धर्म अलग अलग, किन्तु इंसानियत एक      Publish Date : 01/09/2026

    धर्म अलग अलग, किन्तु इंसानियत एक

                                                                                                                    प्रो0 आर. एस. सेंगर

  • धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एकः संघ प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क में आयोजित वर्ल्डिटी कार्यक्रम में मानवता की एकता पर जोर दिया। भारत के सदियों पुराने वसुदेव कुटुंबकम के सोच का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे धर्म और पूजा करने की पद्धतियां अलग अलग हो सकती हैं, लेकिन पूरी इंसानियत एक ही है। उनके संबोधन से पहले उनकी तस्वीरें टाइम्स स्क्वायर के प्रमुख बिल बोर्ड पर दिखाई गई थी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि सत्य एक है, लेकिन अलग-अलग लोग अपनी समझ और दृष्टिकोण के अनुसार उसे अलग-अलग तरीके से व्यक्त करते हैं। इसकी वजह भी है क्योंकि हम एक इंसान है और हम इस सॉफ्टवेयर के कैदी हैं जो हमारे दिमाग में बना है।

उन्होंने कहा कि वे स्वयं धार्मिक विद्वान या धार्मिक अथॉरिटी नहीं है, लेकिन जिस समाज में वे काम करते हैं उसकी परंपरा यह मानती है कि धर्म अलग हो सकते हैं जबकि मानवता एक ही है। अपने सम्बोधन के दौरान भागवत ने कहा कि सत्य एक है और मानवता उसी सत्य की उपज है, इसलिए इंसानियत भी एक है।

संघ प्रमुख ने दुनिया में मौजूद विभिन्न धर्मों और उनकी धार्मिक परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में धर्मों को काफी हद तक उनके रीति रिवाजों और अनुष्ठानों के आधार पर परिभाषित किया जाता है। उन्होंने माना कि धार्मिक अनुशासन और अनुष्ठान किसी व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकते हैं। मोहन भागवत इस सप्ताह की शुरुआत में न्यूयॉर्क पहुंचे थे। यहां उनकी 3 देशों की वैश्विक संपर्क यात्रा का पहला चरण है, वह अमेरिका के बाद कनाडा और ब्रिटेन की भी यात्रा करेंगे।

उनका यह दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के आयोजनों के तहत विदेशों में रहने वाले विभिन्न संगठनों के निमंत्रण पर हो रहा है। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर के अनुसार, न्यूयॉर्क का यह आयोजन विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाने वाला अंतर धार्मिक कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य खुले संवाद, परस्परिक सम्मान, समझ और साझा उद्देश्य को बढ़ावा देना है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।