जुकिनी: किसान के लिए एक लाभकारी खेती      Publish Date : 18/07/2026

 जुकिनी: किसान के लिए एक लाभकारी खेती

                                                                          प्रो0 आर. एस. सेंगर, डॉ0 रेशु चौधरी एवं गरिमा शर्मा 

सब्जियों की खेती में जुकिनी की खेती एक कद्दू वर्गीय सब्जी की फसल है स्थानीय भाषा और आम बालचाल में इसे चप्पन कद्दू के नाम से भी जाना जाता है। जुकिनी विदेशो में उगाई जाने वाली एक फसल है, हालांकि भारत में भी अब किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। जुकिनी का उपयोग सब्जी और सलाद के रूप में खाने के किया जाता  है। इस सब्जी में पोटेशियम और विटामिन ए, और सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते है, इसके चलते बजारों में इसकी डिमांड हमेशा ही बनी रहती है। ऐसे में किसानों के लिए इसकी खेती फायदे का सौदा साबित हो सकती है। जुगनी एक लतावर्गीय पौधा होता है, जिनकी लम्बाई करीब 3 फीट तक की होती है और जुकिनी के एक पौधें पर केवल 7 से 8 तक फल आते हैं। वर्तमान समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए यह एक पसंदीदा सब्जी बन चुकी है।

                                    

खुले खेतों में जुकिनी की बुवाई करने का सबसे उचित समय नवंबर से दिसंबर तक का होता है। वहीं पॉलीहाउस में इस फसल को साल में तीन बार उगाया जा सकता है, जिसमे जनवरी से अप्रैल माह तक इसकी पहली फसल लगा देनी चाहिए। अप्रैल से अगस्त का महीना दूसरी फसल के लिए उपयुक्त माना जाता है और तीसरी फसल सितंबर से दिसंबर के महीने तक इसकी खेती की जा सकती है। अभी खरीफ का सीजन चालू है ऐसे में किसान इसकी सही तरीके से खेती कर अच्छा मुनाफा और उत्पादन दोनों कमा सकते हैं। हमारे कृषि विशेषज्ञ आजकी इस पोस्ट के माध्यम से जानकारी प्रदान कर रहे हैं कि जुकिनी की खेती के लिए उचित समय, जलवायु और उपयुक्त भूमि आदि कैसे उपयुक्त होते हैं।

जुकिनी की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी 

जुकिनी की फसल में उचित जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा भूमि में कार्बनिक पदार्थों की उचित मात्रा उपलब्ध होनी चाहिए। जुकिनी की खेती अम्लीय या क्षारीय भूमि में नहीं करनी चाहिए।

जुकिनी की उन्नत किस्में

आस्ट्रेलियन ग्रीन:

इस क़िस्म का पौधा झाड़ीनुमा होता है, जिसमे पीले रंग के फूल निकलते है, तथा फल लम्बे आकार और गहरे हरे रंग के होते है। इसके फल बीज रोपाई के 60 से 65 दिन पश्चात् तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते है, जिसका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 200 क्विंटल तक मिल जाता है।

पूसा अलंकार:

                                    

यह जुकिनी की एक संकर किस्म है, जिसमे सामान्य ऊंचाई वाले पौधे निकलते है। इस किस्म के पौधों पर आने वाले फल चमकीली धारिया लिए हुए हल्के हरे रंग के होते है। यह किस्म प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 200 से 250 क्विंटल का उत्पादन दे देती है तथा इसके फल आकार में भी लम्बे होते है।

खेत की तैयारी:

जुकिनी की फसल उगाने के लिए भूमि की अच्छी तयारी होनी बहुत ज़रूरी है। खेत में अच्छी मात्रा में गोबर खाद डाल कर खेत में हल्का पानी छोड़ देना चाहिए। खेत में योथ आने पर खेत की गहरी जुताई कर देनी चाहिए।

रोपाई की विधि:

जुकिनी फसल की रोपाई बीज के माध्यम से की जाती है। इन बीजो को बुवाई से पूर्व कार्बेन्डाजिम, ट्राइकोडरमा विराइड या थीरम की उचित मात्रा से उपचारित कर लेना उचित रहता है। एक हेक्टेयर के खेत में बुवाई करने के लिए लगभग 5 से 7 किग्रा. बीज पर्याप्त होता है। इन बीजो को खेत में बनाई गई मेड़ पर लगाना होता है। पंक्तियों में तैयार मेड़ पर बीजो को लगाने के लिए ड्रिल विधि का उपयोग किया जाता है। इन मेड़ो के मध्य डेढ़ फ़ीट की दूरी रखी जाती है, तथा बीजो के मध्य एक फ़ीट की दूरी रखी जानी चाहिए। भूमि में बीजो को दो से तीन सेंटीमीटर की गहराई में लगाना होता है, ताकि अंकुरण ठीक तरह से हो सके।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।