गमले में उगाएं हल्दी की गांठ, मिलावट के भय से पाएं मुक्ति      Publish Date : 02/07/2026

गमले में उगाएं हल्दी की गांठ, मिलावट के भय से पाएं मुक्ति

                                                                                            प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा

हल्दी भारतीय रसोई का अहम मसाला है, जो स्वाद के साथ कई औषधीय फायदे भी प्रदान करती है। इसे किचन गार्डन, बालकनी, छत या छोटे आंगन में आसानी से उगाया जा सकता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और सूजन कम करने में मदद करता है। इसकी खेती बीज से नहीं, बल्कि गांठों (राइजोम) से की जाती है। अच्छी पैदावार के लिए 20 से 30 ग्राम वजन वाली स्वस्थ और मोटी गांठों का चयन करना चाहिए।

                                 

ऐसे उगाएं हल्दी: 12-15 इंच गहरा गमला उपयुक्त है। 50 फीसदी सामान्य मिट्टी, 30 फीसदी गोबर खाद और 20 फीसदी रेत मिलाएं। गमले में पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज होल रखें।

7 से 9 माह में तैयार

हल्दी की फसल 7 से 9 महीने में तैयार हो जाती है। हल्दी की पत्तियां जब पीली होकर सूखने लगें, तब हल्दी की गांठें निकाल लें। इन्हें साफ करके उबालें और धूप में सुखाएं। इसके बाद सूखी हुई हल्दी का पाउडर बनाकर रख लें।

सप्ताह में 1 से 2 बार करें सिंचाई

  • हल्दी की गांठों को 2 से 3 इंच गहराई में मिट्टी में लगाएं। गमले को ऐसी जगह रखें, जहां हल्की धूप और पर्याप्त रोशनी मिलती हो।
  • हल्दी के पौधे को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए सप्ताह में 1-2 बार सिंचाई पर्याप्त है।
  • 20 से 25 दिन में वर्मी कम्पोस्ट या जैविक खाद डालें। कीट-फफूंद से बचाव के लिए समय-समय पर नीम के पानी का छिड़काव करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।