समय का सदुपयोग      Publish Date : 16/08/2026

               समय का सदुपयोग

                                                                                                               प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

जीवन का प्रत्येक क्षण मूल्यवान होता है, इसके गर्भ में स्वर्णिम भविष्य का संदेश अंकित रहता है। जिस व्यक्ति की अंतर-आंखें खुली होती हैं, वही उस संदेश को पढ़ने और समझने में समर्थ होता है। जीवन में सफलता, प्रगति और उपलब्धि का मूल आधार समय का सदुपयोग करना ही होता है।

हममें से अनेक लोग जीवन में किसी विशिष्ट अवसर की प्रतीक्षा करते रहते हैं। वे सोचते हैं कि जब परिस्थितियां अनुकूल होंगी, तब ही वह अमुक कार्य करेंगे। ऐसे लोग भाग्यवादी और सुविधावादी बन जाते हैं। उनकी चेतना कुंठित और मूर्छित हो जाती है। वे कल्पना और प्रतीक्षा में ही अपना बहुमूल्य समय व्यर्थ गंवा देते हैं। अवसर की प्रतीक्षा करने वाले लोग उनके सामने आने वाले अनेक अक्सर अवसर खो बैठते हैं, जबकि कर्म करने वाले लोग स्वयं ही अपने लिए अवसर बना लेते हैं।

वहीं जिनका जीवन साधना और तपस्या से भरा होता है, उनके लिए हर दिन और हर क्षण अवसर बन जाता है। सुविधावादी व्यक्ति कठिनाई देखकर पीछे हट जाते हैं, जबकि परिश्रमी व्यक्ति कठिनाई को ही अपनी सफलता की सीढ़ी बना लेता है।

सफलता उसी के ललाट पर विजय तिलक करती है, जो श्रम की बूंदों से भीगा होता है। जो - व्यक्ति श्रम से कतराते हैं और केवल सुविधाओं की प्रतीक्षा करते रहते हैं, उनके सपने कभी सफलता में परिणत नहीं होते। सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है- कल नहीं, आज। जो कार्य आज हो सकता है, उसे कल पर टालना आलस्य और असफलता का कारण बनता है।

भूतकाल का कल कब्र में है और भविष्य का कल गर्भ में है, इसलिए मनुष्य को आज के प्रति वफादार और जागरूक बनना चाहिए। जो व्यक्ति आज को सार्थक बना लेता है, उसका भूत और भविष्य, दोनों सफल हो जाते हैं। वास्तव में वर्तमान ही जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। इसलिए हमें अवसर की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने पुरुषार्थ, परिश्रम और जागरूकता से हर दिन को अवसर में बदलना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।