कृषि आधुनिकीकरण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी और भारत सरकार की पहल      Publish Date : 12/12/2025

कृषि आधुनिकीकरण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी और भारत सरकार की पहल

                                                                                                                                                                                          प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

भारत की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी कृषि से ही जीविकोपार्जन करती है। युवाओं के द्वारा कमोबेश कृषि की तस्वीर बदल सकती है। दिक्कत केवल इस बात की है कि किसान का बेटा किसान नहीं बनना चाहता और किसान स्वयं अपने बच्चों को कृषि कार्य में नहीं रखना चाहता है। इसी तरह कृषि की पढ़ाई करने वाले युवा भी वापस गाँव में जाकर खेती नहीं करना चाहता है। कृषि को बेकारों, बेगारों और निरक्षरों का पेशा मानने की मानसिकता पर पूर्ण-विराम लगाने की आवश्यकता है।

यदि युवा खेती नहीं करेंगे तो भविष्य के किसान कहाँ से आएँगे? विकसित भारत का रास्ता युवाओं, खेतों और खलिहानों से होकर ही गुजरेगा। कृषि आधुनिकीकरण का मतलब है नयी तकनीकियों और आधुनिक पद्धतियों का कृषि क्षेत्र में प्रयोग, ताकि उत्पादकता बढ़ाई जा सके और किसान की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सके। कृषि आधुनिकीकरण का उद्देश्य न सिर्फ उत्पादकता ही है बल्कि लागत को घटाने और किसानों की जीवन बढ़ाना है शैली में सुधार लाना भी है। कृषि में नई तकनीकों का समावेश जैसे उन्नत बीज, ड्रिप सिंचाई, जैविक खेती और उन्नत कृषि यंत्रों का प्रयोग करना, इसके अतिरिक्त डिजिटल तकनीक जैसे सैटेलाइट इमेज, मोबाइल एप्लिकेशन और ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कृषि को अधिक कुशल और लाभकारी बना सकता है।

युवाओं की भागीदारी कृषि के आधुनिकीकरण में बेहद महत्वपूर्ण है। आज का युवा तकनीकी के प्रति अधिक जागरूक है, युवाओं के पास नए विचार और उन्नत तकनीकियों को अपनाने का जुनून होता है। वे कृषि में न केवल मौजूदा पद्धतियों को सुधार सकते हैं बल्कि नई कृषि पद्धतियों का विकास भी कर सकते हैं जैसे कि स्मार्ट फार्मिंग, रोबोटिक्स, और डेटा-ड्रिवन फैसले लेने की प्रक्रिया, इन सबके लिए युवा महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। कृषि से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों जैसे जैविक उत्पादों, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि उपकरण, और कृषि-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स में युवा उद्यमी सक्रिय हैं। इससे न केवल रोजगार पैदा हो रहे हैं, बल्कि युवा किसानों के लिए नए बाजार और अवसर भी खुल रहे हैं।

                                                             

युवाओं को फल-फूलों की खेती, मशरूम की खेती, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन, दूध के विभिन्न उत्पाद तैयार करना, क्राफ्टेड फल के पौधे तैयार करना, खाद-बीज की दुकान लगाना, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन, सजावटी पौधों की नर्सरी खोलना, खाद्य प्रसंस्करण और आँवला, तिलहन, दलहन की प्रसंस्करण इकाई लगाना खूब भा रहा है। फसलों को सही दाम कैसे मिले, शीत गृहों में फलों और सब्जियों को सुरक्षित कैसे रखा जाए और कृषि से प्राप्त कच्चे माल का निर्यात संबंधी गतिविधियों के बारे में खबर युवा किसान भलीभांति रखते हैं।

कृषि कार्य में समय का काफी महत्व है। सही समय पर और सही तरीके से खेतों की जुताई, फसलों की बुआई, रोपाई, निराई, सिंचाई और कटाई न हो तो सही लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। युवा किसान इन सभी चुनौतियों का सामना ठीक से कर लेते हैं जिससे उन्हें विशेष समस्याएँ नहीं झेलनी पड़ती हैं। देश के नीति निर्धारणकर्ताओं के सामने चुनौती है कि ऐसी नीतियाँ बनाएँ कि गाँवों में युवा रह सकें और खेती-किसानी कर सकें। कृषि में युवाओं के आने से युवा आत्मनिर्भर होंगे, युवाओं के आत्मनिर्भर होने से देश आत्मनिर्भर होगा। भारत के पास युवाओं की अच्छी जनसंख्या है, बड़ा बाजार है, उत्पादों को खपाने के लिए करोड़ों की संख्या में उपभोक्ता वर्ग हैं और विविध फसलों के लिए विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ और मौसम हैं, आवश्यकता सिर्फ ऊर्जावान शिक्षित युवा किसानों की है। भारत सरकार कृषि और किसानों के कल्याण के बारे में बहुत चिंतित है और यह विभिन्न मुद्दों के समाधान के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर लगातार काम कर रही है।

भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र को प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास की दिशा में उन्नति करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके अंतर्गत योजनाएं और कार्यक्रम शामिल हैं, जो युवाओं को कृषि क्षेत्र में आकर्षित करने और उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने का काम करते हैं। कृषि राज्य का विषय है, इसलिए भारत सरकार उचित नीतिगत उपायों और वित्तीय सहायता के माध्यम से राज्यों के प्रयासों को पूरा करती है। भारत सरकार की विभिन्न योजनाएं उत्पादन बढ़ाकर, लाभकारी रिटर्न और किसानों के कल्याण के लिए हैं, जिनमें शामिल हैं:

1. पीएम किसान के माध्यम से किसानों को आय सहायता;

2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई),

3. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएमकेएमवाई) एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसे सबसे कमजोर किसान परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था;

4. कृषि क्षेत्र के लिए संस्थागत ऋणः

5. उत्पादन लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करना;

6. देश में जैविक खेती को बढ़ावा देना;

7. प्रति बूंद अधिक फसलः

8. सूक्ष्म सिंचाई कोष;

9. किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देना;

भारत सरकार ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन और संवर्धन के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएसएस) शुरू की। एफपीओ का गठन और संवर्धन कार्यान्वयन एजेंसियों (आईए) के माध्यम से किया जाना है। एफपीओ को 03 वर्ष की अवधि के लिए प्रति एफपीओ 18.00 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता मिलती है। इसके अलावा, एफपीओ के प्रत्येक किसान सदस्य को 2,000 रुपये तक के मैचिंग इक्विटी अनुदान का प्रावधान किया गया है, जिसकी सीमा 5 लाख रुपये है।

एफपीओ को राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) प्लेटफॉर्म पर शामिल किया गया है, जो पारदर्शी मूल्य खोज पद्धति के माध्यम से अपने कृषि उत्पादों के ऑनलाइन व्यापार की सुविधा प्रदान करता है, ताकि एफपीओ को अपनी उपज के लिए बेहतर लाभकारी मूल्य मिल सके।

10. राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम) मधुमक्खी पालन के महत्व को ध्यान में रखते हुए, वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन के समग्र प्रचार और विकास और "मीठी क्रांति" के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए क्षेत्र में इसके कार्यान्वयन के लिए 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम) नामक एक नई केंद्रीय क्षेत्र योजना शुरू की गई थी। कुछ उपलब्धियों में शामिल हैं; कृषि के लिए 5वें इनपुट के रूप में मधुमक्खियों / मधुमक्खी पालन को मंजूरी दी गई है। शहद के परीक्षण के लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम) के तहत 4 विश्व स्तरीय अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं और 35 मिनी शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं स्वीकृत की गई हैं। मधुमक्खी पालकों/शहद समितियों/फर्मों/ कंपनियों के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए मधुक्रांति पोर्टल शुरू किया गया है।

11. कृषि मशीनीकरणः

12. नमो ड्रोन दीदी सरकार ने हाल ही में 2024-25 से 2025-26 की अवधि के लिए 1261 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करने के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य 15,000 चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को कृषि उद्देश्य (उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग) के लिए किसानों को किराये की सेवाएं प्रदान करने के लिए ड्रोन प्रदान करना है। इस योजना के तहत, ड्रोन की खरीद के लिए महिला एसएचजी को ड्रोन और सहायक उपकरण / सहायक शुल्क की लागत का 80 प्रतिशत (अधिकतम 8.0 लाख रुपये तक) केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह योजना स्वयं सहायता समूहों को टिकाऊ व्यवसाय और आजीविका सहायता भी प्रदान करेगी और वे प्रति वर्ष कम से कम 1.0 लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित करने में सक्षम होंगे।

13. किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड मंच की स्थापनाः

14. राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) विस्तार ऑयल पाम का शुभारंभ (एनएमईओ ओपी) भारत सरकार द्वारा 2021 में एक नई केंद्र प्रायोजित योजना, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (एनएमईओ)-ऑयल पाम (एनएमईओ-ओपी) शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देना है, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर विशेष ध्यान दिया गया है।

15. खाद्य तेलों के लिए राष्ट्रीय मिशन-प्रदान करना;

16. कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ);

17. कृषि उपज लॉजिस्टिक्स में सुधार, किसान रेल की शुरूआत;

18. कृषि और संबद्ध क्षेत्र में स्टार्ट-अप इको सिस्टम का निर्माण;

19. कृषि और संबद्ध कृषि वस्तुओं के निर्यात में उपलब्धि एवं

20. बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) जिसके तहत पैक हाउस, एकीकृत पैक हाउस, कोल्ड स्टोरेज, रीफर ट्रांसपोर्ट, राइपनिंग चैम्बर आदि की स्थापना सहित विभिन्न बागवानी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को खेती के बारे में शिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करती है, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, जागरूकता कार्यक्रम आदि आयोजित करती है। हालांकि कृषि क्षेत्र में आधुनिकीकरण की दिशा में कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, लेकिन इसके रास्ते में कई चुनौतियां भी हैं जैसे कि, पारंपरिक खेती से आधुनिक कृषि पद्धतियों में बदलाव लाना, किसानों को नई तकनीकियों के बारे में जागरूक करना, और कृषि के क्षेत्र में वित्तीय निवेश की कमी। इन चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर कृषि क्षेत्र में निवेश करने के साथ ही, युवाओं को कृषि के क्षेत्र में आकर्षित करने के लिए उन्हें न केवल वित्तीय सहायता दी जाए, बल्कि कृषि में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक उपयुक्त माहौल भी तैयार किया जाए। कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी और भारत सरकार की भूमिका दोनों का अत्यधिक महत्व है।

यदि इन दोनों को सही दिशा में मार्गदर्शन मिले, तो भारत का कृषि क्षेत्र न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो सकता है, बल्कि यह समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान कर सकता है। कृषि आधुनिकीकरण में युवाओं का योगदान एक नई दिशा की ओर इंगित करता है, जहां वे न केवल किसानों की जीवनशैली को बदल सकते हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र को एक मजबूत और भविष्य उन्मुख उद्योग बना सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।