
पश्चिम का प्रकाश अंधकार बन गया Publish Date : 10/07/2026
पश्चिम का प्रकाश अंधकार बन गया
प्रो0 आर. एस. सेंगर
मनुष्य के विकास का आधुनिक क्रम जब पश्चिम से शुरू हुआ, तब किसी ने यह अनुमान नहीं किया था कि मानव संसार एक बड़े अंधकार की ओर चला जाएगा जहां मानव तो होगा लेकिन मानवता नहीं होगी। इस पैमाने का विकसित मनुष्य आज चारों तरफ हिंसा द्वेष लालच और अंहकार ले कर घूमता दिखाई दे रहा है और उसकी क्रूरता का शिकार केवल मानव ही नहीं बल्कि प्रकृति के अन्य प्राणी भी हो रहे हैं।
विकास के नाम पर साधनों का अम्बार ऐसा लगा कि मनुष्य यह समझ ही नहीं पा रहा है कि यह साधन उसके लिए हैं या वह इन साधनों के लिए है, यह साधन उसकी सुविधा और सुरक्षा के लिए हैं या वह इन साधनों की सुविधा सुरक्षा के लिए। विकास क्रम जैसे-जैसे बढ़ा वैसे-वैसे मनुष्य पहले अपने परिवार से दूर फिर उसका परिवार उसके समाज से और समाज अपने राष्ट्र से और अंततोगत्वा मानव जाति से ही दूर जाता दिखाई दे रहा है।

बड़ा प्रश्न यह है कि विकास किसके लिए हो रहा है, शिक्षा किसके लिए दी जा रही है, धन किसके लिए अर्जित किया जा रहा है? जब इन प्रश्नों का समाधान ढूंढने निकलते हैं तब आज का मानव निरुत्तर खड़ा दिखाई देता है। जो उसका नहीं है वह उसको अपना मान बैठा है और उसके लिए संघर्ष कर रहा है, जो उसका स्वयं का है वह उसे अपना मानता नहीं यह एक बड़ा विरोधाभास विकास के आधुनिक मॉडल में दिखाई दे रहा है जो पूरी मानव जाति को एक गहरी खाई की तरफ लेकर जा रहा है। इससे बाहर निकालने की क्षमता केवल और केवल भारत के विकास मॉडल में ही है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
