टमाटर की खेती की वैज्ञानिक विधि      Publish Date : 10/12/2025

                     टमाटर की खेती की वैज्ञानिक विधि

                                                                                                                                                               प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा

टमाटर की वैज्ञानिक विधि से खेती करने के लिए, सबसे पहले सही मिट्टी और जलवायु चुनाव करें:

टमाटर की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसका (pH) मान (6.0) से (7.0) के बीच हो और तापमान (20-250C) हो। खेत की अच्छी जुताई करें और उसे समतल बना लें। फिर, नर्सरी तैयार करने के लिए प्लास्टिक ट्रे विधि का उपयोग करें, जिसमें कोकोपिट, वर्मी कंपोस्ट और फंगीसाइड का मिश्रण हो। रोपण के लिए, बैड बनाकर पौधे लगाएं, ड्रिप सिंचाई का उपयोग करें और पौधों को सहारा देने के लिए मजबूत बांस से बंधाई करें। बीमारियों की रोकथाम के लिए, रोग प्रतिरोधी किस्में चुनें और कीटनाशकों व फफूंदनाशकों का छिड़काव करें।

ग्राफ्टेड टमाटरः

ग्राफ्टेड टमाटर टमाटर का एक ऐसा पौधा होता है, जिसके अन्दर दो पौधों के गुण होते हैं। रूटस्टॉक पौधों को सुदृढ़ जड़ें और बेहतर रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है, जबकि साइयन अधिक उपज और बेहतर फल गुणवत्ता प्रदान करता है।

ग्रॉफ्टिंग की प्रक्रियाः

सबसे पहले रूटस्टॉक एवं साइयन की नर्सरी को तैयार करना चाहिए।

जब चयन किए गए दोनों पौधे 20 से 25 दिन के हो जाएं, तो स्लैंट कट या क्लिप ग्रॉटिंग तकनीक की सहायता से इन्हें एक साथ जोड़ देना चाहिए।

दोनों पौधों को एक साथ जोड़ने के बाद 7 से 10 दिनों तक इन्हें हीलिंग चैम्बर में रखना चाहिए, जिसका तापमान 25 डिग्री और नमी का स्तर लगभग 70 प्रतिशत तक हो।

खेत की तैयारी और पौध रोपाई

  • खेत की अच्छे तरीके जुताई कर क्यारियाँ बनाकर उनमें ड्रिप सिंचाई सिस्टम स्थापित करना चाहिए।
  • मूल खेत में रोपाई करने के लिए 25 से 30 दिन के स्वस्थ ग्रॉफ्टिड पौधों का चयन करना उचित रहता है।
  • नमी के बेहतर स्तर को मेंटेन करने के लिए सिल्वर-ब्लेक मल्च शीट का उपयोग करना चाहिए।

सिंचाई एवं खाद प्रबन्धनः

  • ड्रिप सिंचाई सिस्टम की सहायता से नियमित रूप से हल्की सिंचाई करने से लाभ प्राप्त होता है।
  • इस दौरान पौधों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश आदि पोषक तत्वों को उचित मात्रा में देना उचित है।
  • फूल और फल आने के समय बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम आदि का छिड़काव करना चाहिए।

फूल और फलों का विकासः

                                                       

  • पौधों के फल को गिरने से बचाने के लिए 2 प्रतिशत डीएपी अथवा 40 पीपीएम एनएए का स्प्रे करने से लाभ प्राप्त होता है।
  • जब टमाटर के फल हल्के गुलाबी रंग के हो जाएं तो इस समय फलों की तुड़ाई कर लेनी चाहिए, जिससे कि वह बाजार तक पहुँचने तक लाल एवं आकर्षक दिखने लगें।

रोग एवं कीट नियंत्रणः

  • ग्रॉफ्टेड टमाटर सामान्यतः फ्यूजेरियम विल्ट, बैक्टीरियल विल्ट और रूट नॉड नीमाटोड आदि के जैसे रोगों से काफी हद तक सुरक्षित रहता है।
  • फलों की अच्छी सेहत के लिए प्रत्येक 15 दिन के बाद फसल पर नीम के तेल का छिड़काव करने के साथ ही मृदा में ट्रइकोडर्मा हारजेनियम मिलाना चाहिए।

उत्पादन और लाभः   

  • ग्रॉफ्टेड टमाटर से सामान्यतः सामान्य टमाटर की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन मिल जाता है।
  • एक हेक्टेयर क्षेत्र में 70 से 90 टन तक की उपज एवं इससे 3 से 5 लाख रूपये तक का शुद्व लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।