राष्ट्रीय गीत का हिन्दी अनुवाद      Publish Date : 30/08/2026

          राष्ट्रीय गीत का हिन्दी अनुवाद

                                                                                                 प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं मुकेश शर्मा

भारतीय राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के प्रत्येक छन्द का सरल हिन्दी में भावार्थ के साथ।

1. वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्।

सुजलाम् सुफलाम् मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलाम् मातरम्।

हिन्दी अनुवादः- मैं तुम्हारी वन्दना करता हूँ, हे माँ। तुम अच्छे जल और अच्छे फलों से भरी हुई हो, मलय पर्वत की चन्दन जैसी शीतल हवा से तुम्हारा आँचल ठंडा है, और तुम्हारे खेतों में फसलों की हरियाली से तुम श्यामल दिखती हो। हे माँ, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।

2. शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्, फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,

सुहासिनीम् सुमधुरभाषिणीम्, सुखदाम् वरदाम् मातरम्।

हिन्दी अनुवादः- तुम्हारी रातें चाँदनी की उज्ज्वल रोशनी से खिल उठती हैं, तुम्हारे पेड़-पौधे फूलों से लदे हुए अत्यंत शोभायमान हैं। तुम सदा मुस्कुराती हुई, मीठी वाणी बोलने वाली हो। तुम सुख देने वाली और वरदान देने वाली हो।

3. कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले, कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,

के बॉले माँ तुमि अबले, बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्, रिपुदलवारिणीं मातरम्।

हिन्दी अनुवादः- करोड़ों कण्ठों से तुम्हारे जय-जयकार की गूंज निकल रही है, करोड़ों हाथों ने तुम्हारी रक्षा के लिए तलवारें उठा रखी हैं। ऐसे में कौन कह सकता है कि तुम अबला हो, तुम अपार शक्ति धारण करने वाली हो, तुम ही हमें तारने वाली हो, और तुम ही शत्रुओं की सेना को रोकने वाली हो। अतः हे माँ, मैं तुम्हें नमन करता हूँ।

4. तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि हृदि तुमि मर्म,

त्वम् हि प्राणाः शरीरे, बाहुते तुमि माँ शक्ति, हृदये तुमि माँ भक्ति, तोमारेइ प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे।

हिन्दी अनुवादः- तुम ही विद्या हो, तुम ही धर्म हो, तुम ही हमारे हृदय में बसती हो और हमारे मर्म में भी तुम्ही हो। तुम ही शरीर में प्राण हो, भुजाओं में तुम ही शक्ति हो और हृदय में तुम ही भक्ति हो। तुम्हारी ही मूर्ति को हम हर मंदिर में स्थापित करते हैं।

5. त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी,

वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्, नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्, सुजलां सुफलां मातरम्।

हिन्दी अनुवादः- तुम ही दस हथियारों को धारण करने वाली दुर्गा हो, तुम ही कमल के फूल पर विहार करने वाली लक्ष्मी हो, और तुम ही विद्या देने वाली सरस्वती हो। मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ। मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ, हे निर्मल, पवित्र, अतुलनीय कमला रूपी माँ, जो जल और फलों से सम्पन्न है।

6. श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम्, धरणीम् भरणीम् मातरम्। वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्।

हिन्दी अनुवादः- माँ तुम श्यामल वर्ण वाली, सरल स्वभाव वाली, मधुर मुस्कान वाली और आभूषणों से सुसज्जित हो। तुम धरती को धारण करने वाली और सभी का भरण-पोषण करने वाली हो। हे मातृभूमि, मैं बार-बार तुम्हारी वन्दना करता हूँ।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।