डॉक्टरों की मानव सेवा के लिए उनको कोटि-कोटि नमन      Publish Date : 04/07/2026

डॉक्टरों की मानव सेवा के लिए उनको कोटि-कोटि नमन

डॉक्टरों के समर्पण, कड़ी मेहनत और उनके सेवाभाव का सम्मान करने के लिए हर साल एक जुलाई को ‘नेशनल डॉक्टर्स डे’ अर्थात ‘राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। भारत में पहला डॉक्टर्स डे वर्ष 1991 में मनाया गया था। हमारे देश के प्रसिद्व चिकित्सक डॉव बिधान चंद्र रॉय का जन्म 01 जुलाई को ही हुआ था और 01 जुलाई को ही उनकी मृत्यु भी हुई थी। अतः यह दिवस चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान की स्मृति स्वरूप मनाया जाता है। डॉ0 बिधान चंद्र रॉय एक प्रख्यात चिकित्सक होने के साथ ही साथ एक महान स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् भी थे।

                                     

सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान उन्होंने महातमा गांधी का साथ दिया। वर्ष 1961 में उन्हें भरत रत्न पुरूस्कार से सम्मानित किया गया। आजादी के बाद से लेकर वर्ष 1962 तक वह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी रहे। इसके अलावा वह भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के एक प्रमुख नेताओं में से भी एक थे।   

डॉक्टरों को धरती का भगवान माना जाता है, जो मरीजों को एक नया जीवन और नई आशाएं देते हैं। वास्तव में डॉक्टर सफेद कोट पहने एक ऐसा फरिश्ता होात है जो कि अपनी जान की परवाह किए बिना भी दूसरों को जीवन प्रदान करता है। हमारे देश में राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस डॉक्टरों औश्र समाज के लिए उनके योगदान के महत्व को प्रदर्शित करने के लिए मनाया जाता है। इसके साथ ही यह दिन जनता को मरीजों के प्रति डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका और कर्तव्यों से अवगत कराने में भी सहायक है।

हालांकि, लोग एक डॉक्टर को उनकी मेहनत इलाज का भुगतान तो करते हैं लेकिन उनकी करूणा और संवेदना के लिए वह सदा ही उनके ऋणी बने रहते हैं। वह केवल एक डॉक्टर ही नहीं बल्कि एक मरहम लगाने वाले और आशा की एक नई किरण का संचार करने वाले भी होते हैं। वह प्रत्येक कठिन परिस्थिति में मरीजों का साथ देने के लिए तत्पर रहते हैं। बीमारी के डर को दूर कर वह हमें एक नया एवं स्वस्थ जीवन प्रदान करते हैं। महामारी और स्वास्थ्य संकटों से निपटने में लोगों की हमेशा मदद करने वाले चिकित्सा पेशेवरों के कार्यों की हमें मुक्तकंठ प्रशंसा करनी चाहिए।

हाल ही में कोविड-19 महामरी के दौरान हमारे चिकित्सा पेशेवरों के द्वारा दिए गए योगदान और कोराना वायरस के विरूद्व उनकी लड़ाई को भी नहीं भुलाया जा सकता। इस दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए कई डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी अपनी जान गवां बैठे थे।

प्रत्येक वर्ष चिकित्सक दिवस का एक अलग विषय होता है। भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) प्रत्येक वर्ष यह थीम तय करती है। इसी थीम के आधार पर इस दिन को मनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। अतः देश के समस्त स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति अपना आभार प्रकट करते हुए हमें उनका धन्यवाद भी करना चाहिए।