
समय के साथ आपका रिश्ता Publish Date : 15/07/2026
समय के साथ आपका रिश्ता
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य
‘‘आमतौर पर माना यह जाता है कि ‘कि जो व्यक्ति समय का पाबंद होता है उसका जीवन काफी हद तक व्यवस्थित होता है, परन्तु जिस व्यक्ति की प्रत्येक स्थान पर देरी से पहुँचने की आदत होती है, वह कभी भी सफल नहीं हो पाता है।’ मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह आपकी टाइम पर्सनैलिटी होती है। ऐसे में यदि आप अपनी टाइम पसनैलिटी को नहीं समझ पाए हैं, तो इसको समझने का प्रयास कीजिए और महसूस करें कि समय के साथ आपका रिश्ता कैसा है।’’
घड़ी हम सभी के लिए एकसमान गति से ही चलती है, बावजूद इसके, हममें से हर कोई समय को अलग-अलग तरीके से अनुभव करता है। कोई व्यक्ति समय से पहले पहुँच कर बेचैन रहता है तो कोई हमेशा विलम्ब से ही पहुँचता है। कई लोग तो ऐसे होते हैं कि वह कई काम एक साथ निपटाकर भी समय से पहुँच जाते है, तो कोई एक ही काम में इतना अधिक डूब जाता हैं कि उसे समय का ध्यान ही नहीं रहता है। समय को लेकर निर्मित इसी व्यक्तित्व को मनोवैज्ञानिक ‘टाइम पर्सनैलिटी’ के नाम से सम्बोधित करते हैं।
अमेरिका की मेडिसन स्क्वायर साइकोथेरेपी की फाउंडर क्रिस्टिन एंडसन के अनुसार, ‘टाइम पर्सनैलिटी’ समय के प्रबन्ध का हमारा अपना एक स्वाभाविक तरीका होता है। एंडरसन कहती हैं कि यह ‘टाइम पर्सनैलिटी’ ही तय करती है कि आप समय के बारे में क्या सोचते हैं, समय के साथ कैसे संतुलन बिठाते हैं और समय से सम्बन्धित आपके तौर-तरीके क्या हैं? कोलंबिया यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल साइकियाट्रिक के असिसटेंट प्रोफेसर और बोर्ड-सर्टिफाइड साइकियाट्रिस्ट डॉ0 रयान सुल्तान तो यहाँ तक कहते हैं कि ‘टाइम पर्सनैलिटी’ किसी भी व्यक्ति के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है और इससे कुछ मानसिक एवं भावनात्मक परेशानियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
क्षमता के अनुसार कार्य का निर्धारण
समय का अनुभव प्रत्येक व्यक्ति अपनी मानसिक संरचना के अनुसार ही करता है, इसलिए प्रभावी समय प्रबन्धन का आरम्भ आपको स्वयं अपने आपको समझने से होता है। एक बार जब आप अपनी ‘टाइम पर्सनैलिटी’ को पहचान लेते हैं, तो इसके साथ ही अपनी कमजोरियों का प्रबन्धन और शक्तियों का बेहतर उपयोग करना अपने आप ही सीख जाते हैं।
विभिन्न अध्ययन बताते हैं कि हमारा मस्तिष्क समय को घड़ी तरह से नहीं मापता, बल्कि हमारी भावनाएं, तनाव, रूचियाँ और परिस्थितियाँ आदि समय के अनुभव को समय समय पर प्रभावित करती रहती हैं। ऐसे में जो काम हमारे मन को अच्छा लगता है उसे करते हुए समय तेजी साथ बीतता हुआ महसूस होता है तो प्रतीक्षा अथवा तनाव का समय वही समय हमें लम्बा लगने लगता है।
इसी के चलते विशेषज्ञ सलाह देतें हैं कि हमें अपनी ‘टाइम पर्सनैलिटी’ को स्वीकार कर उसी के अनुरूप कार्य करने चाहिए। हमें अपने पास सदैव कुछ अतिरिक्त या स्पेयर समय भी रखना चाहिए और समय को प्रबन्धित करने के लिए डिजिटल कैलेंडर और रिमाइंडर का बेहतर उपयोग करना चाहिए। अपने पास बफर टाइम रखें और हमें अपनी क्षमता के अनुसार की अपने कार्यों का निर्धारण करना चाहिए।
अपनी टाइम पर्सनैलिटी को अच्छे से समझें

हममें से प्रत्येक व्यक्ति का एक अलग व्यक्तित्व का होता है, जैसे कोई बहिर्मुखी होता है, कोई नए अनुभवों के प्रति अधिक खुला होता है तो कोई स्वभाव से अधिक चिंतित या घबराने वाला होता है। ठीक इसी तरह से प्रत्येक व्यक्ति की एक अलग ही ‘टाइम पर्सनैलिटी’ भी होती है और यही ‘टाइम पर्सनैलिटी’ ही हमें बताती है कि समय के साथ हमारा सम्बन्ध कैसा है। हम समय के कितने पाबंद हैं और समय प्रबन्धन के साथ जुड़ी हमारी आदतें कैसी हैं।
ऐसे में यदि आप हर जगह अक्सर देरी से ही पहुँचते हैं और सोचते हैं कि बाकी लोग समय पर अथवा समय से पहले कैसे पहुँच जाते हैं, तो इसका कारण केवल आपकी लापरवाही ही तो नहीं हो सकता। ऐसे में सम्भव है कि आपकी ‘टाइम पर्सनैलिटी’ ही आपकी इस आदत को प्रभावित कर रही हो। इस सब में एक अच्छी बात यह है कि ‘टाइम पर्सनैलिटी’ को समझकर इसमें सुधार भी किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए आवश्यक है अपनी ‘टाइम पर्सनैलिटी’ को जानना, जो कि कुल चार प्रकार की होती है।
टाइम ऑप्टिमिस्टः सब कर लेंगे
‘टाइम पर्सनैलिटी’ के मुख्य रूप से चार प्रकार होते हैं, जिनमें से पहला होता है ‘टाइम ऑप्टिमिस्ट’। इस प्रकार की ‘टाइम पर्सनैलिटी’ वाले लोगों को हमेशा यह लगता है कि उनके पास हर चीज के लिए पर्याप्त समय है और वह सब कुछ नियत समय पर ही कर लेंगे। हालांकि, कठिनाई तो तब होती है, जब वह समय का गलत अनुमान लगा बैठते हैं और वह देर से पहुँचते हैं। इस प्रकार की आशावादी सोच, नए अवसरों को अपनाने की क्षमता, दबाव में भी सकारात्मक बने रहना टाइम ऑप्टिमिस्ट लोगों की विशेषता होती है, जबकि बार-बार देर करना, डेडलाइन को मिस करना और दूसरों को इंतजार करवाना इन लागों की कमजोरी बन जाती हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसे लोग किसी कार्य में लगने वाल समय का सही तरीके से अन्दाजा नहीं लगा पाते, जिससे वह स्वयं ही देर से पहुँचते हैं और अपना ही नुकसान कर लेते हैं।
टाइम एंग्जियसः देर न हो जाए
‘टाइम पर्सनैलिटी’ के दूसरे प्रकार के लोग ‘टाइम एंग्जियस’ कहलाते हैं और इनको हर समय यह डर लगा रहता है कि कहीं देर न हो जाए। मनौवैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे लोग स्वभाव से ही चिंतित होते हैं। टाइम एंग्जियस लक्षण वाले लोगों के लिए जल्दी पहुँचना केवल समय की पाबंदी नहीं होती है, बल्कि देर हो जाने के सम्बन्ध में लगातार बने रहनी वाली चिंता को कम करना भी होता है। ऐसे में देर हो जाने के भय के चलते यह लोग समय से काफी पहले पहुँच जाते हैं। इस प्रकार के लोगों के व्यक्तित्व की एक विशेष बात यह होती है कि यह लोग अनुशंसित और भरोसेमंद होते हैं। एक योजनबद्व तरीके से जीवन जीना और जिम्मेदार व्यवहार करना इनकी विशेषता होती है, जबकि अनावश्यक तनाव झेलना, हर समय जल्दबाजी को महसूस करना और आराम नहीं करना सामने वाले को परेशानी का अनुभव कराते हैं।
टाइम बेंडर: मल्टी- टॉस्किंग
इसके बाद बाद नंबर आता है ऐसे लोगों का, जिनके लिए एक साथ कई काम करना भी मुश्किल नहीं होता है। इस प्रकार के लोगों को ही ‘टाइम बेंडर’ कहा जाता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार टाइम बेंडर टाइप के लोग समय का हिसाब आसानी से भूल जाते हैं। ऐसे लोगों को व्यस्त रहना पसंद होता है और यह लोग एक साथ कई प्रकार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम होते हैं एवं यह लोग दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं। इनकी मल्टी- टॉस्किंग क्षमता, तेज निर्णय लेने की की योग्यता एवं और चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में दक्षता समय का बेहतर प्रबन्धन करने में इनकी मदद करती है, लेकिन इन लोगों में थकान और बर्न-आउट की समस्या होने का खतरा सबसे अधिक रहता है। ऐसे लोगों की सबसे बड़ी बात यह है कि यह लोग जीवन की भी अनदेखी करते हैं और अपने लिए सुकून का समय भी नही निकाल पाते हैं।
- 15-20 प्रतिशत व्यस्कों ने स्वयं को कार्यों में टालमटोल करने वाला बताया, जो समय के प्रबन्धन और देर होने से सम्बन्धित एक व्यवहार होता है। (सेज जर्नल्स)
- 5,200 कर्मचारियों पर किए गए एक सर्वे में 16 प्रतिशत लोगों ने माना कि वह सप्ताह में कम से कम एक बार अपने काम पर देर से पहुँचते हैं। (रिलायबल प्लांट)
- 28 प्रतिशत भारतीय कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें समय और काम दबाव के चलते काफी अधिक तनाव का अनुभव होता है।
टाइम ब्लाइंडः समय का पता ही नहीं चलता

कुछ लोग किसी काम या गतिविधि में इतने अधिक व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें यह ध्यान ही नहीं रहता कि कितना समय बीत चुका है। ऐसे लोग ‘टाइम ब्लाइंड’ लोगों की श्रेणी में आते हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसे लोगों के लिए यह भूलना आसान होता है कि किस काम में कितना समय लगता है, जिसके चलते इन लोगों के लिए पहले से ही तय किए गए शैड्यूल का पालन कठिन होता है। वास्तव में यह लोग किसी काम, शौक या विचार आदि में इतने अधिक डूब जाते हैं कि इन्हें समय का अन्दाजा ही नहीं हो पाता है। आमतौर में ऐसी प्रवृत्ति रचनात्मक लोगों के अन्दर देखने में आती है। इसके साथ ही गहरी एकाग्रता और उत्कृष्ट गुणवत्ता वाला काम करना इनकी विशेषता बन जाती है। मीटिंग्स एवं डेडलाइन को भूल जाना, दैनिक दिनचर्या का प्रभावित होना और समय का गलत आकलन कर लेना आदि भी इन लोगों के लिए चुनौति बनते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
