
भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर बनाने में महिलाओं की भूमिका Publish Date : 03/12/2025
भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर बनाने में महिलाओं की भूमिका
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
कृषि मानव अस्तित्व और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो भोजन, फाइबर और अन्य आवश्यक उत्पाद प्रदान करता है। महिलाएं भारतीय कृषि की रीढ़ हैं, जो फसल उत्पादन, पशुधन प्रबंधन, मत्स्य पालन और वानिकी में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। कृषि में अपनी आवश्यक भूमिका के बावजूद महिलाओं को विभिन्न चुनौतियों को सामना करना पड़ता है जो उनकी उत्पादकता और कृषि विकास में पूरी तरह से भाग लेने की क्षमता को सीमित करती हैं। इन चुनौतियों में लिंग आधारित हिंसा, शिक्षा, प्रशिक्षण, भूमि स्वामित्व, वित्त, प्रौद्योगिकी और बाजारों तक सीमित पहुँच आदि शामिल हैं।
छोटे खेतों में काम करने वाली महिलाएं
ऐसी महिलाएं कृषि की रीढ़ हैं। वे दुनिया के भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पैदा करती हैं, खासकर विकासशील देशों में महिलाएं छोटे खेतों में कई तरह के काम करती हैं, जिसमें बीज बोना, निराई करना, कटाई करना और उपज बेचना शामिल है। हालाँकि, उनके पास अक्सर जमीन, पानी और बीज जैसे संसाधनों तक पहुँच नहीं होती है, जिससे उनकी उत्पादकता और आय सीमित हो जाती है।
बड़े खेतों में काम करने वाली महिलाएं
ऐसी महिलाएं वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन सहित कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में काम करती हैं। इन महिलाओं को असमान वेतन, शिक्षा और प्रशिक्षण तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियों का भी समाना करना पड़ता है।
लैंगिक समानता और सशक्तिकरण

सशिक्तकरण में भूमि, जल और बीज जैसे संसाधनों तक महिलाओं की पहुँच बढ़ाना और उन्हें शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है। शिक्षा, भूमि, स्वामित्व, वित्त और प्रौद्योगिकी के माध्यम से कृषि में महिलाओं को सशक्त बनाना उनकी उत्पादन का, आय और निर्णय लेने की शक्ति में सुधार करना, प्रजनन अधिकार, लिंग आधारित हिंसा को कम करना और निर्णय लेने की प्रकिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना भी शामिल है।
नेतृत्व और नवाचार
कृषि में महिलाओं का नेतृत्व लैंगिक असमानता को दूर करने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और उत्पादकता और आय बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, वित्तीय और तकनीकी नवाचार महिलाओं को कृषि में आने वाली बाधाओं, जैसे कि ऋण और बाजारों तक सीमित पहुँच को दूर करने में मदद कर सकते है।
शिक्षा तक पहुँच
कृषि में महिलाओं की उत्पादकता और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में शिक्षा एक महत्वपूर्ण कारक हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाओं को सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक बाधाओं के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच नहीं है। कृषि पद्धतियों, वित्तीय प्रबंधन और उद्यमिता में शिक्षा प्रदान करने से महिलाओं को अपनी उत्पादकता, आय और नेतृत्व कौशल बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भूमि का स्वामित्व
भूमि कृषि उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण संपति है, फिर भी महिलाओं को अक्सर भूमि स्वामित्व और नियंत्रण में महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
वित्त और प्रौद्योगिकी
कृषि क्षेत्र में महिलाओं को अक्सर वित्त और प्रौद्योगिकी तक पहुँच की कमी होती है। महिलाओं को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार वित्तीय सेवाएं प्रदान करना और उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देने से महिलाओं की उत्पादकता बढ़ सकती है।
बाजार
महिलाओं को अक्सर सीमित गतिशीलता जानकारी की कमी और लिंग आधारित भेदभाव के कारण बाजारों तक पहुँचने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। बाजारों और बाजार संबंधी जानकारी तक पहुँच प्रदान करने से महिलाओं को अपनी आय बढ़ाने, जीविका खेती पर निर्भरता कम करने तथा आर्थिक विकास में योगदान करने में सहायता मिल सकती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
