
होम गार्डन में जैविक टिंडे का उत्पादन Publish Date : 23/04/2026
होम गार्डन में जैविक टिंडे का उत्पादन
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
आप अपने घर की छत पर गमले में या अपने किचन गार्डन में पोषण से भरपूर जैविक टिंडा और पोषकता से भरपूर उगाएं टिंडा की सब्जी का करें सेवन-
हरी सब्जियां हमारी सेहत के लिए अति लाभकारी मानी जाती हैं, इन हरी सब्जियों में पोषक तत्वों से भरपूर टिंडा एक विशेष स्थान रखता है। टिंडा जो कि एंटी-ऑक्सिडेंट, फाइबर, विटामिन-सी और पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों से भरूपर पोषण का एक अच्छा स्रोत है। इस प्रकार से आप भी अपने घर पर टिंडा को अपनी छत और बालकनी के गमलों में आसानी से लगा सकते हैं।

इसके साथ ही आपके घरेलू बगीचे में भी इसे आसानी से उगाया जा सकता है। फरवरी के महीने से लेकर जून महीने के बीच टिंडा उगाया जा सकता है। टिंडा की फसल गर्म और हल्की आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह से पलती और बढ़ती है।
मिट्टी की तैयारीः टिंडा उगाने के लिए बलुई दोमट मिट्टी को सबसे अधिक उपयुक्त माना जाता है। गमले में 50% मिट्टी, 40% क़म्पोस्ट खाद और 10% रेत मिलाकर अच्छी जल निकासी वाले गमलों में मिट्टी तैयार कर टिंडे के बीज बोये जा सकते हैं।
- 1-2 इंच गहराई में बोएं टिंड़ा के बीज।
- टिडा की जड़े गहरी होती है, जिसके लिए 12×12 या 15×15 इंच का गमला लें, उसमें 3-4 बीज 1-2 इंच गहराई में लगाने के बाद इसकी हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए।
- इस प्रकार से टिंडे के बीज 7-15 दिनों में अंकुरित होने लगते हैं और करीब 40-45 दिनों में उनके ऊपर फूल आने लगते हैं। इसकी नियमित सिंचाई करते रहें, लेकिन इस बात का भी विशेष रूप से ध्यान रखें कि गमले या घर की वाटिका में जलभराव न होने पाए।
- प्रति 15-20 दिनों में वर्मी कम्पोस्ट या गोबर खाद का प्रयोग नियमित रूप से करते रहे। चूंकि टिंडे का पौधा एक बेलदार पौधा होता है, इसलिए इसकी बेल को सहारा देने के लिए रस्सी या जाल उपयोग आवश्यक रूप से करना चाहिए।
फल मक्खी से बचाव
कीट नियंत्रण के लिए नीम तेल का छिड़काव करें, जिससे फल मक्खी और सफेद मक्खी जैसे कीटों से फसल का बचाव होता है। टिंडा के पौधे की सही तरीके से देखभाल करते रहें। टिंडा के पौधों पर लगभग दो महीने में फल आने लगते हैं, और तीन महीने तक लगातार टिंडे का उत्पादन मिलता रहता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
