
आप समय को कैसे देखते हैं Publish Date : 15/10/2026
आप समय को कैसे देखते हैं
प्रो0 आर. एस. सेंगर
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कुछ लोग समय के पाबंद होते हैं, तो कुछ लचीले। वजह यह है कि हर इंसान समय को अलग ढंग से देखता है।
हर इंसान समय को देखने और इस्तेमाल करने का तरीका अलग-अलग रखता है। कुछ लोग मोनोक्रोनिक होते हैं यानी उनके लिए समय एक सीधी रेखा जैसा है, जैसे-तय समय पर पहुंचना और सब कुछ अनुशासन से करना। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग पोलिक्रोनिक होते हैं। ये लोग समय को लेकर ज्यादा लचीले होते हैं। ये लोग एक ही समय में कई काम करना पसंद करते हैं। यही वजह है कि अगर कोई एक समय पर काम करता है, तो इसका मतलब आलसी होना नहीं है।
यह बस समय को देखने का उनका अलग नजरिया है। इसलिए जरूरी है कि आप पहले यह समझें कि आप किस तरह समय को देखते हैं। अगर आप यह पहचान लेंगे, तो आपको अपने काम में आसानी होगी। साथ ही, दूसरों के समय देखने के तरीके को समझने में मदद मिलेगी।

काम जरूरी या रिश्ते: यह समझना कि आप कैसे बाधाओं पर प्रतिक्रिया देते हैं। अगर आप किसी काम में व्यस्त हैं और कॉल को टालकर काम पूरा करना पसंद करते हैं, तो ऐसे लोग समय को तय कामों की सूची की तरह मानते हैं और काम को रिश्तों से पहले रखते हैं। वहीं, अगर आप कॉल उठाकर बातचीत में समय देते हैं, भले ही बाकी काम पीछे रह जाए, तो ऐसे लोग रिश्तों और अनुभवों को ज्यादा अहमियत देते हैं, भले ही किसी अन्य कार्य के लिए देर हो जाए।
लचीले होना फायदेमंद: ध्यान केंद्रित करने वाले लोग (मोनोक्रोनिक) एक काम को पूरा होने तक करते हैं, जिससे वे कुशल और गहराई से काम कर पाते हैं, लेकिन कभी-कभी वे अचानक मिलने वाले मौकों को नजरअंदाज कर देते हैं। दूसरी ओर, कई काम एक साथ करने वाले लोग (पोलिक्रोनिक) लचीले होते हैं, आसानी से हालात के हिसाब से ढल जाते हैं और उन्हें बेहतर तरीके से संभाल लेते हैं, जिससे वे भावनात्मक रूप से भी कम थकते हैं। हालांकि, उनके साथ दिक्कत यह होती है कि वे जल्दी ध्यान भटका सकते हैं और अक्सर काम अधूरा छोड़ने की समस्या में फंस जाते हैं।
सब आप पर निर्भर: सब आप पर निर्भर। समय का उपयोग कोई स्थायी गुण नहीं, बल्कि 'प्राथमिकता' है, यानी आप चाहें तो अपनी जरूरत के अनुसार तरीका बदल सकते हैं। अगर रिश्ता बनाना चाहते हैं तो लोगों को समय दें, लेकिन अगर काम पूरा करना जरूरी है, तो ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहें। जो लोग बहुत टाइम-टेबल से चलते हैं, वे बीच-बीच में थोड़ा अतिरिक्त समय रखें, ताकि देरी होने पर तनाव न बढ़े। वहीं, जो लोग आसानी से शेड्यूल से भटक जाते हैं, वे काम या मीटिंग को तय समय से पहले लिख सकते हैं, तो इंतजार के समय कोई किताब या काम साथ रखें, ताकि वो समय भी उत्पादक लगे। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि हर कोई समय को हमारे जैसे नहीं देखता।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।