
पालक की खेती आधुनिक तरीके से करें Publish Date : 23/10/2026
पालक की खेती आधुनिक तरीके से करें
प्रो0 आर. एस. सेंगर, डॉ0 शालिनी गुप्ता एवं गरिमा शर्मा
हमारे देश में पालक की खेती का हरी सब्जी फसलों की खेती में एक विशेष स्थान है। देश के लगभग सभी भागों में रबी, खरीफ एवं जायद तीनों मौसम में इसकी खेती की जाती है। यह एक ऐसी सब्जी है जिसकी खेती लगभग पूरी दुनिया में की जाती है। यह आयरन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट का एक उच्च स्रोत है जिसके हमें कई स्वस्थ लाभ प्राप्त होते हैं। पालक, हमारी रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। भारत में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और गुजरात पालक के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
बुवाई का समय

पालक को पूरे भारत वर्ष में बोया जाता है। सर्दियों के मौसम में बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय सितंबर से अक्टूबर तक होता है। वसंत के मौसम के लिए बुवाई फरवरी के मध्य से अप्रैल तक की जाती है। हल्के जलवायु वाले मैदानी इलाकों में यह पूरे साल बढ़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्र में मार्च से मई तक बोया जाता है।
उचित दूरी
- बुवाई के लिए, पंक्ति से पंक्ति 20 से.मी. की दूरी और पौधे से पौधे की दूरी 5 से.मी. रखें।
बीज की उचित गहराई
- बीज को 3-4 से.मी की गहराई पर पालक की बुवाई करें।
बुवाई का तरीका
- बुवाई पंक्ति या छिड़काव विधि द्वारा की जा सकती है।
बीज की मात्रा
- एक हेक्टेयर में 25 से 30 कि.ग्रा. बीज पर्याप्त होता है। जबकि छिडकाव विधि 40 से 45 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
बीज उपचार
अंकुरन की प्रतिशतता बढ़ाने के लिए पालक की बुवाई करने से पहले इसके बीजों को 12-24 घंटे तक पानी में भिगो दें। बुवाई से पहले बीज को बाविस्टिन या कैप्टान 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज दर से उपचारित करें, लाभ प्राप्त होगा।
खाद एवं रासायनिक उर्वरक
अच्छी उपज के लिए खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद 100 क्विंटल और नाइट्रोजन 35 किग्रा, फॉस्फोरस 12 किग्रा प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए। बुवाई से पहले नाइट्रोजन की आधी मात्रा के साथ अच्छी तरह से विघटित काऊडूंग और फास्फोरस की पूरी मात्रा को लागू करें। प्रत्येक कटाई के बाद नाइट्रोजन की शेष मात्रा को दो समान छींटों में लगाएँ। उर्वरक का प्रयोग करने के बाद खेत की हल्की सिंचाई करें।
खरपतवार नियंत्रण
पालक में खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 25-30 बाद निराई गुड़ाई करे। बाकि निराई गुड़ाई खरपतवार की स्थिति के अनुसार ही करनी चाहिए।
पालक में सिंचाई
उचित बीज अंकुरण और अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। बुवाई के समय यदि मिट्टी में उचित नमी न हो तो बुवाई पूर्व सिंचाई करनी चाहिए।
बुवाई के बाद पहली सिंचाई देनी चाहिए। गर्मी के महीने में, सिंचाई 4-6 दिनों के अंतराल पर करें, जहां सर्दियों के महीने में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। ज्यादा सिंचाई से भी बचना चाहिए क्योंकि पत्तियों पर पानी नहीं लगना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारी की स्थिति और गुणवत्ता बिगड़ सकती है। पालक की खेती के लिए ड्रिप सिंचाई फायदेमंद साबित होती है।
फसल की अवधि

- पालक की फसल लगभग 43-45 दिन में पककर तैयार हो जाती है।
कटाई का समय
रोपण के 6-8 सप्ताह बाद फसल की कटाई शुरू करें। सबसे पहले पालक की बाहरी पत्तियों को काटें, जो कि 3-4 इंच लंबी होती हैं। यह पौधे पर अधिक विकास को प्रोत्साहित करेगा और अंत में फसल के लिए अधिक पर्णसमूह पैदा करेगा। केवल अच्छी तरह से विकसित रसीला और कोमल पत्तियों को छंटनी की जानी चाहिए। इसके बाद की कटाई 20-25 दिनों के अंतराल पर की जानी चाहिए।
पालक की उपज
- पालक की 80 -100 क्विंटल प्रति/हेक्टेयर तक उपज प्राप्त हो जाती है।
कटाई एवं तुड़ाई
पत्तों के आस-पास की गंदगी को साफ करने के लिए इसे गुनगुने (हल्के गर्म) पानी में रखें और पत्तियों को अपने हाथ से घुमाकर सुनिश्चित करें कि कोई गंदगी पीछे न रह जाए। इस प्रक्रिया को तब तक गर्म करें जब तक कि पत्तियों से गंदगी बाहर न निकल जाए। सूखना- एयर ड्राइड या पैट पत्तियां एक कपड़े या कागज तौलिया के साथ सूख जाती हैं।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।