गुलामी की मानसिकता      Publish Date : 11/07/2026

                गुलामी की मानसिकता

                                                                                                                 प्रो0 आर. एस. सेंगर

सन 1767 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने सर्वे आफ इंडिया की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भारत के बारे में भौगोलिक सामाजिक जानकारियां एकत्र करना था। इन जानकारी के आधार पर वह ऐसी नीतियां बना सके जिससे लंबे समय तक भारत को पराधीन करके रखा जाए। वर्ष 1830 को इसी सर्वे ऑफ़ इंडिया के सर्वेयर जनरल बने जार्ज एवरेस्ट। 2 दिन पूर्व ही 4 जुलाई को जॉर्ज एवरेस्ट का जन्मदिन आता है मसूरी स्थित एक म्यूजियम में तमाम सरकारी अधिकारी जॉर्ज एवरेस्ट की मूर्ति को माला पहना रहे हैं।

भारत का कैसा दुर्भाग्य है की इन अधिकारियों में किसी को भी शायद सर्वे आफ इंडिया और उसके कारण भारत की गुलामी की जानकारी भी नहीं होगी। आज का सर्वे आफ इंडिया अलग बात है क्योंकि अब हम स्वाधीन हैं और अब सर्वे आफ इंडिया भारत की सरकार के लिए अर्थात अपनी सरकार के लिए काम करती है। परंतु जिस दौर में यह सर्वेयर जनरल था क्या इसने ऐसे व्यक्ति का महिमामंडन या उसका गुणगान हमें करना चाहिए या फिर उसके द्वारा किए गए कार्य जिनके कारण हम अंग्रेजों के गुलाम बने रह सके। वह जानकारियां ढूंढ कर समाज के सामने लानी चाहिए।

                                

विश्व का ऐसा कौन सा देश होगा जो अपने आक्रमणकारियों की जयंतियां मानता होगा? जब हम ऐसा कर रहे होते हैं तो हम उन सब हुतात्माओं का उपहास उड़ा रहे होते हैं जिन्होंने इस विदेशी सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए अपनी जान की भी बाजी लगा दी। अब तक तो जो हो गया वह हो गया लेकिन आगे अपनी आने वाली पीढ़ियों को हम स्वाभिमान से भर कर उनका पोषण करें, इतिहास की गलतियों को बताएं जिससे अपने राष्ट्र का भविष्य न केवल सुरक्षित हो बल्कि सुदृढ़ भी बने।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।