
भूमि का वैकल्पिक उपयोग Publish Date : 24/10/2025
भूमि का वैकल्पिक उपयोग
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में केवल खाद्यान्न उत्पादन ही लाभदायक व्यवसाय नहीं हो सकता, क्योंकि यहाँ वर्षा अनिश्चित एवं अनियमित होती है। अनाज, खाद्यान्न, चारे और ईंधन आदि के लिए फसलों के साथ पेड़ उगाकर कृषि को लाभप्रद व्यवसाय बनाया जा सकता है। जैसे फसलों के साथ बेर जैसे फलदार पेड़ लगाये जा सकते हैं। इसी तरह फसलों के साथ पापुलर, कीकर और खेंजड़ी पौधों को उगाना भी फायदेमंद साबित हुआ है।
फसलों को उगाने के साथ-साथ पशुपालन एक बहुत ही अच्छा उद्यम इन क्षेत्रों के लिए हो सकता है जो किसानों के लिए आर्थिक दृष्टि से बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो सकता है। वैकल्पिक भूमि उपयोग प्रणाली से वर्षा जल में सिर्फ एक फसल उगाने वाले क्षेत्रों में खेती के बाद के मौसम में लोगों को मौसमी रोजगार तो मिलता ही है, बल्कि फसलों के बरबाद होने का खतरा भी बहुत कम रहता है। इस प्रणाली से भू-संरक्षण रोकने के एवं परिस्थितिकीय संतुलन बनाये रखने में सहायता मिलती है। बरानी खेती प्रणाली को अधिक सफल बनाने के लिए क्यारियाँ बनाकर खेती, चरागाह प्रबन्धन, पेड़ लगाना और कृषि वानिकी बहुत ही प्रचलित प्रथाऐं हैं।

बरानी खेती वाले क्षेत्रों में स्थिरता लाने के लिए वर्षा के सीमित जल का अधिक से अधिक लाभ उठाना आवश्यक है। इसके लिए जल संरक्षण के उपयुक्त तरीकों को अपनाना तथा भूमि की क्षमता के अनुसार फसलें बोना अति आवश्यक है। इन क्षेत्रों में वर्षा के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों की उत्पादकता का निर्धारण आवश्यक है।
जल संरक्षण के लिए उपयुक्त तरीकों एंव जमीन के जैव उपचार की विधियों से फसल की उपज में अनिश्चितता तथा जमीन में गिरावट को रोका जा सकता है। इससे टिकाऊ उपज सूचकांक की उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है। फसलों के लिए वैकल्पिक सिंचाई के साधन जुटाकर, उचित प्रजातियों को चयन करके मौसमी बदलाव स्थिरांक में वृद्धि की जा सकती है। इससे सूखें दुष्परिणामों एवं पानी की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है, साथ ही साथ अकार्बनिक एवं कार्बनिक पोषक तत्वों के स्रोतों का इस्तेमाल युक्तिसंगत बनाया जा सकता है।
इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि बरानी क्षेत्रों का उचित प्रबन्धन उत्पादकता में वृद्धि एवं स्थायित्व के साथ-साथ कृषि में विविधता को सुनिश्चित कर सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
