
मृदा उत्पादकता एवं फसल उत्पादन को बढ़ाने में जैव उर्वरक का योगदान Publish Date : 23/12/2025
मृदा उत्पादकता एवं फसल उत्पादन को बढ़ाने में जैव उर्वरक का योगदान
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
जैव उर्वरक की आवश्यकता एवं महत्व
कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दृष्टि से बीज, जल प्रबंध, उर्वरक तथा पौध संरक्षण का उल्लेखनीय योगदान रहा है, किंतु आज मृदा स्वास्थ्य, तथा फसल उत्पादन की स्थिति को देखते हुए कृषि के क्षेत्र में नए रूप से सोचने की आवश्यकता प्रतीत हो रही है, क्योंकि आज के समय में हमारी कृषि रसायनिक उर्वरकों व दवाओं पर निर्भर हो गई है, जिसका दुष्प्रभाव हम मृदा की उर्वरता और उत्पादकता को देखकर बहुत आसानी से समझ सकते हैं।
आज मृदा के स्वास्थ्य को देखते हुए कृषि के क्षेत्र में हमें रसायनिक उर्वरकों और दवाओं की जगह जैव उर्वरक को अपनाने की बेहद आवश्यकता प्रतीत होती है।
जैव उर्वरक का अर्थ एवं परिभाषा
जैव उर्वरक सूक्ष्म जीवाणुओं युक्त टीका है जिसके उपयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि होती है। इसमें जीवित सूक्ष्म जीवाणुओं के शक्तिशाली विभेद होते हैं जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकरण द्वारा तथा मृदा फॉस्फेट को विलेय करके पौधों को नाइट्रोजन व फास्फोरस जैसे पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
विभिन्न फसलों के लिए जैव उर्वरक
देश में निम्नलिखित जैव उर्वरकों को किसानों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाता है:
नाइट्रोजन युक्त जैव उर्वरक
- राइजोबियमः दलहनी फसलों में नाइट्रोजन के लिए।
- एजोटोबैक्टरः सभी खाद्यान्नों, तिलहन, कपास, गन्ना, सब्जियों, बागवानी तथा वानिकी पौधों में नाइट्रोजन के लिए।
- एसीटोबैक्टरः केवल गन्ने में नाइट्रोजन के लिए।
- एजोलाः खड़े पानी वाले धान में नाइट्रोजन के लिए।
- कम्पोस्टिंग कल्चरः कम्पोस्ट जल्दी पकने के लिए।
- फास्फोरस युक्त जैव उर्वरकः फास्फेटिक जैव उर्वरक फास्फोरस को घुलनशील अवस्था में बदलने का कार्य करता है।
- फॉस्फेट विलायक सूक्ष्म जीवः ये सभी प्रकार की फसलों व सब्जी आदि में प्रयोग होता है।
- माइकोराईजाः फल, वृक्ष व दलहनी फसल।
जैव उर्वरक पौधों को प्रायः नाइट्रोजन व फास्फोरस की उपलब्धि में सहायक है। इसके साथ-साथ यह पौधों को वृद्धिकारी जटिल पदार्थ भी देते हैं तथा रोगों एवं कीड़ों के संक्रमण में कमी लाते हैं।
जैव उर्वरक के लाभ
- पोषक तत्व के सस्ते स्रोत।
- पौधों के अंकुरण व वृद्धि में सहायक।
- रोगाणुओं का दमन, तथा फसलों की रक्षा।
- आगामी फसलों के लिए लाभदायक अवशेष।
- कृषि उत्पादों के उत्तम गुण।
- मृदा के स्वास्थ्य में सुधार।
विभिन्न जैव उर्वरकों की नत्रजन स्थिरीकरण या फास्फोरस घुलनशील बनाने की क्षमता
|
जैवउर्वरक |
नत्रजन स्थिरीकरण क्षमता (कि.ग्रा./घंटा/वर्ष) |
फसलें |
उत्पादन वृद्धि प्रतिशत |
|
राइजोबियम कल्चर |
250-300 |
दलहनी |
0.60 |
|
एजोटोबैक्टर |
10-60 |
धान्य |
5.30 |
|
एजोस्पिरिल्म |
0.40 |
ज्वार, धान्य आदि |
0.20 |
|
नीली-हरी शैवाल |
25-30 |
धान |
0.15 |
|
एजोला |
25-30 |
धान |
0.15 |
फास्फोरस जैव उर्वरक (अघुलनशील फास्फोरस को घुलनशील में परिवर्तन)
- 76पी एस बी कल्चर 20-25 सभी फसलें 20-30।
- माइकोराइजा (वीएएम) 15-20 धान, मक्का, अलसी, प्याज व गेहूँ 20-30।
जैव उर्वरकों के उपयोग की विधि
बीज उपचार
200 ग्राम जैव उर्वरक (एजोटोबैक्टर या फास्फेटिक) का 200-500 मिली पानी में घोल बनाएं तथा इस घोल को किसी छायादार जगह पर 10-12 कि.ग्रा. बीजों पर दोनों हाथों से भली प्रकार तब तक मिलाएं जब तक कि सभी बीजों पर कल्चर की एक समान परत न चढ़ जाए। तत्पश्चात छाया में बीजों को फैलाकर तुरंत बुवाई कर दें।
ऊसर भूमि में राइजोबियम से उपचारित बीज के ऊपर जिप्सम का आवरण और अम्लीय मृदा में खड़िया का आवरण चढ़ा देने से मृदा क्षारता और अम्लता का राइजोबियम की क्षमता पर बुरा प्रभाव कम पड़ता है, इस प्रक्रिया को बीज को कोट करना या प्लेरिंग करना कहते हैं।
मृदा उपचार
2-3 कि.ग्रा. जैव उर्वरक का 10-60 कि.ग्रा. कम्पोस्ट भुरभुरी मिट्टी में मिश्रण तैयार कर एक एकड़ खेत में आखिरी जुताई के समय या फिर पहली सिंचाई के पूर्व समान रूप से खेत में छिड़क दें।
200 ग्राम जैव उर्वरक 10-12 कि.ग्रा. बीज के लिए पर्याप्त होता है। 5-10 कि.ग्रा. जैव उर्वरक प्रति हेक्टेयर भूमि के लिए पर्याप्त है। लगभग 10 कि.ग्रा. नील हरित शैवाल प्रतिएकड़ धान के लिए पर्याप्त होता है। 10 क्विंटल एजोला प्रति एकड़ धान के लिए पर्याप्त होता है।
जैव उर्वरकों के उपयोग के दौरान रखी जाने वाली आवश्यक सावधानियां
- जैव उर्वरक को सदैव धूप व गर्मी से बचाएं।
- पैकेट उपयोग के समय ही खोलें।
- बीज उपचार छाया में ही करें।
- कल्चर को रसायन के सीधे संपर्क से बचाएं।
- कल्चर का प्रयोग यथा शीघ्र कर लेना चाहिए।
- यदि किसी कारण वस इसे कुछ समय तक रखना हो तो ठंडे स्थान (30° सेल्सियस से कम ताप पर) में रखा जाए।
- 40° सेल्सियस ताप से अधिक ताप पर कल्चर की शक्ति का ह्रास प्रारंभ हो जाता है।
- कल्चर तैयार करने से 3 माह के अंदर इसका प्रयोग कर लेना चाहिए।
- खेत में नाइट्रोजन की ज्यादा मात्रा डालने से कल्चर का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
- कल्चर को हल्के हाथों से मिलाना चाहिए ताकि बीज के छिलके रगड़ से अलग न हो जाएं।
- जैव उर्वरक के अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए इन्हें हमेशा भरोसेमंद स्थानों से ही खरीदें तथा इनको प्रमाणित तिथि तक ही प्रयोग में लाएं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
