खाद्य-सुरक्षा के सम्बन्ध में गेहूँ      Publish Date : 27/12/2025

                       खाद्य-सुरक्षा के सम्बन्ध में गेहूँ

                                                                                                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

देश की खाद्य सुरक्षा में मददगार ही होगी गेहूं उत्पादन की बढ़ोतरी। सौभाग्य से गत वर्ष के खाद्यानों के कुल उत्पादन (यानी 21.72 करोड़ टनों) के परिप्रेक्ष्य में इस वर्ष 2007-08 में इनका कुल उत्पादन 23.06 करोड़ टन तक पहुंचा है अर्थात 6 कुल खाद्यान्न उत्पादन में प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

इसी तरह गेहूं का उत्पादन गत वर्ष (2006-2007) के मुकाबले इस वर्ष 3.42 फीसदी बेहतर तथा चावल का उत्त्पादन भी 3.3 प्रतिशत अधिक हुआ है। दालों का लगभग 6.4 फीसदी का तथा तिलहनों का उत्पादन भी लगभग 18 प्रतिशत बेहतर हुआ है। उत्पादन में वृद्धि का करिश्मा अच्छी मानसून लाभकारी समर्थन मूल्य तथा बेहतर खरीदी-व्यवस्था को जाता है।

                                                                        

गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 150 रूपये बेहतर समर्थन मूल्य 31 लाख टन अधिक गेहूं की खरीदी एक फीसदी बेहतर टैक्स 12.5 फीसदी की वजह से पंजाब जैसे गेहूं उत्पादक राज्य के खजानें को 1000 करोड़ रूपये प्राप्त हुए है, जो पिछले साल के 500 करोड़ रूपयों से तो 500 करोड़ रूपये बेहतर है। लगभग यहीं दशा कमोवेश हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की भी है।

इस वर्ष देश में बेहतर गेहूं अधिग्रहण के चलते अब देश को बाहर के देशों से गेहूं आयात करने की आवश्यकता नहीं होगी। अच्छे उत्पादन तथा अधिग्रहण के चलते देश में बढ़ रही महंगाई पर भी मनोवैज्ञानिक तौर पर अंकुश लग सकेगा, जिससे आम लोगों के साथ ही सरकार को भी राहत महसूस होगी।

यदि सरकार ने इस वर्ष भी खरीदी के समर्थन मल्य को लाभप्रद बनाए रखना है, तो हम इतना गेहूं देश में ही पैदा कर सकेंगे, जिससे अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ इसका कुछ भाग का निर्यात भी कर सकेंगे। इसमें किसानों को भी लाभ पहुंचेगा। अब यदि किसानों के पास पैसा होगा तो वह है बेहतर जीवन जी सकेंगे और वे लिए गए कर्जे की अपने ही स्तर पर ही उसकी भरपाई भी कर सकेंगे।

                                                               

अंततः तो किसानों की सही सकारात्मक मेहनत की उर्जा ही गेहूं के भी उत्पादन को और भी बेहतर उंचाईयों तक ले जा सकती है। इस प्रकार सरकार भी देश के जन-जन तक आलू की सब्जी के साथ भरपूर गेहूं की रोटी को भी उपलब्ध कराना सुनिश्चत कर सकती है। इससे देश के गरीब तबकों के लोगों को भी भोजन उपलब्ध हो सकता है। अंततः तो यह अपनी खाद्य सुरक्षा को और भी मजबूती प्रदान करने में मददगार ही साबित होगी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।