मनुष्य को विवेकशील बना होगा      Publish Date : 02/11/2026

           मनुष्य को विवेकशील बना होगा

                                                                                                                   प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

संचार माध्यमों की प्रगति में विचारों का प्रवाह बहुत तीव्र हो गया है। यह तीव्रता जितनी लाभदायक है उससे कहीं अधिक हानिकारक भी। जहां आवश्यक और उपयोगी जानकारियां कुछ क्षणों में ही सामान्य मनुष्य तक पहुंच जाती हैं वहीं किसी सत्य का विकृत रूप अथवा पूरी तरह असत्य और षड्यंत्र पोषित जानकारियां भी इस गति से पहुंच रही है।

मानव मस्तिष्क पर इन जानकारी का बराबर असर होता है मन में उत्तेजना क्रोध लोभ अवसाद यह सब जानकारी के कारण ही आता है। Ott platform के माध्यम से संस्कृति को विकृत करने का प्रयास तो हम सब ने अनुभव किया ही है। पूरी तरह से झूठी खबरें प्रसारित कर समाज को उद्वेलित करना और उसे हिंसा की तरफ धकेल देने के प्रयास भी हाल के समय में बहुत तीव्र हुए हैं इसी कारण से सभी प्रमुख समाचार माध्यमों को फैक्ट चेक जैसी व्यवस्थाएं लागू करनी पड़ी हैं।

                                  

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने जैसे-जैसे अपना स्थान बनाया वैसे-वैसे इन कार्यों में भी अनेक आयाम जुड़ गए। इन संचार माध्यमों पर अंकुश तो होना ही चाहिए लेकिन वह कितना कारगर होगा यह समय बताएगा, हो सकता है भविष्य में उनके स्वरूप और बदल जाएं। अंततोगत्वा यह सब मनुष्य को प्रभावित करने के लिए ही तो हो रहे हैं यदि मनुष्य ही ऐसा बन जाए जो सही और गलत का विवेक कर सके तो निश्चय ही यह सब दुष्ट प्रयास असफल होंगे।

भारत के इतिहास और भारत की चेतना में ऐसा मनुष्य निर्माण करने की क्षमता है जो जीवन की हर परिस्थिति में सत्य का अनुसंधान कर सकता है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।