
असफलता का सच Publish Date : 07/08/2026
असफलता का सच
प्रो0 आर. एस. सेंगर
मनुष्य की सब की सबसे बड़ी विफलता उसका असफल होना नहीं है क्योंकि असफलता तो प्रकृति का नियम है, कोई भी नया बीज पहले मिट्टी में दबता है, अंधकार सहता है, वर्षा व धूप की मार झेलता है, तब कहीं जाकर वह प्रस्फुटित होता है। जब प्रकृति स्वयं इस नियम का पालन करती है, तो मनुष्य इसका अपवाद कैसे हो सकता है, वास्तविक कमजोरी तब जन्म लेती है जब हम यह मान बैठते हैं कि अब आगे कुछ नहीं हो सकता क्योंकि यह कहा भी गया है कि जिस क्षण हम प्रयास करना छोड़ देते हैं उसी क्षण हम अपने लिए भविष्य के सभी द्वार भी बंद कर देते हैं।
असफल, हमें दुनिया नहीं बनाती बल्कि हार मान कर बैठे जाना हमें असफल बना देता हैं। मैंने अपने जीवन में हजारों प्रयोग किए, उनमें से अधिकांश वैसे सफल नहीं हुए, जैसी कि शुरू में उम्मीद हुआ करती थी। अगर मैं हार असफल प्रयोग के बाद मान लेता कि अब आगे बढ़ने का कोई फायदा नहीं, तो शायद जीवन में कुछ नहीं कर पाता। हर असफल योग ने मुझे यह नहीं बताया कि मैं अयोग्य हूं, उसने केवल यह बताया कि यह रास्ता और तरीका सही नहीं है। जब यह रास्ता बंद होता है, तब ज्ञान हमें दूसरे रास्ते की ओर ले जाता है।
हम चाहते हैं कि बीज बोते ही फल मिल जाए। पहले प्रयास में ही सफलता मिल जाए लेकिन प्रकृति ऐसे नियमों से संचालित नहीं होती। महान उपलब्धियाँ समय धैर्य और लगातार मेहनत मांगती हैं। सफलता तो उन असंख्य छोटे छोटे प्रयासों का संचय है जिन्हें संसार देख भी नहीं पाता। लोग अंतिम उपलब्धि पर तालियां बजाते हैं, लेकिन वे उन अनगिनत रातों को नहीं देखते जब कोई व्यक्ति अकेले बैठकर अपने भूलों को सुधार रहा होता है। जीवन में कोई भी ज्ञान बिना मूल्य चुकाए नहीं मिलता, कभी वह मूल समय होता है तो कभी श्रम और कभी धैर्य जो इसे चुकाने के लिए तैयार नहीं होता वह ज्ञान हासिल नहीं कर सकता।
इसलिए कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए क्योंकि वे आपकी ग्रोथ नहीं बल्कि शिक्षक होती हैं। आपका मार्गदर्शन करती हैं, मनुष्य अपने भीतर की शक्ति को तब तक नहीं पहचानता जब तक परिस्थितियाँ उसे चुनौती नहीं देती, जब तक सब कुछ आसान रहता है तब तक साहस सोया रहता है और फिर कठिनाइयाँ ही उसे जगाती हैं। दरअसल मुश्किलें ही हमारे व्यक्तित्व को गढ़ने वाली सबसे बड़ी शिल्पकार होती हैं।
यदि आपके सामने कोई ऐसा लक्ष्य है जिस पर आपको भरोसा है और आप पा सकते हैं, तो संसार की शंकाओं से अधिक अपने श्रम पर विश्वास कीजिए। लोग आपके विचारों पर हंस सकते हैं उसको मूर्ख कह सकते हैं। प्रयोगों को व्यर्थ बता सकते हैं, पर सत्य का निर्णय तो परिणाम ही करते हैं। इसलिए मैं कहूंगा कि अपने श्रम पर विश्वास रखें, अनुभवों से सीखें। अपनी भूलों से डरें नहीं और जिज्ञासा को कभी मरने न दें।
यदि आप हर असफलता को एक सबक में बदल देते हैं, तो फिर आप कभी नहीं हारते हार तभी होता है जब सीखना बंद हो जाता है। जब तक भीतर सीखने की इच्छा है, तब तक संभावनाएँ भी जीवित हैं। इसलिए आपको कभी भी अपने जीवन में हार नहीं मानी क्योंकि हार ही सबसे बड़ी कमजोरी है। आप हमेशा प्रयास करते हैं, सफलता निश्चित ही आपको मिलेगी, यह एक सनातन सत्य है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
