गन्ना : हरित ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत      Publish Date : 25/11/2025

                    गन्ना : हरित ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत

                                                                                                                                                        प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

गन्ना भारत की प्रमुख नकदी और कृषि औद्योगिक फसलों में से एक है। गन्ना चीनी और गुड़ का मुख्य स्रोत है। गन्ने से हमें कई किस्मों के सह-उत्पाद जैसे कि बायो-इथेनॉल, खोई से बिजली और प्रेस-मड से जैविक खाद भी मिलती है। गन्ना उत्पादन में भारत ब्राज़ील के बाद दूसरे स्थान पर है। संभवतः 123.4 लाख किसान अपनी आजीविका के लिए गन्ने पर निर्भर रहते हैं।विश्व में गन्ना उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है। भारत मे यह फसल लगभग 50 लाख हेक्टर मे लगाई जाती है, और विश्व के लगभग 17 प्रतिशत गन्ने का उत्पादन किया जाता है। देश में गन्ने के कुल उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत गन्ना उत्तर प्रदेश से आता है। भारत मे गन्ना मूलतः चीनी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। गन्ने के रस से बायो-इथेनॉल बनाया जा सकता है। इस लेख में हम गन्ने से बायो-इथेनॉल और इसके लाभ के विषय पर चर्चा करेंगे।

गन्ने से बायो-इथेनॉल

                                                          

  • बायो-इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसका इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में ईंधन की तरह कर सकते हैं। अगर गन्ने का उपयोग बायो-इथेनॉल बनाने के लिए किया जाए तो यह हरित ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत बन सकता है।
  • हरित ऊर्जा ऐसा स्रोत है जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी है। बायो-इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने की फसल से उत्पादित होता है, किन्तु शर्करा वाली विभिन्न प्रकार की फसलों से भी इसे तैयार कर सकते हैं।
  • ब्राजील में लगभग 40 प्रतिशत गाड़ियां सौ फीसदी बायो-इथेनॉल पर चल रही हैं और बाकी गाड़ियां 24 प्रतिशत बायो-इथेनॉल मिश्रित ईंधन उपयोग कर रही हैं। स्वीडन और कनाडा में भी बायो-इथेनॉल से गाड़ियां चल रही हैं। कनाडा में बायो-इथेनॉल के इस्तेमाल पर सरकार की तरफ से अनुदान भी दिया जा रहा है।
  • विदेशों से आयातित पेट्रोल पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक बायो-इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार ने वर्ष 2020-21 में पेट्रोल में बायो-इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 8.50 प्रतिशत रखा था।

बायो-इथेनॉल के लाभ

  • बायो-इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग करने से हम वायु प्रदूषण को कम कर सकते हैं क्योंकि बायो-इथेनॉल कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड का कम उत्सर्जन करता है। बायो-इथेनॉल ईंधन के प्रयोग से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में भी कमी आती है।
  • भारत मे बायो-इथेनॉल ऊर्जा का अटूट स्रोत हो सकता है, क्योंकि भारत में गन्ने की फसल काफी मात्रा मे पैदा होती है। बायो-इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का ऊपयोग करने से पर्यावरण के साथ-साथ किसानों के जीवन पर भी बेहतर प्रभाव पड़ेगा।
  • यह किसानों के लिए पारंपरिक खेती की आय के अलावा बायो-इथेनॉल उत्पादन का बड़ा और बेहतर विकल्प है। यह काम किसानों की बचत दोगुनी करने की तरफ एक अच्छा कदम हो सकता है। इससे आने वाले समय में देश के गन्ना किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता खुलेगा और बायो-इथेनॉल उत्पादन एक बड़े रोजगार का साधन भी बनेगा।

गन्ना भारत की एक प्रमुख फसल है। यह किसानों के साथ साथ देश के विकास का भी साधन है। भारत के किसान गन्ने से अधिकतर चीनी और गुड का उत्पादन लेते हैं। अगर हम पेट्रोल में बायो-इथेनॉल का मिश्रण करके उसका उपयोग करें तो यह हमारे लिए सतत विकास का माध्यम बन सकता है। हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने से एक तरफ पर्यावरण प्रदूषण कम होगा तो दूसरी तरफ किसानों की आमदनी में बढ़ोत्तरी होगी। किसानों और वैज्ञानिकों को मिलकर इस दिशा मे काम करना होगा जिससे कि हम पेट्रोल ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता को कम कर सकें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।