
आग पर रखते ही क्यों फट जाता है मक्के का दाना? Publish Date : 11/08/2026
आग पर रखते ही क्यों फट जाता है मक्के का दाना?
प्रो0 आर. एस. सेंगर
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“अंदर बनता है टायर से 4 गुना ज्यादा दबाव, ये है पॉपकॉर्न का सेक्रेट”।
मूवीज देखते समय या फिर बारिश में मौसम के मजे लेते हुए पॉपकॉर्न खाना काफी अच्छा लगता है। अक्सर टाइमपास के लिए खाने वाला ये मजेदार स्नैक्स खाने में तो काफी अच्छा लगता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मक्के के दानों को जब आग के संपर्क में रखा जाता है तो ये फटकर पॉपकॉर्न क्यों बन जाता है। दरअसल, मक्का से पॉपकॉर्न बनने के पीछे फिजिक्स और थर्मल इंजीनियरिंग छिपी हुई है।
यह प्रोसेस एक खास किस्म के मक्के के साथ ही मुमकिन होता है, जिसे जुसर वैरायटी या Zea Mays Everta कहते हैं। यदि आप साधारण मक्के को आग पर रखेंगे तो वह पॉपकॉर्न नहीं बनेगा, तो आइए मक्के के दाने से पॉपकॉर्न के पीछे का साइंस जान लीजिए।
क्या है दाने के अंदर का सीक्रेट?
हर पॉपकॉर्न वाले मक्के के दाने के पास एक गजब की वाटर-टाइट और बेहद मजबूत बाहरी परत होती है जिसे पेरीकार्प (Pericarp) कहते हैं। इस परत की खूबी यह है कि यह बहुत सख्त होती है और उस दाने के अंदर मौजूद पानी की एक बूंद (करीब 14 फीसदी हिस्सा) और स्टार्च बहुत ही टाइट तरीके से पैक्ड रहते हैं।
जब हम दाने को गर्म करते हैं, तो अंदर मौजूद पानी की बूंद भाप में बदलने लगती है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, अंदर की भाप का प्रेशर बहुत ज्यादा होता जाता है।
वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक, दाने के भीतर का दबाव करीब 135 पाउंड प्रति वर्ग इंच (135 psi) तक पहुंच जाता है। यह प्रेशर एक कार के टायर के दबाव से भी 4 गुना अधिक होता है। जब तापमान 180 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है तो वह कड़क पेरीकार्प परत इस भयानक प्रेशर को झेल नहीं पाती और धमाके के साथ फट जाती है।
अचानक ठंडा होना भी साइंस
जैसे ही यह दाना फटता है, अंदर का उबलता हुआ जिलेटिन जैसा स्टार्च पलक झपकते ही बाहर आ जाता है। बाहर आते ही हवा के संपर्क में आते ही यह ठंडा हो जाता है और एक सफेद, फूले हुए और जालीदार पॉपकॉर्न का रूप ले लेता है। यही वजह है कि मक्के का यह छोटा सा दाना अपनी बनावट के कारण एक टेस्टी स्नैक्स में बदल जाता है।
मक्के के फूटने की पूरी प्रक्रिया-
(1) नमी और संरचना: मक्के के दाने के केंद्र में थोड़ा पानी और मुलायम स्टार्च होता है, जिसके बाहर एक सख्त और मजबूत परत (पेरिकार्प) होती है।
(2) भाप का निर्माण: आग की गर्मी मिलने पर दाने के अंदर का पानी उबलकर भाप में बदलने लगता है।
(3) दबाव बढ़ना: मजबूत बाहरी छिलका भाप को बाहर नहीं जाने देता, जिससे दाने के भीतर भारी दबाव (लगभग 135 पाउंड प्रति वर्ग इंच) पैदा हो जाता है।
(4) विस्फोट और फैलाव: जब तापमान करीब 175°C से 180°C तक पहुँचता है, तो छिलका इस दबाव को सहन नहीं कर पाता और फट जाता है।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
