
फूलगोभी की खेतीः उन्नत किस्म और इसकी खेती का तरीका Publish Date : 25/10/2026
फूलगोभी की खेतीः उन्नत किस्म और इसकी खेती का तरीका
प्रो0 आर. एस. सेंगर, डॉ0 रेशु चौधरी एवं गरिमा शर्मा
फूलगोभी एक लोकप्रिय सब्जी है। भारत में इसकी कृषि का कुल उत्पादन लगभग 3000 हेक्टेयर है, जिससे लगभग 6,85,000 टन का उत्पादन होता है। उत्तर प्रदेश और अन्य शीतल स्थानों पर इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। वर्तमान में इसकी खेती देश के लगभग सभी स्थानों पर की जाती है। भारत वर्ष की शीतकालीन फूलगोभी की खेती पूरे वर्ष की जाती है और फूलगोभी की खेती एक प्रमुख सब्जी है। इसकी खेती मुख्य रूप से विकसित गठे हुए पुष्प के उत्पादन के लिए की जाती है।
सामान्य रूप से गोभी के फूल माला सफेद रंग की पाई बनाई जाती है, अब इसके कई उन्नत फूलों को पेश किया जा रहा है, रंगीन सब्जियां और बैंगनी रंग की फूल माला का भी उत्पादन किया जा रहा है। फूलगोभी का उपयोग मुख्य रूप से सब्जी के रूप में किया जाता है, इसके अलावा अचार, केक, सूप और पकौड़े भी बनाये जाते हैं। फूलगोभी में प्रोटीन, कैल्शियम, नाइट्रोजन, विटामिन ‘ए’, ’सी’ और निकोटिनिक एसिड जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो मानव शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। फूल के सेवन से पाचन शक्ति मजबूत होती है और कैंसर जैसे रोगों से बचाव के लिए भी इसका सेवन करना चाहिए। किसान भाई अपनी खेती कर अत्याधिक लाभ उठा सकते हैं। इस पोस्ट में आपको फूलगोभी की खेती से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है।
फूलगोभी की उन्नत किस्में
इसका उत्पति स्थान साइप्रस या इटली का सागरीय क्षेत्र माना जाता है। मौसम के आधार पर अगेती, मध्यम और पछेती खेती के लिए वर्तमान समय में फूलगोभी की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं।
अगेती किस्में - अर्ली, कुंरी, पूसा कटिकी, पूसा दीपाली, समर किंग।
पछेती किस्में - पूसा स्नोबाल-1, पूसा स्नोबाल-2, पूसा स्नोबाल-16।
मध्यम किस्में - पंत सुभ्रा, पूसा सुभ्रा, पूसा सिंथैटिक, पूसा अघानी, पूसा स्नोबाल।
खेती के लिए उपयुक्त भूमि
सामान्यतः फूलगोभी की अगेती मिट्टी वाली खेती विभिन्न प्रकार की भूमियों में की जा सकती है, लेकिन फूलगोभी की अगेती मिट्टी वाली भूमि के लिए बलुई दोमट मिट्टी वाली भूमि उपयुक्त होती है। इसकी अतिरिक्त भूमि में भी अच्छी जल निकास वाली मिट्टी होनी चाहिए जिसमें जलभराव की समस्या न हो, तथा उत्तम प्रतिमा वाली मिट्टी हो। जिसका पी.एच मान 5.5 से 6.8 के मध्य होना चाहिए तथा पछेती फूलगोभी की खेती के लिए दोमट या लाल मिट्टी उपयुक्त होती है। फूलगोभी की खेती के लिए अच्छे कार्बन एवं जल निकासी वाली होनी चाहिए। इसकी खेती के लिए भूमि का पी.एच. मान 5.5 से 7 के मध्य होना चाहिए।
फूलगोभी की खेती के लिए उपयुक्त एवं जलवायु
फूलगोभी की सफल खेती के लिए वानस्पातिक वृद्वि और आर्द्र जलवायु सबसे मानी जाती है। अधिक ठंडे और पाला का प्रकोप होने से फूलों को अधिक हानि होती है। फसल की शाकीय वृद्धि के समय तापमान अनुकूल से कम रहने पर फूलों का आकार छोटा हो जाता है। अच्छी फसल के लिए 15 से 20 डिग्री तापमान सबसे अच्छा होता है। अधिक गर्म जलवायु वाली इसकी खेती उपयुक्त नहीं है, क्योंकि अधिक गर्म जलवायु में इसके फूलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
बीज की मात्रा एवं बीज उपचार
फूलगोभी की बुवाई का समय एवं बीज मात्रा उसके पुष्प के आधार पर सुनिश्चित करें। इसकी खेती के लिए के रूप में न रखकर प्रमाणित के रूप में दिया जाता है। क्योंकि फूलगोभी के बीज काफी छोटे होते हैं। इसके लिए एटलस को एबॉलिक में तैयार किया जाता है। एक हेक्टेयर के खेत में अगेती मसाले के लिए 500 से 60 ग्राम बीज, मध्यम मसाले के लिए 350 से 400 ग्राम बीज और पचेती मसाले के लिए 350 से 400 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। फूलगोभी के यंत्रों को एलेग्जिट में उपचार के लिए तैयार करना चाहिए। साथ ही 160 से 175 मिली लीटर को 2.5 लीटर पानी में कुल प्रति पीस वर्ग मीटर के हिसाब से भूमि में भी उपचार करना चाहिए।
फूलगोभी की खेती करने का समय एवं तरीका
फूलगोभी के अगेती फसल के लिए जून माह की शुरुआत में, जो सही समय पर परिपक्व होकर बाजार में अच्छी कीमत भी प्राप्त करता है। इसके अलावा इसकी पिछेती किस्मों को अक्टूबर से मार्च महीने में लगाया जाता है और मध्यकालीन किस्मों के लिए बुवाई का उचित समय जूलाई से अगस्त महीने माना जाता हैं। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि फूलगोभी के बीज का पौधा होता है। इसकी खेती की सब्जी के रूप में की जाती है। खेती के लिए सबसे पहले फूलगोभी के बीजों को तैयार करने के तरीके को पढ़ें। ताकि कुछ समय बाद फूलगोभी की पौध तैयार हो सके। एलेशियन में 1 मीटर चौड़ाई और 3 मीटर लंबी क्यारियां तैयार करें और दो मीटर की नालियां 30 से.मी. की लंबाई में भी तैयार करें। क्यारियों का निर्माण करने से पूर्व कक्षा की मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद या कम्पोस्ट की मिट्टी में भली-भंती मिलाई गई। इन फूलों की माला में फूलगोभी के टुकड़े की मूर्ति तैयार करें, मध्य बनी नाओली में ढोल की तलाश करें ताकि इसके फूलगोभी के टुकड़े भली-भांति से हो सकें। फूलगोभी की इन महिलाओं को तेज धूप और अधिक वर्ष से बचाव के लिए उस पर छपर की व्यवस्था करें। अवशेषों के एक महीने बाद इसके उपचार को खेतों में खराब करने के लिए तैयार किया जाता है।
खेत की तैयार तैयारी
फूलगोभी के खेत (फूलगोभी की खेती) की फसल के अनुसार बताया गया है। अगर आप इसके अगेती पौधों की बीमारी से पीड़ित हैं, तो इसके उपचार के उपाय जून से जुलाई के महीने में करें। इसके अलावा पछेती दोस्तों की आखिरी झलक के महीने में भी ऐसा करें। वही मध्यकालीन किस्मों से संबंधित एक महीने में 45 सेंटीमीटर की दूरी तय करें और 45 सेंटीमीटर की दूरी तय करें। और पचेती मार्जिन के लिए क्वॉर्टर से क्वॉर्टर और उपाय से उपचार की दूरी 60 से 45 सेमी रखनी चाहिए। वहीं मध्यकालीन फिल्मों के लिए 60 सेंटीमीटर से 60 सेंटीमीटर की दूरी पर दूरी तय करनी होती है।
फूलगोभी की खेती में आवश्यक खाद एवं उर्सरक
फूलगोभी के अच्छे निर्माण के लिए भूमि में पर्याप्त मात्रा में खाद की अत्यंत आवश्यकता होती है। फूलगोभी के खेत में अलग-अलग मात्रा में उसके पौधे और भूमि की संरचना की क्षमता का आधार होना चाहिए। फूलगोभी के मुख्य मौसम की फसल को अधिकतम पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसके लिए एक हेक्टेयर के खेत में 40 टन अच्छी तरह से सडे-गल गोबर से बनी खाद और साथ में 50 कि.ग्रा. फासफोरस और 25 कि.ग्रा. पोटाश (110 कि.ग्रा. सुपरफास्फेट और 40 कि.ग्रा. पोटेशियम पोटाश) सारी गोबर की खाद, सुपरफास्फेट और म्यूरेट ऑफ पोटाश और आधा आधा किलो पोटाश से पहले मिला। बाकी बचा हुआ माल्टे के चार सप्ताह बाद डाल देनी चाहिए। अच्छे निर्माण के लिए और अधिक फूलों के लिए 5 से 7 ग्राम खरीदे गए (19ः19ः19) प्रति ली. का प्रयोग करें. बीमारी के 40 दिन बाद 4 से 5 ग्राम 12ः16ः0, डाइजेस्ट और फासफोरस, 2.5 से 3 ग्राम लघु तत्व और 1 ग्राम बोरान प्रति ली. का सुझाव दें। फूलों की अच्छी गुणवत्ता के लिए 8 से 10 ग्राम सुपरमार्केट खादें (13ः00ः45) प्रति ली. पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
फूलगोभी की खेती में खरपतवार प्रबन्धन
फूल के चिप्स को ठीक से विकसित करने के लिए उपयुक्त स्थान की आवश्यकता होती है, इसलिए लाइक और अधिक सीखने की आवश्यकता होती है। इसके लिए खेत में लाइसेंस के तुरंत बाद इसकी पहली चयन करें। मिट्टी एवं समुद्र के आधार पर इसकी स्थापना जारी रखें। गर्मियों के मौसम में एक सप्ताह में एक से दो दिन की तलाश जरूरी होती है, जबकि बारिश के मौसम में एक से दो दिन की तलाश जरूरी होती है। साथ ही समुद्रतट में 12 से 15 दिनों के लिए प्रयोग करें।
किसी भी प्रकार की खेती हो उसे खरपतवार से मुक्त रखा जाना अनिवार्य है। कुछ बीजों की खेती में सब्जियों पर नियंत्रण के लिए अधिक ध्यान नहीं रखा जाता है, लेकिन फूलों की खेती में सब्जियों पर नियंत्रण के लिए अधिक ध्यान नहीं रखा जाता है। इसके खेत में कम या अधिक नाइट्रोजन होने से इसके रोगो की मात्रा का खतरा बढ़ जाता है, जिससे औषधियों में पोषक तत्त्व की मात्रा प्राप्त नहीं हो पाती है, और उनकी वृद्धि भी रुक जाती है। फूलगोभी की फ़सल विधि में स्ट्रॉबेरी के नियंत्रण के लिए प्राकृतिक रूप से समय-समय पर निराई गुड़ाई करते रहें। प्रमाणित गुड़ाई अधिक गहराई से नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इससे कोयले के नष्ट होने का खतरा होता है। 20 से 25 दिन बाद कंपनी की पहली गुड़ाई को पौध के निशान से अलग कर दिया गया। इसके बाद दूसरी गुड़ाई 15 से 25 दिन बाद करें। निराई गुड़ाई करते समय यदि सीमेंट की जड़ पर नजर डाली जाए तो मिट्टी को भी चढ़ा देना चाहिए। इसके बाद प्रमाणित के पूर्ण रूप से विकसित होने तक खेत में यदि पिपरमेंट दिखाई देता है, तो उसका गुडाई कर खरपतवार से पूरी तरह से मुक्त हो जाए। यदि इसकी खेती बड़े पैमाने पर भू-भाग पर की जाती है तो खेत में फलुक्लोरेलिन (बसालिन)/800 मि.ली. को 150 ली. पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
फूलगोभी में कीट एवं रोगों की रोकथाम
चमकीली पृथी वाला पतंगाः इस कीट के नियंत्रण के लिए शुरुआत में नीम के मोती का आर्क 40 ग्राम को प्रति किलो पानी में कुल फूल के शुरुआती स्तर में झटका दें। इसका इलावा बी टी नासा 200 ग्राम के छिलके के बाद 35 से 50 दिन के अंदर प्रति सेकंड में प्राप्त करें। यदि प्रकोप अधिक हो तो साइनोनोसिड 2.5 प्रतिशत एस सी 80 मि.ली. प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
सरसों की आरा मक्खीः इस कीट के नियंत्रण के लिएमेलाथियान 50 ई.सी. का प्रयोग 1.5 मि.ली. प्रति लीटर की दर से पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
रस चुसने वाले कीटः रस चूसने वाले कीट जैसे सस्ते और तेले का प्रकोप दिखाई देता है, तो इमीडाक्लोप्रिड 17.8 एस एल 60 मि.ली. 150 लीटर पानी में छिड़काव करें।
सुंडीः यदि एक बूटे पर दो धूप की मात्रा लें तो बी टी 10 ग्राम को प्रति 10 लीटर पानी में कुल मिलाकर शाम के समय का छिड़काव करें और बाद में नीम अर्क 40 ग्राम को प्रति लीटर पानी में कुल मिलाकर नुकसान पहुंचाएं। यदि इस किट का आक्रमण अधिक हो तो थायोडीकार्ब 75 डबल्यू पी 40 ग्राम को प्रति 15 ली. पानी में छिड़काव करें।
फूलगोभी में रोगों की रोकथाम
प्रभावित और झुलसा रोगः इस बीमारी के होने पर इसकी रोकथाम के लिए 20 मि.ली. स्टिकर के साथ मैनकोजेब या कॉपर आयोडीनक्लोराइड 300 ग्राम को 150 किलोलीटर पानी में छिड़काव करें।
सूखाः इस रोग का प्रतिबंधन करने के लिए ट्राईकोडर्मा बायो फंगस 2.5 किलो प्रति 500 लीटर पानी में पुराने उपचारों के तीसरे भाग के निकट। साथ ही रिडोमिल्ड गोल्ड 2.5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में अतिरिक्त छिड़कें और आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। बहुत भारी मात्रा में पानी का भराव न होने दें।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।