
आलू की फसल का झुलसा रोग से बचाव Publish Date : 22/01/2026
आलू की फसल का झुलसा रोग से बचाव
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर डॉ0 रेशु चौधरी एवं गरिमा शर्मा
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वर्तमान में आलू की फसल पर लग रहा है झुलसा रोग अतः किसान भाई उचित प्रबंधन कर पाले और झुलसा रोग से बचाए अपनी फसल-
आलू की फसल में झुलसा रोग एक प्रमुख रोग है, जो प्रायः फसल की वृद्धि अवस्था में दिखाई देता है। इसके लक्षणों में पत्तियों पर भूरे या काले रंग के अनियमित धब्बे बनना तथा पत्तियों का सूखकर झुलस जाना शामिल है। रोग के बढ़ने पर तना और कंद भी प्रभावित हो जाते हैं, जिससे उपज और गुणवत्ता में भारी कमी आती है। यह रोग अधिक नमी और अनुकूल तापमान की स्थिति में तेजी से फैलता है।

रोग के नियंत्रण हेतु रोग-प्रतिरोधी किस्मों का प्रयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा खेत में उचित जल निकास की उचित व्यवस्था को होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, मैंकोजेब या मेटालेक्सिल युक्त फफूंदनाशकों का समय पर छिड़काव रोग नियंत्रण में काफी प्रभावी होता है।
आलू की फसल में झुलसा रोग एक गंभीर फफूंदजनित रोग है, जो फसल की वृद्धि और उपज को भारी नुकसान पहुँचाता है। इस रोग के प्रमुख लक्षण पत्तियों पर भूरे या काले रंग के गोल अथवा अनियमित धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे पूरे पत्ते को झुलसा देते हैं। रोग की तीव्र अवस्था में पत्तियाँ सूखकर गिरने लगती हैं तथा तना और कंद भी प्रभावित हो जाते हैं। अधिक आर्द्रता, लगातार वर्षा और मध्यम तापमान इस रोग के प्रसार के लिए अनुकूल होते हैं। झुलसा रोग के कारण कंदों का आकार छोटा रह जाता है और भंडारण क्षमता भी कम हो जाती है।
रोग का नियंत्रण करने के लिए रोग-प्रतिरोधी किस्मों का चयन, संतुलित उर्वरक प्रयोग, उचित फसल चक्र अपनाना तथा खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था आवश्यक कृषि क्रियाएं है। इसके साथ ही मैंकोजेब, क्लोरोथैलोनिल या मेटालेक्सिल युक्त फफूंदनाशकों का समय पर छिड़काव करने से रोग को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

इन दिनों अत्यधिक सर्दी पड़ने के कारण आलू की फसल बुरी तरह प्रभावित हो रही है क्योंकि अधिक सर्दी से आलू की फसल पर पाला पड़ रहा है जिससे आलू के पत्ते पीले पड़कर मुरझा रहे हैं। ऐसा इसलिए होता है कि जब वातावरण का तापमान अधिक गिर जाता है तो पौधों की कोशिका के अंदर मौजूद पानी जम जाता है और कोशिका में पानी जमने के कारण उसका आयतन बढ़ता है।
कोशिका का आयतन बढ़ने से कोशिका की कोशिका भित्ति फट जाती है और पौधों की पत्तियों की धीरे-धीरे मृत्यु हो जाती है। इसके लिए पाला सर्दियों में आलू की फसल को काफी प्रभावित करता है। इसलिए किसानों को चाहिए कि जिस दिन अधिक सर्दी पड़ रही हो तो आलू की फसल में हल्की सिंचाई करके रखें, जिससे कि कोशिका में मौजूद जल जमने न पाए। इस प्रकार से काफी हद तक आलू की फसल को पाले से बचाया जा सकता है।
आलू की फसल धूप न निकल पाने के कारण उसका बुरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि प्रकाश की अनुपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया पौधों में सही तरीके से नहीं हो पाती है, जिससे उचित मात्रा में भोजन न बन पाने के कारण पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और आलू का तना जिसको आलू कहा जाता है उसकी बड़वार भी ठीक से नहीं हो पाती और वह कमजोर रह जाता है। इससे आलू की फसल का उत्पादन काफी प्रभावित होता है इसलिए अच्छी धूप भी आलू की फसल के लिए काफी लाभकारी होती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
