
हिन्दु के बिना विश्व का परिदृश्य कैसा होगा Publish Date : 01/11/2026
हिन्दु के बिना विश्व का परिदृश्य कैसा होगा
प्रो0 आर. एस. सेंगर
आज विश्व जिस मार्ग पर बढ़ता दिखाई दे रहा है उसका परिणाम कैसा होगा इसक कल्पना करना स्वप्न भी बहुत भयानक प्रतीत होती है। एक तरफ जहां विश्व की सभी बड़ी शक्तियां अपनी अपनी ताकतों के आधार पर कमजोर राष्ट्रों या समूहों को अपने पैरों तले रौंदते हुए दिखाई दे रहे हैं तो वहीं वे शक्ति संपन्न होने के बाद भी पूरी तरह से अशांत और अप्रसन्न बने हुए हैं। इस अप्रसन्नता का प्रमाण यह है कि पूरी तरह भौतिक सुखों को प्राथमिकता देने वाले इन मानव समाजों में भी पर्याप्त आर्थिक क्षमता होने के बाद भी अपराधों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है और इतना ही नहीं नित नए-नए अपराध के प्रकार भी हमारे सम्मुख आ रहे हैं।
हाल के दिनों में एक हवाई जहाज के भीतर घटित हुई घटना से समूचा विश्व परिचित है, उस जहाज के एक चालक ने सभी के जीवन को संकट में डालने का प्रयास किया, तो दूसरे चालक ने अपने जीवन को संकट में डालकर भी सभी को उस संकट से उबार भी लिया। दोनों एक ही प्रकार के आधुनिक प्रशिक्षण से प्रशिक्षित थे, उनकी शिक्षा का स्तर भी एक जैसा ही रहा होगा, लेकिन दोनों में एक मूलभूत अंतर था और यह अंतर उनकी विचारधारा का था। एक अपने सुख के लिए दूसरों को मार सकता है तो दुसरा अन्य लोगों के लिए स्वयं को दिलेरी से दुख में डाल सकता है। यही विचार ही विश्व में हिंदू के नाम से जाना जाता है।

विश्व भी आज एक ऐसे ही चालक के नेतृत्व में बढ़ रहा है जहां उसके अपने सुख के लिए सभी यात्रियों का कोई मोल नहीं है। शिक्षा स्वास्थ्य यातायात और संचार के साधनों की प्रगति भी मनुष्य को शांति और सुख प्रदान नहीं कर पा रही है, वातावरण को शुद्ध नहीं रख पा रही है और जिस उपभोग के लिए वह विभिन्न प्रयत्न के जोड़ तोड़ कर रहा है वह उपभोग भी आनंद से नहीं भोग पा रहा है। ऐसे में मनुष्य के शाश्वत सुख और विकास की सुखमय अवधारणा हिंदू के बिना संभव नहीं होगी, विश्व धीरे धीरे यह समझने लगा है कि बिना हिंदू के उसकी जहाज उसको अपेक्षित गंतव्य तक नहीं ले जा सकेगा। यही हिन्दुत्व का राज है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।