परवल की खेतीः अधिक उपज और बेहतर लाभ      Publish Date : 18/08/2026

परवल की खेतीः अधिक उपज और बेहतर लाभ

                                                                    प्रो0 आर. एस. सेंगर, डॉ0 रेशु चौधरी एवं गरिमा शर्मा

वर्तमान समय में यदि देखा जाए तो सम्पूर्ण भारत में किसानों के लिए सब्जी की खेती करना आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी है। लाभदायक सब्जी की फसलों में, परवल का अपना एक विशेष स्थान है, क्योंकि परवल की मांग बाजारों में पूरे साल बनी रहती रहती है और इस कारण से परवल की खेती से अच्छी कमाई की संभावना रहती है। यही कारण है कि अब उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल सहित और देश के विभिन्न अन्य भागों में भी परवल की खेती तेजी के साथ लोकप्रिय होती जा रही है।

परवल न केवल अपने स्वाद के लिए बल्कि अपने पौष्टिक गुणों के लिए भी अच्छी तरह जाना जाता है। परवल में भरपूर मात्रा में विटामिन, कार्बाेहाइड्रेट और प्रोटीन उपलब्ध पाए जाते हैं। इसके फलों का उपयोग सब्जी, अचार और मिठाई आदि के बनाने में व्यापक रूप से किया जाता है। हल्का और आसानी से पचने योग्य होने के कारण, परवल अक्सर बीमारी से उबर रहे लोगों को खाने की सलाह डॉक्टरों के द्वारा दी जाती है।

आर्थिक दृष्टि से, परवल अन्य कई सब्जी फसलों की तुलना में बेहतर लाभ प्रदान करने वाली फसल है। चूँकि कटाई के बाद परवल के फल लंबे समय तक ताजे रहते हैं, जिससे दूर के बाजारों तक परिवहन करना आसान हो जाता है। परिवहन के दौरान फलों की गुणवत्ता बरकरार रहने के कारण, किसानों को अक्सर बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त हो जाते हैं।

परवल की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

परवल को विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, लेकिन अच्छी उचित जल निकासी वाली दोमट और बलुई दोमट मिट्टी परवल की उच्च पैदावार के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। कार्बनिक पदार्थों से भरपूर और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी जड़ों के स्वस्थ विकास और पौधे की वृद्धि में सहायक होती है।

खेत का चयन करते समय यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि खेत में पानी का जमाव न होने पाए। लगातार जलभराव से परवल की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और रोग लगने का खतरा बढ़ सकता है। परवल की सफल खेती के लिए आमतौर पर थोड़ी ऊँची ज़मीन बेहतर रहती है।

खेत की तैयारी

अच्छी फसल की शुरुआत खेत की उचित तैयारी के साथ ही होती है। गर्मियों में, एक बार गहरी जुताई करें और खेत को कुछ दिनों के लिए धूप में खुला छोड़ दें। इससे मिट्टी में पनपने वाले कीटों और खरपतवारों के बीजों को नष्ट करने में मदद मिलती है।

बुवाई से लगभग एक महीने पहले, अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट को मिट्टी में मिला देना चाहिए। मिट्टी की उर्वरता और जड़ों के विकास को बेहतर बनाने के लिए प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल जैविक खाद के साथ 4 किलो माइकोपेप (माइकोराइजा जीआर) का प्रयोग करें। इसके बाद, मिट्टी को बारीक और भुरभुरा बनाने के लिए 3 से 4 बार खेत का जुताई और करें।

बुवाई करने की विधि

1. बीजों के माध्यम से

इस विधि में, पके फलों से बीज निकाले जाते हैं और नर्सरी में बोए जाते हैं। अंकुरण के बाद में पौधों को खेत में रोपा दिया जाता है। हालांकि, इस विधि से अक्सर नर पौधों का अनुपात अधिक हो जाता है, जिससे फल उत्पादन कम हो सकता है। इसलिए, परवल की व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों के द्वारा इस विधि को कम पसंद किया जाता है।

2. जड़युक्त कलमों के माध्यम से

जड़युक्त तने के हिस्सों को सीधे खेत में ही रोप दिया जाता है। पौधे जल्दी उग आती हैं और पौधे जल्दी ही फल देना भी शुरू कर देते हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर खेती के लिए पर्याप्त मात्रा में जड़युक्त कलमों की व्यवस्था करना एक कठिन कार्य साबित हो सकता है।

3. लच्छी विधि द्वारा (बेल की शाखाओं से)

परवल की खेती करने वाले किसानों के बीच यह सबसे लोकप्रिय और व्यावसायिक रूप से अपनाई जाने वाली विधि है। इस विधि में एक साल पुरानी स्वस्थ बेलों को 120 से 150 सेंटीमीटर लंबाई के टुकड़ों में काटकर बेल की कलम तैयार की जाती है। इन कलमों को मोड़कर खेत में लगा दिया जाता है। यह विधि पौधों की बेहतर स्थापना, भरपूर वृद्धि और उच्च उत्पादकता सुनिश्चित करती है। इस विधि में प्रति एकड़ लगभग 1,000 से 1,200 स्वस्थ बेल की कटिंग की आवश्यकता होती है।

पौधे लगाने का उचित समय

फसल की उचित समय पर बुवाई करने से अच्छी वृद्धि और अधिक पैदावार प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। देश के मैदानी क्षेत्रों में, परवल का रोपण आमतौर पर जुलाई से अक्टूबर के बीच किया जाता है। नदी तल और बाढ़ के मैदानों के लिए, परवल के रोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय सितंबर से अक्टूबर के बीच का समय माना जाता है। बेलों को बढ़ने के लिए पर्याप्त स्थान के लिए उचित दूरी भी बनाए रखन बहुत आवश्यक होता है।

अनुशंसित अंतरालः

  • पंक्ति से पंक्ति की दूरीः 2.5 मीटर।

  • पौधों के बीच की दूरीः 1.5 मीटर।

पर्याप्त दूरी रखने से सूर्य की रोशनी का प्रवेश, वायु संचार और फसल का समग्र स्वास्थ्य बेहतर होता है।

पोषक तत्व प्रबंधन

परवल एक लंबी अवधि की फसल है, इसलिए इसे पूरे विकास काल में संतुलित पोषण की आवश्यकता होती है। रोपण के समय, प्रत्येक गड्ढे के आसपास कम्पोस्ट, खली और पोषक तत्वों से भरपूर फैबियाना (बायो-एनपीके लिक्विड) डाला जा सकता है। फसल की वृद्धि के दौरान नाइट्रोजन उर्वरक को विभाजित मात्रा में देना चाहिए ताकि नई वानस्पतिक वृद्धि को बढ़ावा मिले और फल उत्पादन में सुधार हो सके। साथ ही सर्वाेत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए, उर्वरक का प्रयोग मृदा परीक्षण की अनुशंसाओं के आधार पर किया जाना चाहिए।

खरपतवार प्रबंधन और फसल देखभाल

फसलों की स्वस्थ वृद्धि के लिए नियमित रूप से खरपतवार नियंत्रण और अंतर-फसल संचालन करना अत्याधिक आवश्यक हैं। फल लगने से पहले कम से कम 4 से 5 बार निराई-गुड़ाई अवश्य कर देनी चाहिए। इससे खरपतवारों की प्रतिस्पर्धा कम होती है और फसल को पोषक तत्व बेहतर ढंग से मिलते हैं। बेलों को नियमित रूप से सहारा और देखभाल भी करनी चाहिए। उचित प्रबंधन से अनावश्यक जड़ों का विकास रुकता है और पौधे अपनी अधिक ऊर्जा फल उत्पादन में लगा पाते हैं।

मचान प्रणाली का महत्व

परवल की सफल खेती में अच्छी तरह से निर्मित जालीदार संरचना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बेलों को जाली पर चढ़ाने से सूर्य की रोशनी और हवा का संचार बेहतर होता है, जिससे बीमारियों का प्रकोप कम होता है और फलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। बेलों की तेज़ी से वृद्धि शुरू होने से पहले, आमतौर पर फरवरी के आसपास, मजबूत बांस की संरचनाएं या अन्य उपयुक्त सहायक प्रणालियां स्थापित कर देनी चाहिए।

बेल के माध्यम उगाए गए पौधों से प्राप्त फल अधिक साफ, आकर्षक, बेहतर गुणवत्ता वाले और बाजार उच्च कीमत पर बिकने वाले होते हैं। बेलों की व्यवस्था से कटाई, छिड़काव और फसल प्रबंधन भी आसान हो जाता है।

सिंचाई प्रबंधन

परवल के पौधे को बढ़ने की पूरी अवधि के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है। ग्रीष्म ऋतु में आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिए। बरसात के मौसम में जल निकासी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जलभराव से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और रोग पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

परवल के प्रमुख कीट-पतंग और उनका प्रबंधन

लाल कद्दू भृंग

क्षतिः यह कीट नई पत्तियों को खाकर उनमें छेद कर देता है। गंभीर संक्रमण से पौधे की वृद्धि और मजबूती कम हो सकती है।

प्रबंधनः स्पिनोवोल्ट (स्पिनोसैड 45 प्रतिशत एससी) 55-65 मिलीलीटर प्रति एकड़ का छिड़काव करने से कीट से छुटकारा मिलता है ।

एफिड्स

क्षतिः ये छोटे कीड़े पत्तियों और कोमल टहनियों से रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, मुड़ जाती हैं और उनका विकास रुक जाता है।

प्रबंधनः 40 मिली प्रति एकड़ की दर से ICHCHA (फिप्रोनिल 40 प्रतिशत + इमिडाक्लोप्रिड 40% WG) का छिड़काव करने से लभ प्राप्त होता है।

परवल के प्रमुख रोग और उनका प्रबंधन

पाउडर रूपी फफूंद

लक्षणः पत्तियों, तनों और पौधे के अन्य हरे भागों पर सफेद पाउडर जैसी वृद्धि दिखाई देती है और संक्रमण के गंभीर होने से पत्तियां सूखने लगती हैं।

प्रबंधनः 70 ग्राम प्रति एकड़ की दर से स्ट्रोबिट (टेबुकोनाजोल 50 प्रतिशत + ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन 25 प्रतिशत WG) का छिड़काव करना चाहिए।

डाउनी मिल्ड्यू

लक्षणः पत्ती की ऊपरी सतह पर पीले धब्बे विकसित हो जाते हैं, जबकि निचली सतह पर भूरे रंग की फफूंद की वृद्धि दिखाई देती है।

प्रबंधनः 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से टोसेम 70 (थियोफेनेट मिथाइल 70 प्रतिशत WP) का छिड़काव करना उचित रहता है।

फल सड़न

लक्षणः फलों पर गहरे, पानी से भीगे हुए घाव विकसित हो जाते हैं, जो धीरे-धीरे फैलते हैं और सड़न का कारण बनते हैं।

प्रबंधनः क्लॉन (कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत + मैनकोजेब 63% WP) 700 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव करने से लाभ होगा।

फसल की कटाई

फल लगना आमतौर पर मार्च से शुरू हो जाता है। फल लगने के लगभग 10 से 12 दिन बाद फल तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। मार्च और अप्रैल के महीनों में, आमतौर पर सप्ताह में एक बार फलों की कटाई पर्याप्त होती है। मई में, फलों के तेजी से विकास के कारण सप्ताह में दो बार कटाई की आवश्यकता हो सकती है। फलों को हमेशा हरा और मुलायम होने पर ही तोड़ना चाहिए। सुबह के समय कटाई करने से उनकी ताजगी अधिक समय तक बनी रहती है।

अपेक्षित उपज

उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से किसान पहले वर्ष में प्रति एकड़ लगभग 30 से 36 क्विंटल उपज प्राप्त कर सकते हैं। दूसरे वर्ष से उपज 70 से 80 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है और उचित प्रबंधन के तहत अगले तीन से चार वर्षों तक यह सिलसिला जारी रह सकता है। परवल की लंबी उत्पादक जीवन अवधि ही एक प्रमुख कारण है कि इसे एक अत्यधिक लाभदायक सब्जी फसल माना जाता है।

निष्कर्ष

परवल एक लाभदायक व्यावसायिक सब्जी की फसल है जो किसानों को कई वर्षों तक निरंतर उत्पादन और नियमित आय प्रदान करने में सक्षम है। उपयुक्त भूमि का चयन करके, स्वस्थ रोपण सामग्री का उपयोग करके, संतुलित पोषण प्रदान करके, मजबूत जाली प्रणाली का निर्माण करके और उचित फसल प्रबंधन पद्धतियों को अपनाकर किसान उत्कृष्ट पैदावार और बेहतर लाभप्रदता प्राप्त कर सकते हैं।

बाजार में इसकी बढ़ती मांग, अच्छी शेल्फ लाइफ और परिवहन में आसानी के कारण परवल व्यावसायिक सब्जी की खेती के लिए एक आकर्षक विकल्प है। वैज्ञानिक विधियों से उगाए जाने पर, परवल किसानों की आय और कृषि लाभप्रदता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।