
जेन जी आंदोलन और शिक्षा Publish Date : 24/09/2026
जेन जी आंदोलन और शिक्षा
प्रो0 आर. एस. सेंगर
पिछले दिनों नई दिल्ली के जंतर मंतर से उठी जेन जी की हुंकार अब जेन अल्फा की भी जुबान से भी निकल रही है। इसलिए क्योंकि पूरी सहानुभूतियों की बाढ़ में उनके हितों से कहीं न कहीं समझौता हुआ होता है, विशेषकर शिक्षा के मामले में देखा जाए तो छात्र अभी भी रोजगार को लेकर काफी चिंतित है, चाहे प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक का मामला हो या आधारभूत शिक्षा का हर जगह खामियों की लंबी लाइन लगी हुई है, जिसके कारण छात्र अब अपनी मांग को लेकर मुखर होने लगे हैं। शहरों से। कस्बों तक जैन अल्फा के आंदोलनों के मामले सामने आ रहे हैं कि कहीं शिक्षकों की कमी नजर आ रही है तो कहीं स्कूल तक पहुंचने की राह कीचड़ से भरी हुई है। बारिश में स्कूल भवन सुरक्षित नहीं है। पीने का पानी, शौचालय, बिजली, पंखे और फर्नीचर की भी छात्रों द्वारा मांग की जा रही है। यह बच्चे सरकार प्राप्त विद्यालयों के हैं। इनके प्रदर्शन सरकारी दावों से अलग तस्वीर पेश करते हैं 2014 2015 के मुकाबले केंद्र का शिक्षा बजट दुगने से अधिक होकर 1 .39 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश में भी इसी अवधि में शिक्षा बजट लगभग44 हजार करोड़ से बढ़कर 1.06 ₹1000000000000 हो गया है।
विद्यालयों के कायाकल्प और स्मार्ट कक्षाओं जैसी योजनाएं, लेकिन आपसी तालमेल के अभाव में कई प्रयासों का लाभ जमीन तक नहीं पहुंच पाया है। स्मार्ट हुई अधिकांश कक्षाओं को अब भी बिजली का इंतजार रहता है। जर्ज विद्यालय भवनों को ढहाकर नया बनाने और विद्यालयों के ऊपर से गुजरती बिजली की लाइनों को शिफ्ट करने का मामला सीधे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। राजस्थान में पिछले साल जर्ज स्कूल भवन गिरने से 7 बच्चों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में भी जर्जर भवनों को चिह्नित कर ढांचे के आदेश हुए हैं। भवनों कक्षाएं बंद हुई, लेकिन पढ़ाई को नए ठिकाने की तलाश है। कहीं नजदीकी विद्यालयों तो कहीं पंचायत भवनों और आंगनवाड़ी केंद्रों में कक्षाएं लग रही हैं। बिजली की लाइनों की शिफ्टिंग के लिए बजट जारी होने और रकम जमा होने के बावजूद काम अड़चनों में फंसा है। इससे साफ है कि सरकार प्रयास कर रही है लेकिन अफसरों की जवाबदेही में कमी है
जेन जी के आंदोलन को सियासी चश्मे से देखा जा रहा है। विपक्ष ने इसे अपनी सफलता बताया तो सत्ता पक्ष भी युवाओं से संवाद में जुट गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जिलों में नोडल अफसर नियुक्त किए हैं।संघ प्रमुख से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक जेन जी के संवाद कर रहे हैं। इन कवायदों के बीच असली सवाल कायम है। बुनियादी शिक्षा का हिस्सा कैसे सुधरेगा? इस पर भी काम करने की जरूरत है
शिक्षा की गुणवत्ता भी जरूरी
प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया योजना का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को सिर्फ आधुनिक सुविधाओं से लैस करना नहीं, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित करना है, जुलाई 2026 तक 13.092 विद्यालयों का चयन हो चुका है, जबकि योजना के तहत 14.500 से अधिक विद्यालयों को मजबूत करने का लक्ष्य है। इस पहल की वार्षिक परीक्षा अब भवनों और संसाधनों से आगे सीखने के परिणामों पर होगी। स्मार्ट कक्षाएं डिजिटल संसाधन और आधारभूत ढांचा तभी सार्थक होगा जब विद्यार्थी रखने के बजाय समझने, प्रश्न करने, तर करने और समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हो, इसलिए शिक्षक प्रशिक्षणात्मक शिक्षा स्थानीय संदर्भों से जुड़े पाठ्यक्रम दक्षता आधारित मूल्यांकन को समान महत्व देना आवश्यक है। पी एम श्री विश्वविद्यालय के सामने दूसरी चुनौती यह है कि वे उत्कृष्टता के दीप बनकर न रह जायें। इन विद्यालयों को नवाचार और संसाधन साझेदारी के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा यदि पी एम। श्री विद्यालय जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टि, संवेदनशीलता, रचनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करते हैं, तो तभी यह योजना भविष्य की शिक्षा का मॉडल बन सकती है।
देश में जेन जी के उठ रही आवाज को समझते हुए शैक्षिक सुधार पर भी ध्यान देना होगा। गुणवत्ता युक्त शिक्षा का सरोकार तभी फलीभूत होगा जब स्कूल में छात्रों, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति बनी रहेगी। उत्तर प्रदेश में यूपी बोर्ड ने प्रदेश के सभी स्कूलों में शिक्षकों, कर्मियों और विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था तो कराई पर इसका क्रियान्वयन समावेशी रूप से पूरे प्रदेश में कारगर साबित नहीं हुआ। ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर विद्यालयों की उदासीनता पर कार्रवाई के बाद सुधार होना बताता है कि व्यवस्था लागू करने के लिए केवल निर्देश पर्याप्त नहीं, बल्कि नियमित निगरानी भी जरूरी है। यदि 34 जिलों में एक सप्ताह पहले तक 10% से भी कम विद्यालय ऑनलाइन उपस्थित दर्ज करा रहे थे और नोटिस के बाद इसमें तेजी आई तो स्पष्ट है कि अनुपालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है, तभी तो परीक्षा केंद्र निर्माण के लिए अच्छी उपस्थिति व अन्य नई शर्त का प्रभाव है कि विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थित दर्ज कराने में सहजता आई है। परीक्षा और शिक्षा की व्यवस्था को सुधारने के लिए यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पोर्टल पर उपस्थिति वास्तविक है या नहीं।
हम सभी को कोशिश यह करनी होगी कि विद्यालयों की शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन सुधारने के लिए प्रयास करने होंगे, तभी जेन जी के बीच उठ रही आवाज को संभाला जा सकता है
लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।
