
कद्दू की अच्छी फसल लेने के लिए वैज्ञानिक सुझाव Publish Date : 31/10/2026
कद्दू की अच्छी फसल लेने के लिए वैज्ञानिक सुझाव
प्रो0 आर. एस. सेंगर, डॉ0 रेशु चौधरी एवं गरिमा शर्मा
रोग और कीटों के बढ़ते प्रकोप के बीच किसानों को ऐसी फसलों की ज़रूरत है जो कम लागत में बेहतर उत्पादन दे सकें। इस स्थिति को देखते हुए नेपोलियन प्रताप गार्डन यूनिवर्सिटी ने अगले पांच वर्षों के दौरान फसलों की नई प्रजाति विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ऐसे उपकरणों पर काम कर रहे हैं, जिनमें रोग और कीटों से प्राकृतिक रूप से मुकाबला करने की क्षमता रखते हों। इस मामले पर बार-बार कीटनाशकों की ज़रूरत के कम होने और खेती की लागत कम होने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय में नए उद्यम बाजार तक पहुंचने में कई चरण शामिल किए गए हैं।

फसलों की नई प्रजातियों को विकसित करने के बाद सीधे किसानों को बीज उपलब्ध नहीं कराया जाता है। पहले शोध, चयन और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होती है। इसके बाद उनके प्रदर्शन का चित्रण किया गया है। यूनिवर्सिटी के अनुसार किसी नई किस्मों को तैयार करने में कम से कम 3 से 4 साल का समय लग सकता है, इसलिए किसानों को नई किस्मों की तैयारी के लिए अभी कुछ समय का इंतजार करना होगा।
अब लहसुन, बैंगन और कद्दू ग्रेड ग्रेड फसलों की नई किस्मों में विविधता को लेकर शोध शुरू हो गया है। ऐसे में इस वैज्ञानिक समूह का फोकस केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि स्थानीय जलवायु और किसानों के स्तर के बीज विकसित करने भी पर रहेगा। प्रमुख रूप से गर्मी सहन करने वाली किस्मों को तैयार करने पर ही काम किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ऐसे छात्र-छात्रा नई किस्मों को विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं,
अधिक लवणता को सहन करने होंगी सक्षम

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ऐसे किस्मों को विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं जो रोग-किट वैज्ञानिक होने के साथ-साथ गर्मी और लवणता को सहन कर सकते हैं। प्याज, लहसुन, बैंगन और कद्दू ग्रेड ग्रेड पर शोध शुरू हो गया है। अगले पांच पूर्वी राज्यों में नई बांस के बीज उपलब्ध हो गए। -डॉ. यूएई, वीसी, प्रोफेसर प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल।
नई तैयारी में सामान्यतः तीन से चार साल लगे। इसके बाद परीक्षण और किसानों के स्तर पर आकलन चरण पूरे पैमाने पर व्यापक स्तर पर उपलब्ध सुविधा उपलब्ध है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।