
विदेशी सब्जियों की खेती करने का उन्नत तरीका Publish Date : 15/06/2026
विदेशी सब्जियों की खेती करने का उन्नत तरीका
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
भारत में विविध प्रकार की जलवायु की उपलब्धता के कारण देश के विभिन्न भागों में किसानों ने विदेशी सब्जियों की खेती प्रारम्भ करना प्रारम्भ कर दिया है। इन सब्जियों में मुख्य रूप से लैटयूस, सेलरी, लीक, जुकीनी, चीनी गोभी आदि की खेती की जाती हैं। विदेशी सब्जियों की सफल खेती के लिए उचित उर्वरक एवं जल प्रबंधन, फसल सुरक्षा एवं देखभाल के साथ-साथ फसल कटाई करने में भी सावधानी बरतनी अति आवश्यक है।
विदेशी सब्जियों की करने के सम्बन्ध में कुछ विदेशी सब्जियों की खेती करने का विवरण इस प्रकार से है-
लैटयूस (Lettuce)
लैट्यूस सर्दियों के मौसम की एक महत्वपूर्ण एवं लोकप्रिय सलाद वाली सब्जी है। इसमें विटामिन A एवं खनिज तत्व जैसे कैल्शियम व लौह आदि भी भरपूर मात्रा में उपलब्ध होते हैं। यह ठंडे जलवायु में उगाए जाने वाली एक सब्जी फसल है, जिसकी खेती रबी मौसम में की जाती है। लैट्यूस की खेती विभिन्न प्रकार की मृदा में की जा सकती है परंतु अच्छे जल निकास और उच्च कार्बनिक पदार्थ युक्त उपजाऊ रेतीली-दोमट मृदा जिसका पी. एच. मान 5.5 से 7.0 के मध्य हो, इसकी खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इसके बीज छोटे होने के कारण इन्हें मिट्टी या गोबर की खाद के साथ मिलाकर क्यारियों में बोया जाता है। इसकी जड़ें ज्यादा गहरी नहीं जाती अतः इसे खाद की मात्रा अधिक चाहिए होती है। सब्जी की इस फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए 3-4 गुड़ाई करना ही पर्याप्त रहता है। अतः समय समय पर निराई गुड़ाई तथा सिंचाई कर पर्याप्त नमी बनाये रखना चाहिए।
एस्पेरेगस (Asparagus)

यह एक बहुवर्षीय सब्जी है, जिसकी खेती नये उगे हुए कोमल तनों जिन्हें ‘स्पीयर’ कहा जाता है, के लिए की जाती है। एस्पेरेगस की सब्जी विटामिन A का अच्छा स्रोत होता है। इसके स्पीयर का उपयोग सलाद एवं सूप के रूप में किया जाता है। इसकी खेती से उपज बुवाई के 3 साल से मिलनी प्रारम्भ हो जाती है, जिसे अगले 12 वर्षों तक लगातार लिया जा सकता है। इसकी खेती 15-20 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर सफलतापूर्वक की जा सकती है। अधिक तापमान इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होता है। इसकी खेती के लिए उचित जलनिकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी जिसका पी. एच. मान 6-6.7 के बीच हो, उपयुक्त रहती है। इसकी बिजाई बीज द्वारा एवं रोपण क्राउन द्वारा किया जाता है और इसकी औसतन उपज 15-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक आसानी से प्राप्त हो जाती है।
जुकिनी (Zucchini)
जुकिनी एक खीरा वर्गीय विदेशी सब्जी है। इसकी फसल 70-80 दिनों में तैयार हो जाती है। यह दिखने में ककड़ी के आकार की गहरे हरे, हल्के हरे, भूरे और पीले रंग की होती है। इसका झाड़ीनुमा पौधा आमतौर पर 75-90 से.मी. ऊंचा होता है तथा पत्तों में लगभग 45-60 से.मी. का घेराव होता है। जुकिनी के फूल इसके तने पर लगते हैं, जिससे इन इसके फलों की कटाई आसान हो जाती है। इसके फल की लंबाई लगभग 14-16 से.मी. के बीच एवं वजन 180-200 ग्राम तक होता है। जुकिनी की फसल गर्म एवं समशीतोष्ण जलवायु में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है। फलों की बेहतर पैदावार के लिए जुकिनी को चौकोर क्यारियों में लगाया जाता है।
जुकिनी की फसल में ड्रिप द्वारा सिंचाई एवं घुलनशील उर्वरक प्रदान करना लाभदायक पाया गया है। जुकिनी की अधिकतर किस्में बुवाई के 40 से 50 दिन बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती हैं। बरसात के मौसम में जुकिनी की उपज प्रति एकड़ 8-10 मीट्रिक टन मिलती है। अन्य मौसमों में यह पैदावार 6-8 मीट्रिक टन तक मिल सकती है। 500 वर्ग मीटर आकार के ग्रीन हाउस से जुकिनी की उपज औसतन 2 मीट्रिक टन तक मिल जाती है।
चाइनीज कैबेज (Chinese Cabbage)

चाइनीज कैबेज आमतौर पर पत्तागोभी की तरह उगाई जाने वाली सब्जी है। यह सब्जी कैंसर एवं अन्य वायरल बिमारियों के प्रति अवरोधी है जिसे चलते इसकी मांग विदेशों में लगातार बढ़ती जा रही है। भारत में यह सब्जी पांच सितारा होटलों में सलाद बनाने के लिए मुख्य रूप से उपयोग की जाती है। इसका गट्टा ऊँचा एवं लम्बा होता है एवं पत्तियां लम्बी, गहरे हरे या बैंगनी रंग की अर्ध-वृत्ताकार आकार की होती है। इसकी खेती के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है। चाइनीज कैबेज की अच्छी गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए बड़ी क्यारियों में रोपण करना आवश्यक होता है। रोपण के 30 दिनों के बाद अतिरिक्त मिट्टी का आधार देना चाहिए जिससे पौधे गिरे न पाए एवं उनकी वृद्धि भी अच्छी हो सके। चाइनीज कैबेज आमतौर पर 65-70 दिनों में कटाई को तैयार हो जाती है। इसकी प्रति हेक्टेयर औसत पैदावार 25-30 मीट्रिक टन तक मिल जाती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
