
बैंगन की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन Publish Date : 12/10/2026
बैंगन की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
बैंगन के फसल में कई प्रकार के कीट और रोग लग सकते हैं। ऐसे में उनका समय पर नियंत्रण जरूरी है ताकि फसल स्वस्थ बनी रहे।
बैंगन में लगने वाले रोगः
छोटी पत्ती रोग और कर्लिंग वायरसः आजकल यह वायरस बैंगन के फ़सल में तेजी से फैल रहा है। यह बैंगन के फल को छोटा और मोटा कर देता है।
नियंत्रणः सफेद मक्खी (वायरस का वाहक) का प्रभावी नियंत्रण करें। इसके लिए सिंजेंटा एक्टारा, बायर कॉन्फिडोर सुपर, या यू.पी.एल. का प्रयोग करें।
पाउडरी फफूंदी और झुलसा रोगः इससे प्रभावित बैंगन के फल की त्वचा पर सफेद दाग या सूखापन दिखता है।
नियंत्रणः ड्यूपॉन्ट कोसाइड, रोको, कॉपर आयोडीनक्लोराइड, या कवच फंगिसाइड का मिश्रण कर छिड़काव करना चाहिए।
विल्ट (सुखने की बीमारी): इस रोग से प्रभावित बैंगन के फल सूखकर मुरझा जाते हैं।
नियंत्रणः ट्राइकोलोडर्मा और फ़ार्म का गुड़ मिलाकर खेत में डालना चाहिए। वेलिडामाइसिन (500 मि.ली.) और कॉपर आयोडीनक्लोराइड (500 ग्राम) ड्रिप सीवन के साथ देने पर अधिक समस्या हो रही है।
बैंगन के कॉमन कीटः

माइट्स (मकड़ी): रेड और येलो माइट्स बैंगन की फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
नियंत्रणः इस कीट से मुक्ति हेतु ओबेरोन, ओमनाइट (बायर), या एसिन (क्रिस्टल) का उपयोग करना चाहिए। हालांकि, इसके लिए एसिन सबसे प्रभावशाली दवाई है।
फल छेदक और तना छेदकः यह कीट बैंगन के फल और तने में छेद कर उसका स चूसते हैं।
कीट का नियंत्रणः इस कीट के नियंत्रण करने के लिए बायर बायगो (10 मिली) या प्रोक्लेम (8 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी) का उपयोग करें। इसके लिए बायर फेंस क्विक (10-15 मिली) और फ्यूरान ग्लाइकोराइड (25 ग्राम) का भी उपयोग किया जा सकता है।
सफेद मक्खी, फिड्स, और थ्रिप्सः यह पौधों का रस चूसने वाले कीट हैं।
नियंत्रणः इन कीटों का नियंत्रण करने के लिए सिंजेंटा एक्टारा, बायर कॉन्फिडोर सुपर, रोगर (डाइमेथोएट 30% ईसी), प्रोफेक्स सुपर, या यूपीएल लांसर गोल्ड का प्रयोग किया जा सकता है।
टिप्सः
- फंगिसाइड को बार-बार स्केल्ड सोइक रोग में प्रयोग न करें।
- स्प्रेज़ शेड्यूल नियमित रखें, विशेष रूप से फूल और फल आने के समय।
बैंगन की खेती के लिए पोषण एवं पोषण प्रबंधन

बैंगन की फसल को स्वस्थ और अधिक उत्पाद देने के लिए समय पर खाद देना जरूरी है। समय पर बैंगन की मात्रा में नव्यकोष जैविक खाद डाला जाता है।
टिप्सः
- फूल और फल की अवस्था में पोटाश, फास्फोरस, और कैल्शियम की कमी नहीं होनी चाहिए।
- अगर पुराने समय को देखा जाए तो, बैंगन की फसल में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का ध्यान रखना चाहिए।
बैंगन की खेती खरपतवार पर नियंत्रण
खरपतवार बैंगन की फसल की वृद्धि को रोक सकते है, इसलिए इन पर नियंत्रण करना बहुत आवश्यक है।
रोकथाम की मैनुअल विधिः खरपतवार के नियंत्रण करने के लिए निराई-गुड़ाई सबसे अच्छी विधि मानी जाती है और इसके साथ ही इससे मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।
दोबारा उपयोग करें: निराई-गुड़ाई का उपयोग कम करना चाहिए, क्योंकि यह मिट्टी लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती है। सबसे अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए बायोलॉजिकल इलेक्ट्रोलाइट्स का प्रयोग किया जा सकता है।
उपयोग के टिप्सः
- पहली निराई बैंगन की बुवाई करने के 20-25 दिन बाद करें।
बैंगन की खेती में सिंचाई और जल प्रबंधन
बैंगन के फल में सही मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार से अधिक या कम पानी बैंगन की फसल के लिए दोनों ही नुकसानदायक हो सकते हैं।
- जल निकास की अच्छी व्यवस्था व्यवस्था का होना बहुत आवश्यक है।
गर्मियों में: नियमित सिंचाई करते रहना चाहिए, विशेष रूप से फूल और फल आने का समय।
ड्रिप सिंचाईः यदि संभव हो तो ड्रिप सिंचाई का यथासम्भव उपयोग करें। यह पानी प्रमाणित और अधिकृत मात्रा में पानी प्रदान करता है।
बैंगन की फसल की कटाई का समय
बैंगन की कटाई का उचित समयः बैंगन की फसल 55 दिन बाद से कटने के लिए तैयार हो जाती है। इस समय बैंगन का फल मोटा और अच्छे भाव बिकता हैं, जिससे किसान की आमदनी होती है।
किसानों के लिए अतिरिक्त सुझाव
बाज़ार की समझः अपने क्षेत्र में बैंगन की मांग और कीमत का अध्ययन करें। सफेद या काले बैंगन की मांग के अअनुसार किस्मों का चयन करें।
कृषि विशेषज्ञ से सलाहः स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या विशेषज्ञ से संपर्क करें।
जैविक खेतीः यदि संभव हो तो जैविक खाद्य और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें। यह मिट्टी की उर्वरता बनी हुई है।
नई तकनीक: ड्रिप सींच, शेड नेट, और हाइब्रिड मैट्रिक्स का उपयोग करें।
- बैंगन की खेती के लिए भारतीय किसानों के लिए एक और आसान विकल्प है।
- सही समय, सही किसान, वैज्ञानिक कृषक से खेती करने पर अच्छी आमदनी हो सकती है।
ऊपर हमने बैंगन की खेती के सभी पहलुओं को शामिल किया है, जैसे सही समय, मिट्टी की तैयारी, असामीअला, कीट-नियंत्रण, और खाद प्रबंधन। अगर आप इन स्टेज का पालन करते हैं, तो आप 6-7 महीने तक अच्छा निर्माण कर सकते हैं।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।