
मटर की खेती: बुबाई से लेकर कटाई तक Publish Date : 11/01/2026
मटर की खेती: बुबाई से लेकर कटाई तक
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
मटर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और लाभकारी फसल है जो भारत में बहुलता से उगाई जाती है। यह प्रोटीन से भरपूर फसल होती है और किसानों के लिए कम समय में ज्यादा मुनाफे का एक अच्छा स्रोत है। मटर की खेती को सही तरीके से किया जाए तो बहुत अच्छा उत्पादन मिलता है।
मटर के लिए उपयुक्त मिट्टी:
मटर की खेती के लिए मध्यम दोमट से चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। मटर की खेती के लिए उदासीन मिट्टी में सबसे अच्छा अंकुरण होता है। मिट्टी का पी एच स्तर 6-7 के बीच होना चाहिए।
मटर के लिए खेत की तैयारी:
मटर की खेती से पहले भूमि को अच्छी तरह से तैयार करना बहुत जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले खेत में गहरी जुताई करें, फिर उसे समतल करें और मिट्टी को नरम बनाने के लिए हल्की सिंचाई करें। मिट्टी में नमी बनी रहे तो बीजों के अंकुरण में मदद मिलती है।
मटर की बुवाई का समय:
1) बुवाई का समय
मटर की बुवाई का सही समय अक्टूबर से नवंबर के बीच होता है। यह मौसम मटर के अच्छे विकास के लिए उपयुक्त होता है।
2) पौधों के बीच दूरी
मटर के पौधों के बीच उचित दूरी 15-20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए और पंक्तियों के बीच 30-40 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए।
3) बुवाई की गहराई
बीज को लगभग 3-4 सेंटीमीटर की गहराई में बोना चाहिए।
4) बुवाई का तरीका
मटर की बुवाई नमी वाली मिट्टी में बीजों को सीधा छिटकवाँ विधि या फिर सीड ड्रिल के माध्यम से की जाती है।
मटर की खेती के लिए बीज चयन और उपचार
1) बीज दर
प्रति एकड़ मटर के लिए 20-25 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
2) बीज उपचार करने की विधि
बीजों को बोने से पहले मिट्टी के फफूंद को खत्म करने के लिए फफूंदीनाशक से उपचारित करें, ताकि बीजों के अंकुरण में कोई समस्या न हो।
मटर की खेती के लिए उर्वरक
मटर की फसल के लिए 20-25 किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फास्फोरस, और 10-12 किलो पोटाश का उपयोग करें। मटर के लिए जैविक उर्वरक भी उपयुक्त होते हैं, जो पौधों की वृद्धि को उत्तेजित करते हैं।
मटर की खेती में खरपतवार नियंत्रण
मटर की फसल में खरपतवारों को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है। खरपतवारों को समय पर हटाने से मटर के पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और उपज में वृद्धि होती है।
मटर की खेती में सिंचाई:
मटर की फसल को नियमित रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन अत्यधिक पानी से बचना चाहिए। एक महीने बाद हल्की सिंचाई की जाए तो अच्छा रहता है।
मटर की फसल के कीट/रोग एवं नियंत्रण
1) कीट और उनका नियंत्रण
मटर के पौधों में सामान्यत: सफेद मक्खी, मच्छर, और अन्य कीट लग सकते हैं। इनकी रोकथाम के लिए समय-समय पर जैविक कीटनाशक या रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव करें।
2) रोग और उनका नियंत्रण
मटर की फसल में छाछया रोग, मृदुरोमिल असिता और अन्य रोग हो सकते हैं। इनसे बचने के लिए फफूंदीनाशक का प्रयोग करें और पौधों की नियमित देखभाल करें।
मटर की तुड़ाई/कटाई का सही समय
मटर की फलियाँ जब हरी और दाने भर जाये तब तुड़ाई कर लेना चाहिए।
मटर का उत्पादन
मटर की खेती में उपज प्रति एकड़ 8-10 क्विंटल तक हो सकती है, जो भूमि की गुणवत्ता और देखभाल पर निर्भर करती है।
फसल मंत्र

बीज उपचार कर बोएं अगेती मटर
- इस मौसम में किसान अगेती मटर की बुआई कर सकते हैं। उन्नत किस्में, जैसे पूसा प्रगति का प्रयोग करें। बीजों को केप्टान या धायरन से 2 ग्राम प्रति किग्रा बौज दर से उपचारित करें।
- सरसों की अगेती खेती पूसा सरसों 25, पूसा सरसी-26. पूरुत्र सरसी-28, पूसा तारक जैसी फिल्मों के बीज की व्यवस्था करें।
- इस मौसम में किसान गाजर की बुआई मेहो पर कर सकते हैं। उन्नत किस्में- पूसा रुधिरा। बीज दर 40 कि.ग्रा. प्रति एकड़।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
