
मन का भटकाव Publish Date : 08/07/2026
मन का भटकाव
प्रो0 आर. एस. सेंगर
हमेशा से कोतूहल का विषय रहा है कि हमारा मन क्यों भटकता है। जब भी हम काम करते हैं तो तरह तरह के विचार आते हैं और हमारा मन भटक जाता है। एक नए शोध में काम में मन लगाये रखने के तरीके के बारे में बताया गया है। शोधकर्ता का कहना है कि मान लें कि आप अपनी डेस्क पर बैठकर कहानी लिख रहे हैं। आप पूरी तरह ध्यान लगाएं। लेकिन घंटों बाद भी समझ नहीं आ रहा कि कहानी को कैसे खत्म किया जाए, इसलिए आप दौड़ने निकल जाते हैं और अपने विचारों को भी साथ-साथ बहने देते हैं। इसी दौरान किसी पत्थर से ठोकर खाकर गिरने के बजाय आपको कहानी का समाधान मिल जाता है।

याद रखिए कि हर समस्या का समाधान डैश पर बैठकर नहीं किया जा सकता, कभी-कभी समस्याओं को रचनात्मक ढंग से हल करने के लिए खुद को थोड़ी जगह देने और मन को भटकने देने की जरूरत होती है। यह शोध कोशिसनेस एंड कॉर्गिनशन जनरल में प्रकाशित हुआ है। इसका मकसद यह पता लगाना था कि किसी काम के कौन से पहलू मन भटकने की वजह बनते हैं

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
