
एमएसएमई के लिए सीएसआईआर मेगा इनोवेशन कॉम्प्लेक्स Publish Date : 22/10/2025
एमएसएमई के लिए सीएसआईआर मेगा इनोवेशन कॉम्प्लेक्स
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
देश में एमएसएमई को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के उद्देश्य से जनवरी 2025 में मुंबई में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद द्वारा, सीएसआईआर मेगा इनोवेशन कॉम्प्लेक्स स्थापित किया गया है। नौ मंजिलों में फैलेविशाल अत्याधुनिक भवन में 24 'रेडी-टू-मूव' इनक्यूबेशन प्रयोगशालाए है, साथ ही, नवोन्मेषी स्टार्टअप और एमएसएमई व उद्योग जगत के लिए सुसज्जित कार्यालय और नेटवर्किंग स्थान भी हैं।
यह मेगा सुविधा देश के एमएसएमई सेक्टर को तकनीकी सहायता और उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अवसंरचना, विशेषज्ञता और नियामक सहायता प्रदान करेगी। इस परिसर में एमएसएमई क्षेत्र को नवीन स्टार्टअप्स, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं, भारत और विदेश की डीप-टेक कंपनियों, सार्वजनिक वित्तपोषित अनुसंधान संस्थानों और सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के साथ साझेदारी करने के अवसर मिलेंगे। एमएसएमई के विकास के लिए यहां विशेष रूप से विश्वस्तरीय इनक्यूबेशन प्रयोगशालाएं और व्यवसाय विकास सहायता इकाइयां तैयार की गईं हैं।
इनोवेशन कॉम्प्लेक्स में अत्याधुनिक सुविधाओं को इनक्यूबेशन और व्यावसायिक स्थान प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे एमएसएमई हितधारकों को सीएसआईआर के शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों के नेटवर्क के साथ सहयोग करने में मदद मिलेगी।
तकनीकी नवाचारों को प्रोत्साहित करते 'निधि टेक्नोलॉजी बिज़नेस इनक्यूबेटर' कार्यक्रम
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अम्ब्रेला कार्यक्रम निधि (नवाचारों के विकास और दोहन के लिए राष्ट्रीय पहल) के अंतर्गत 'निधि-टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (NIDHI-TBI)' कार्यक्रम आरंभ किया गया है। यह कार्यक्रम एमएसएमई में तकनीकी नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए एक सशक्त मंच बनकर उभरा है। इसके अंतर्गत उच्च शैक्षणिक, तकनीकी और प्रबंधन संस्थानों के आसपास स्थापित इनक्यूबेटर के माध्यम से नवाचार आधारित नए एमएसएमई को सहायता प्रदान की जाती है।

निधि-टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर उन एमएसएमई व स्टार्टअप्स को एक सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण देता है जो उच्च जोखिम और उच्च संभावनाओं वाले तकनीकी क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। यह कार्यक्रम एमएसएमई को न केवल संरचनात्मक सहायता जैसे कार्यक्षेत्र, प्रयोगशालाएं, 3D डिजाइन रूम्स, हाई-स्पीड इंटरनेट, मेटरशिप आदि प्रदान करता है, बल्कि उन्हें कानूनी, वित्तीय, तकनीकी और बौद्धिक संपदा से संबंधित परामर्श सेवाएं भी देता है। इस कार्यक्रम के जारिए स्टार्टअप्स को नए उत्पादों और शोध कार्यों का तेजी से व्यावसायीकरण करने का अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त, यह पहल देश में रोजगार सृजन, आय अर्जन और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप तकनीकी व्यापार को प्रोत्साहितकरने का कार्य कर रही है।
निधि-टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर के अंतर्गत उद्यम सीधे आवेदन करते हैं और चयन के बाद उनके साथ एक समझौता किया जाता है, जिसमें उनकी इन्क्यूबेशन अवधि और निकासी नीति का विवरण होता है। इच्छुक व्यक्ति या उद्यम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के ई-पीएमएस पोर्टल पर प्रस्ताव भेजकर इनक्यूबेटर स्थापित करने या स्टार्टअप्स इनक्यूबेशन हेतु आवेदन कर सकते हैं।
निधि-टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर कार्यक्रम देश में एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित कर रहा है, जहां विचारों को वास्तविकता में बदला जा रहा है और विज्ञान आधारित नवाचारों के जरिए 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इन सफल उद्यमों की कहानियों में स्वदेशी तकनीकी नवाचार जैसे ऊर्जा दक्ष पंखे, इलेक्ट्रिक बाइक, ड्रोन तकनीक, वर्चुअल रिएलिटी, स्वास्थ्य जांच उपकरण, मेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, स्मार्ट ईवी चार्जिंग, क्लीनटेक और ऊर्जा निगरानी प्रणाली शामिल हैं जो निधि-टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर कार्यक्रम के अंतर्गत संभव हो पाए हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
