
ईश्वर की महिमा Publish Date : 06/11/2026
ईश्वर की महिमा
प्रो0 आर. एस. सेंगर
कहते हैं कि जिसे ईश्वर बचाना चाहते हैं, उसे कोई मार नहीं सकता और जिसको वह मारना चाहते हैं, उसे कोई बचा नहीं सकता। रावण, कंस, हिरण्यकश्यप सदृश अनेक बलशाली नृप जिनका कोई बाल-बांका तक नहीं कर सकता था, उन्हें भी ईश्वर ने मिटाना चाहा तो पलक झपकते ही धूल-धूसरित कर दिया। उनकी सारी शक्तियां, वैभव, सामर्थ्य व पराक्रम धरा का धरा रह गया। जिसे बचाना चाहा उसे प्रचंड अग्नि से बचाकर दिखा दिया। मर्यादा के चीरहरण में आदर्श, सत्य व ईमान का डंका बजाकर दिखा दिया। जीव सुख, आनंद व जीवन की चाह में संसार के क्षणिक व नश्वर वैभवों को पाने के लिए भटकता रहता है। दुखमय संसार में सुखानुभूति मरुस्थल में जलराशि की कल्पना जैसी है। वर्तमान के कर्मों की नदी अतीत के पुल से पार होकर भविष्य के भयावह समुद्र में जाकर मिलती है।
कर्म का लेखा-जोखा पल-पल चुकता करना होता है। यदि जीवन को मरना ही है तो सारी संपत्ति नष्ट कर सबको कष्ट देकर अस्पताल दर अस्पताल का प्रभार चुकता कर क्यों मरना होता है? सबको जीवनदान देने वाला डॉक्टर भी एक दिन स्वयं रोगग्रस्त होकर अपने ही क्लीनिक में असहाय व असमर्थ होकर पड़ा रहता है।

मरने वाले को चिकित्सक भी नहीं बचा सकते। जिस चिकित्सक का, जिस दुकानदार या चाय वाले का जितना-जितना कर्ज चुकाना है उसे तो क्षण-क्षण चुकाना ही है। मृत्यु तो अंतिम सत्य है आएगी ही, लेकिन अपना सारा हिसाब-किताब चुकता करने के बाद ही वह आती है। जीवनदाता चिकित्सक भी किसी रोगी को ईश्वर से प्रदत्त जीवन से अधिक जीवन देने की सामर्थ्य जुटा सकता है क्या कभी? किंचित नहीं। यदि जुटाता होता तो कभी व कहीं कोई मरता ही नहीं। यह असमर्थ जीवों का संसार है जो समर्थ, सक्षम व सर्वशक्तिमान ईश्वर के निर्देश व अनुकंपा पर ही संचालित होता है। आखिर जब मृत्यु किसी में भेद नहीं करती और जब सभी उसके समक्ष नतमस्तक हैं तो इसे ही जीवन का मूल मंत्र मान लेना चाहिए। ऐसे में जब यह निश्चित है कि मृत्यु अवश्यंभावी है और कोई भी बड़े से बड़ा बलशाली भी उसे टाल नहीं सकता तो हमें उसके भय को त्याग देना चाहिए। मृत्यु से डरने के बजाय हमें ईश्वर का भजन करना चाहिए जो हमें मुक्ति दिला सकते हैं।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।