ ग्रोथ ऑफिसर विकास सिंह ने कहा ‘‘हम देख रहे हैं कि मार्केट में अब कंपनियां एजेंटिक AI को लेकर सोच बदल रही है। कंपनियों को पहले लगता था कि AI सभी फैसले खुद ले लेगा, इंसानों की जरूरत कम पड़ेगी, लेकिन सप्लाई चेन और फैक्ट्री में इसका इस्तेमाल करने के बाद पता चला कि असली फायदा मानव को हटाने से नहीं, बल्कि रियल टाइम क्लैरिटी से आ रहा है। अगर प्लानर्स को सबकुछ साफ-साफ दिखता है, तो वह जल्दी और अधिक बेहतर फैसले ले सकते हैं।’’
उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में सफलतापूर्वक आगे बढ़ने वाली कंपनियां ऑटोनॉमी से पीछे नहीं भाग रही हैं, बल्कि फैसलों की क्वालिटी बढ़ा रही हैं। वह छोटे-मोटे रिपिटेटिव काम ऑटोमेट कर रहे हैं और लेकिन बड़े स्ट्रैटेजिक फैसले लेने का अधिकार मानव के पास ही रखना बेहतर समझ रही हैं और यही मानव की असली वैल्यू है। विकास ने इसका उदाहरण देते हुए आगे बताया कि जैसे J-J, Lenovo, Cisco, Intel आदि कंपनियां अपने प्लानर्स को निकाल नहीं रही हैं, बल्कि उन्हें स्मार्ट इनसाइट्स देकर कहीं ज्यादा पावरफुल बना रही हैं। यही 2026 का विनिंग मॉडल हो सकता है।
एडेप्टिव लर्निंग और लगातार बेहतर होता AI
2026 में AI एजेंट्स तेजी से एडेप्टिव लर्निंग का इस्तेमाल करेंगे। इसका मतलब है कि यह सिस्टम हर इंटरेक्शन, यूज़र फीडबैक और बदलते बिजनेस माहौल से सीखते रहेंगे और खुद को लगातार बेहतर बनाते जाएंगे। पुराने फैसलों का विश्लेषण करना, उनके नतीजों पर नजर रखना और रियल-टाइम डेटा को शामिल करना इन एजेंट्स की खासियत बन जाएगी। इससे AI ज्यादा सटीक अनुमान और बेहतर सुझाव दे पाएगा। इस तरह की लगातार सीखने वाली सोच से न सिर्फ काम करने की रफ्तार और गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि कंपनियां बाजार में आने वाले बदलावों, ग्राहकों की पसंद और अंदरूनी कामकाज से जुड़ी चुनौतियों पर तुरंत प्रतिक्रिया भी दे सकेंगी।
सुरक्षा और नियमों पर पहले से ज्यादा फोकसः
जैसे-जैसे AI एजेंट्स ज्यादा खुद से फैसले लेने लगेंगे और अहम बिजनेस कामों का हिस्सा बनेंगे, वैसे-वैसे सुरक्षा और नियमों का पालन सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाएगा। आने वाले समय में AI प्लेटफॉर्म इस बात पर ज्यादा ध्यान देंगे कि डेटा सुरक्षित रहे, बातचीत एन्क्रिप्टेड हो, सही लोगों को ही एक्सेस मिले और हर गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जाए। 2026 तक AI सिस्टम रियल-टाइम में एजेंट्स की गतिविधियों पर नजर रखेंगे ताकि गलत या गैर-कानूनी कामों को रोका जा सके। खासतौर पर हेल्थकेयर, बैंकिंग और सरकारी क्षेत्रों में नैतिक AI और नियमों का पालन बेहद जरूरी होगा।
एंटरप्राइज सिस्टम्स से गहरा जुड़ावः
2026 में AI एजेंट प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग बिजनेस सिस्टम्स से जुड़ना बेहद जरूरी हो जाएगा। एडवांस AI एजेंट्स CRM, ERP, कम्युनिकेशन टूल्स, एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर और क्लाउड सर्विसेज से आसानी से कनेक्ट होंगे। इससे वह तुरंत डेटा एक्सेस कर पाएंगे, पूरे वर्कफ्लो को अपने आप चला सकेंगे और ऐसे इनसाइट्स देंगे जो सीधे बिजनेस फैसलों को बेहतर बनाएंगे।
इस पर और रोशनी डालते हुए विकास सिंह कहते हैं, ‘अब एकीकरण ही सबसे बड़ा कंप्टीशन फायदा बनता जा रहा है। आज ज्यादातर सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग टीमें अलग-अलग टूल्स में बंटी हुई हैं, जैसे- डिमांड, प्लानिंग, इन्वेंट्री ऑप्टिमाइजेशन और सीनारियो एनालिसिस। डेटा और उस पर लिए जाने वाले फैसलों के बीच बड़ा गैप है। 2026 तक वही कंपनियां आगे रहेंगी जो एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएंगी, जहां डिमांड, इन्वेंट्री, एनालिसिस और ऑप्टिमाइजेशन सब एक जगह जुड़े हों।”
भाषा समझने की बेहतर क्षमता और मानव के जैसा संवादः नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और अंडरस्टैंडिंग में सुधार के साथ AI एजेंट्स सिर्फ शब्द ही नहीं, बल्कि उनका मतलब, संदर्भ, भावना और इरादा भी बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। 2026 में AI से उम्मीद की जा रही है कि वह इंसानों से ज्यादा नैचुरल और आसान तरीके से बातचीत करेगा। वॉयस और चैट दोनों के जरिए कई प्लेटफॉर्म पर सपोर्ट मिलेगा। इससे कस्टमर एक्सपीरियंस बेहतर होगा, टीमों के बीच सहयोग बढ़ेगा और AI ऐसे जटिल संवाद भी संभाल पाएगा, जो पहले सिर्फ के मानव ही कर सकता था।
समझाने योग्य और ट्रांसपेरेंट एआईः
जैसे-जैसे AI सिस्टम ज्यादा जटिल होते जा रहे हैं, कंपनियां यह जानना चाहेंगी कि AI ने कोई फैसला क्यों लिया। 2026 तक AI प्लेटफॉर्म यह साफ-साफ बताने में सक्षम होंगे कि किसी काम के पीछे कौन सा डेटा, कौन सा तर्क और कौन सी प्रक्रिया काम कर रही है। यह पारदर्शिता ग्राहकों, कर्मचारियों और रेगुलेटर्स का भरोसा जीतने के लिए बेहद जरूरी होगी, खासकर वहां जहां फैसले सुरक्षा, कानून या पैसे से जुड़े होते हैं।
फिजिकल एआईः रोबोटिक्स की अगली छलांग
फिजिकल AI उस नई पीढ़ी की रोबोटिक्स को दर्शाता है, जहां AI सिर्फ सोचता नहीं बल्कि खुद एक्शन भी लेता है। इसमें ऑटोनॉमस रोबोट, गाइडेड व्हीकल्स, ड्रोन, रोबोटिक आर्म्स, चार पैरों वाले रोबोट और ह्यूमनॉइड रोबोट भी शामिल हैं।
CES 2025 में NVIDIA ने इस बदलाव पर जोर देते हुए कहा, ‘फिजिकल AI 50 ट्रिलियन डॉलर की मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाएगा। जो कुछ भी चलता है, जैसे - कार, ट्रक, फैक्ट्री या वेयरहाउस - सब रोबोटिक और AI से ऑपरेट किया जाएगा।’
ऑन-डिवाइस AI मॉडल वर्ज़न बिना इंटरनेट कनेक्शन के काम कर सकता हैः
अनिल अग्रवाल के मुताबिक, ‘फिजिकल AI और एडवांस रोबोटिक्स फैक्ट्रियों, वेयरहाउस और हेल्थकेयर सेक्टर में स्मार्टनेस ला रहे हैं।” वहीं विकास सिंह मानते हैं कि “2026 तक भारत खुद को प्रैक्टिकल AI डिप्लॉयमेंट के लिए एक उदाहरण के रूप में पेश करेगा। यहां सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि ऐसे सिस्टम बनाए जा रहे हैं जो सीमित संसाधनों में भी सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से काम कर सकेंगे।”
भारत के लिए 2026 के बड़े टेक ट्रेंड्स
5G से कमाई और 6G की तैयारी: ITU-R की सिफारिश M-2160 में 6G यानी IMT-2030 के लिए रोडमैप तय किया गया है। भारत सरकार ने भी 2023 में भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट जारी किया, जिसका मकसद 2030 तक भारत को 6G टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लीडर बनाना है। 6G से ज्यादा स्पीड, कम लेटेंसी, बेहतर कवरेज और AI-नेटिव नेटवर्क जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
वर्चुअलाइजेशन की स्पीडः टेकसाई रिसर्च के अनुसार, भारत का सर्विस वर्चुअलाइजेशन मार्केट 2024 में 134 मिलियन डॉलर का था, जो 2030 तक 275.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण लागत कम करते हुए और संसाधनों का सही इस्तेमाल करना है।
मेड इन इंडिया चिप्स और सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरताः
भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ी छलांग लगा रहा है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की धोलेरा फैब यूनिट 2026 तक देश में चिप्स बनाना शुरू कर सकती है। इससे भारत की टेक आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
क्लाउड 3.0 का दौरः
2026 में भारत का आईटी खर्च 176 बिलियन डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। हाइब्रिड, प्राइवेट और सॉवरेन क्लाउड अब AI और एजेंटिक सिस्टम्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनते जा रहे हैं।
साइबर सिक्योरिटी और डीपफेक की लड़ाईः
AI जहां साइबर अटैकर्स को ताकत देगा, वहीं डिफेंडर्स भी AI एजेंट्स का इस्तेमाल करेंगे। AI टेक्नोलॉजी के मामले में दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती डीपफेक बनने की उम्मीद की जा रही है।
भारत का AI रेगुलेशन मॉडलः
भारत का हल्का लेकिन इनोवेशन-फर्स्ट AI रेगुलेशन मॉडल ग्लोबल साउथ के लिए एक मॉडल बन सकता है। सही गार्डरेल्स के साथ इनोवेशन और जिम्मेदारी दोनों एक साथ चल सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
