
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव Publish Date : 26/12/2025
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
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जलवायु परिवर्तन के कारण तनाव में पेड़ बिना पके ही टपक रहे हैं पेड़ से फल।
जलवायु परिवर्तन ने फसलों पर ही नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के पेड़ों पर भी अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। जलवायु परिवर्तन के चलते न सिर्फ फलों के राजा आम बल्कि से संतरा अमरूद जैसे फल भी बगैर पूरा पके ही पेड़ों से टपक जा रहे है। इससे फल उत्पादकों को लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि फलों में हार्मोनल बदलाव की वजह से ऐसा हो रहा है। बढ़ती गर्मी सूखा और पत्तियों का झरना इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में आम उत्पादकों की इस समस्या के विकराल रूप लेने के बाद क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने शोध किया और आम के पेड़ों में होने वाली जैविक प्रक्रियाओं से जुड़ा निष्कर्ष निकला है। वैज्ञानिकों का दावा है कि जलवायु संकट इतना गंभीर है कि कई बार सिर्फ 0.1% फल ही पूरी तरह परिपक्व हो पाते हैं। कुछ इसी तरह की समस्या भारत के आम उत्पादक किसान भी झेल रहे हैं।
सीतापुर के बागवान अखिल मियां का कहना है कि जलवायु और पर्यावरण की प्रतिकूलता से आम के पेड़ों में फल और बौर दोनों प्रभावित हो रहे हैं। फल अथवा के ही डंठल छोड़ देते हैं तापमान में बदलाव से बोर कमजोर हो जाता है जिससे फल नहीं लगते हैं। कई बार फल लगते हैं लेकिन कल होकर सूखकर गिरने लग जाते हैं। वहीं हरदोई के बागवान राम किशोर कहते हैं कि पहले आम के बार में कीड़े लग रहे थे। उचित प्रबंधन के बाद भी आम का संरक्षण कठिन होता जा रहा है।

इसके सम्बन्ध में दुलहैड़ा ग्राम के ग्राम प्रधान बाल किशोर ने बताया कि कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन के कारण या कोई अन्य हार्मोनल परिवर्तन के कारण आम की फसल के अलावा नींबू के पेडों पर भी बिना मौसम फल टपकने की समस्या देखी गई है।
पेड़ में पोषण की कमी भी कभी-कभी फल टपकने की बनती है समस्या
वैसे किसी भी पौधों के संतुलित पोषण के लिए 17 पोषण तत्वों की आवश्यकता पड़ती है लेकिन जब इनमें कमी होती है तो पौधों की मेटाबॉलिक क्रिया प्रभावित हो जाती है जिसके कारण पौधों के संतुलित विकास में अवरोध पैदा हो जाता है। बोरोन और जिंक की कमी से भी कभी-कभी पौधों से बिना पके फल टपकने लगते हैं।
कैसे हो समाधान
एक प्रभावी उपाय के तौर पर पौध हार्मोन के कृत्रिम रूप का परीक्षण किया गया है। फूल आने के शुरुआती चरण में इनका छिड़काव करने से हार्मोन संतुलन बना रहता है और पेड़ फल में रखता है। शुरुआती परीक्षण में पैदावार में 17% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसलिए फल वाले वृक्षों पर विशेष ध्यान रखते हुए हार्मोन तथा पोषण तत्वों को समय पर फल वाले पौधों को उपलब्ध करा देंगे तो आप इस समस्या से काफी हद तक बच सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहे बदलाव में सभी को सतर्क रहना है और इसके बचाव के लिए हर संभव कदम प्रत्येक नागरिक को उठाना है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
