
अच्छे लाभ के लिए किसान नवम्बर दिसम्बर के माह में करें इन सब्जियों की बुवाई Publish Date : 10/11/2025
अच्छे लाभ के लिए किसान नवम्बर दिसम्बर के माह में करें इन सब्जियों की बुवाई
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
नवम्बर के माह में करें बन्द गोभी की रोपाई, जबकि दिसम्बर में मेथी, पालक और धनिया आदि की सीधी बुवाई कर सकते हैं-
प्रदेश में बन्द गोभी, मेथी, धनिया और पालक आदि की फसलें एक बड़े क्षेत्र में उगाई जाती है। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह फसलें सेहत की दृष्टि से भी बहुत उपयोगी मानी जाती हैं और इस कारण से इस समय इनकी मांग अपने उच्चतम स्तर पर रहती है। हालांकि, इन सब्जियों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए वैाानिक पद्वतियाँ अपनाकर खेती करना बहुत आवश्यक है।
उद्यान विभाग के सब्जी सलाहकार बताते हैं कि बन्द गोभी की रोपाई नवम्बर के माह तक अवश्य कर देनी चाहिए, जबकि मेथी, पालक एवं धनिया आदि की सीधी बुवाई दिसम्बर के महीने तक की जा सकती है। इनकी खेती के दौरान किसान को कुछ आवश्यक सावधानियों का बरतना भी जरूरी होता है।
इन सब्जी फसलों की रोपाई अथवा बीजाई करने के तुरंत बाद ही सिंचाई कर देना आवश्यक है, इसके बाद की तमाम सिंचाई मौसम और फसल की आवश्यकता के अनुसार करते रहना चाहिए। यदि मौसम साफ रहता है तो लगभग हर 8 से 10 के अंतराल पर सिंचाई करनी जरूरी है।
अच्छे उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों का चयन करें:-
बन्द गोभी की उन्नत किस्में:- प्राइड ऑफ इण्डिया, गोल्डन एकड, ड्रम हेड लेट, और चार्ली नामक संकर प्रजाति शामिल है।
मेथी कि अच्छी किस्में:- पूसा अर्ली बंचिंग, हिसार सोनाली, हिसार बौर कसूरी मेथी आदि किस्में अच्छा उत्पादन प्रदान करती हैं।
पालक की उन्नतशील प्रजातियाँ:- जोवनेर ग्रीन, ऑल गीन और हिसार सिलेक्शन नंबर-2 आदि पालक की उन्नतशील किस्में हैं।
धनिया की प्रमुख प्रजातियाँ:- धनिया की उन्नत प्रजातियों में नारनौल सिलेक्शन, पंत हरीतमरा, हिसा आनंद, हिसर सुगंध, हिसार सुरभी और हिसार भूमित (डीएच-228) आदि शामिल हैं।
भूमि की तैयारी:

यह सब्जियाँ सभी प्रकार की भूमियों में अच्छे से उगाई जा सकती हैं। खेत की अच्छे तरीके से जुताई करने से जड़ों का विकास बेहतर तरीके से होता है। इसलिए सबसे पहले खेत की जुताई अच्छी तरह से जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी कर लेना चाहिए, ऐसा करने से पौधों की जड़ों का विकास शीघ्रता से होता है। इन सभी सब्जियों की खेती करने के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है।
खेत में 10 से 20 टन गोबर की खाद का प्रयोग करें
थ्कसानों को खेत में 10 से 20 टन तक अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए। बन्द गोभी में प्रति एकड़ की दर से 50 कि.ग्रा. नाइट्रजन, 20 कि.ग्रा. पोटाश और मेथी में 10 कि.ग्रा. नाइट्रोजन और 20 कि.ग्रा. फॉस्फोरस का प्रयोग करना उचित होता है। पालक के लिए 32 कि.ग्रा. नाइट्रोजन एवं 16 कि.ग्रा. फॉस्फोरस, धनिया के लिए 25 कि.ग्रा. 25 कि.ग्रा. नाइट्रोजन और 20 कि.ग्रा. पोटाश का प्रयोग करना उचित है। फॉस्फोरस, पोटाश की पूरी मात्रा एवं नाइट्रोजन की आधी मात्रा को खेत की अंतिम जुताई के समय ही खेत की मिट्टी में मिला देना चाहिए और नाट्रोजन की शेष आधी मात्रा को बुवाई करने के 4 से 5 सप्ताह के बाद खेत में डालना उचित रहता है।
बिजाई एवं रोपाई करने का उचित समयः बन्द गोभी की पौध अगस्त से नवत्बर माह तक तैयार की जाती है और पौध लगाने के 35 से 40 दिन बाद इनकी रोपाई मुख्य खेत में की जा सकती है। सीधी बिजाई करने के लिए एक एक बीज करके नवत्बर के माह में बुवाई करना उचित रहता है। इसी प्रकार मेथी, पालक एवं धनिया बुवाई केवल सीधी बुवाई विधि से करना उचित है और यह दिसम्बर माह के अन्त तक की जा सकती है।
बीज की मात्राः बन्द गोभी सामान्य किस्मों के लिए 200 से 250 ग्राम एंव संकर प्रजातियों के लिए 80 से 100 ग्राम बीज प्रति एकड़ की दर से करना उचित है। देसी मेथी 8 से 10 कि.ग्रा., कस्तूरी मेथी के लिए 4 से 5 कि.ग्रा. बीज प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करना उचित है। पालक के लिए उचित बीज दर 8 से 10 कि.ग्रा. और करे धनिया के उत्पादन के लिए 4 से 6 कि.ग्रा. बीज प्रति एकड़ की दर से पर्याप्त रहता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
