प्रतिकूल परिस्थितियों में सकारात्मकता से मिलती है शक्ति      Publish Date : 18/08/2026

प्रतिकूल परिस्थितियों में सकारात्मकता से मिलती है शक्ति

                                                                                                                   प्रो0 आर. एस. सेंगर

जीवन के उतार चढाव और संघर्षों का निरंतर प्रभाव होता है।परिस्थितियाँ सदैव हमारे अनुकूल नहीं हो सकतीं किंतु उनके प्रति हमारी प्रतिक्रिया तो हमारे नियंत्रण में होती है सुख और दुख के प्रति संभव रखकर हम ऐसे नियंत्रण में समक्ष हो जाता है, यह बहुत स्वाभाविक होता है कि सुखद इच्छा पूर्ण होते ही इच्छाएं और जाग उठती हैं। सुखद स्थिति में, हम प्रसन्न होते हैं और अप्रिय स्थिति में हम दुखी होते हैं।

इसके लिए केवल हमें अपने सोचने के इस तरीके को बदलना होगा जब भी हमारे आस-पास नकारात्मकता के काम क्रोध लोभ, और मुंह के विषैले सर्प डसने के लिए तैयार हो तो पल भर के लिए हम भगवान विष्णु का वह रूप स्मरण करें जब वे छीर सागर की उफनती लहरों के बीच शेषनाग की सैय्या पर शांत मुद्रा में मनमोहक मुस्कान लिए विश्राम करते हुए आध्यात्मिक संदेश दे रहे हैं कि अपने भीतर अपना विवेक, बुद्धि और आत्म आत्मा को जगा लें तो किसी प्रकार की भी नकारात्मक ऊर्जा हमें नुकसान पहुंचाने के बजाय हमारी रक्षक और साहित्य बन जाएंगी।

इसके लिए हमारा दृष्टिकोण सदैव सकारात्मक होना चाहिए क्योंकि हम अपने जीवन में केवल वही प्राप्त कर सकते हैं जैसा सोचते हैं। दुर्गुणों का साम्राज्य भी केवल उन्हीं पर अपना आधिपत्य जमाता है, जो इंद्रियों के दास होते हैं। इंद्रियों को उनके विषय विकारों से दूर रखना हमारी प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे विकार ही हमारी आध्यात्मिक शक्ति को विकसित नहीं होने देते, स्वयं को उस श्रेणी में उन्नत करने के लिए हमें अपने आत्मा की शक्तियों को जागृत करते रहना है।

हमारे पास, आत्मा की शक्ति ही एकमात्र ऐसी निधि है जो प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ने में हमारी मदद कर हमें लक्ष्य तक पहुँचाती है। इस शक्ति को सदैव सकारात्मकता से संबल मिलता है। प्रतिकूल परिस्थितियों में, यह शक्ति न केवल एक कवच बनकर हमारी रक्षा करती है, अभूतपूर्व स्थितियों से पार पानी के लिए आत्मबल भी प्रदान करती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।