मूली की खेती करने की वैज्ञानिक विधि      Publish Date : 05/12/2025

                   मूली की खेती करने की वैज्ञानिक विधि

                                                                                                                                                       प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

1. उपयुक्त जलवायु (Climate):

  • मूली ठंडे मौसम की फसल है।
  • आदर्श तापमान: 15–25°C।
  • अधिक तापमान में जड़ें कड़ी, फटने वाली और तीखी हो जाती हैं।

2. भूमि चयन (Soil Selection):

  • हल्की दोमट या रेतीली दोमट भूमि सर्वोत्तम।
  • pH 6.0–7.5 उपयुक्त।
  • भूमि अधिक कड़ी न हो—वरना जड़ें मुड़ जाती हैं।

3. खेत की तैयारी (Field Preparation):

  • खेत को 2 बार गहरी जुताई करें।
  • अच्छी तरह भुरभुरी मिट्टी बनाएं।
  • अंतिम जुताई में गोबर की सड़ी खाद 20–25 टन/हेक्टेयर डालें।
  • 30–40 सेमी की दूरी पर क्यारियाँ तैयार करें।

4. बीज और बुवाई (Seed & Sowing):

मूली की प्रमुख किस्में:

                                                                  

  • पूसा चेतकी।
  • पूसा देसी।
  • जापानी वाइट।
  • कश्मीर लांग।
  • कोमल (दक्षिण भारत)।

बीज की मात्रा:

  • 10–12 kg प्रति हेक्टेयर

बुवाई का समय:

  • उत्तर भारत: सितंबर–नवंबर।

गर्मियों की फसल (पहाड़ी/ठंडे क्षेत्र): फरवरी–मार्च।

बुवाई विधि:

  • लाइन टू लाइन दूरी: 30–45 cm।
  • पौधे से पौधे की दूरी: 5–8 cm।
  • बीज 1–1.5 cm की गहराई पर बोएँ।

5. उर्वरक प्रबंधन (प्रति हेक्टेयर):

  • गोबर खाद: 20–25 टन।
  • NPK: 60:40:40।
  • नाइट्रोजन का आधा भाग बुवाई के साथ।
  • नाइट्रोजन का शेष आधा भाग बुवाई के 25–30 दिन बाद।

सूक्ष्म पोषक:

  • बोरॉन की कमी होने पर जड़ें फटने लगती हैं—
  • बोरैक्स 10–12 kg/ha।

6. सिंचाई प्रबंधन (Irrigation):

  • पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद।
  • बाद में 7–10 दिन के अंतर पर।
  • पानी भराव न होने दें, वरना जड़ें सड़ जाती हैं।
  • सिंचाई कटाई से 4–5 दिन पहले बंद करें।

7. निराई-गुड़ाई (Weed Control):

  • पहली निराई बुवाई के 20–25 दिन बाद।
  • आवश्यकता अनुसार 1–2 निराई और करें।
  • खेत में नमी बनाए रखें।

8. कीट व रोग नियंत्रण (Pest & Diseases):

मूली के मुख्य कीट:

1.  एफिड / माहू

नियंत्रण: नीम तेल 5 ml/L या इमिडाक्लोप्रिड 0.3 ml/L।

2.  लीफ माइनर

नियंत्रण: स्पिनोसेड 0.3 ml/L छिड़काव।

मूली के मुख्य रोग:

1. पत्तों में झुलसा

  • मैन्कोजेब 2–2.5 g/L।

2. जड़ फटना (बोरॉन की कमी):

  • बोरैक्स 10–12 kg/ha मिट्टी में

3. डैम्पिंग ऑफ (नर्सरी):

  • कैप्टान या कार्बेन्डाजिम 2 g/L।

9. कटाई (Harvesting):

  • किस्म के अनुसार 35–55 दिन में तैयार।
  • अधिक देर से निकालने पर जड़ें कड़ी और तीखी हो जाती हैं।
  • सुबह या शाम को खींचकर निकालें।

10. उत्पादन (Yield):

  • अच्छी वैज्ञानिक खेती से 250–350 क्विंटल/हेक्टेयर उत्पादन संभव।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।