15 जूनः बुर्जग र्दुव्यवहार के प्रति जागरुकता दिवस      Publish Date : 15/06/2026

15 जूनः बुर्जग र्दुव्यवहार के प्रति जागरुकता दिवस

                                                                                                                प्रोफेसर आर. एस. सेंगर 

आधुनिकता की दौड़ और आपधापी वाली इस जीवनशैली के साथ ही पीछे छूटते संस्कारों में हमारे बुर्जगो को है आत्मसम्मान एंव अपनत्व की उम्मीद-

भारत में कभी संयुक्त परिवार में अमूल्य धरोहर के रुप में सम्मानित सदस्य के रूप में रहने वाले देश के बुर्जुग, वर्तमान के बदलते जीवन मूल्यो एंव आर्थिक उपार्जन की इस अंधी दौड़ में अपनी निर्बलता और असक्षमता के चलते उपेक्षित, एकाकी एंव वृद्धाश्रम का जीवन व्यतीत करने के लिए विवश हैं। यह समस्या देश के अस्सी प्रतिशत बुर्जुगो के लिए निराशाजनक स्थिति बन चुकी है। ऐसे में हमारे बुर्जगो को जितना उनके बूढे शरीर एंव बीमारियो ने भी नही तोडा है, उससे कहीं अधिक उनकी उस औलाद के र्दुव्यवहार ने तोड दिया जिसके लिए इस बुर्जग दंपति ने अपना सब कुछ अर्पण कर चुके है। हेल्पेज इंडिया कि रिर्पाेट कहती है कि आज देश का लगभग प्रत्येक दूसरा बुर्जग प्रताडित किया जा रहा है, जो कि एक अत्यंत ही दयनीय स्थिति की ओर इशारा कर रहा है।

ऐसी स्थिति में हम सभी लोगों का यह परम कर्त्तव्य है कि हम अपने बुजुर्गों को सम्मान, अपनत्व और अपना समय भी उन्हें प्रदान करें, जिससे कि वह एक सम्माजनक, अपनत्व से भरा जीवन व्यतीत करें और अपने आपको उपेक्षित एवं एकाकी अनुभव न करने पाए। 

भारत एक ऐसा देश जहॉ स्वयं के पिंडदान के लिए बुर्जग दंपति कम से कम एक औलाद की चाह तो रखते है और आज वही औलाद अपने बूढे माता-पिता को दुत्कार रही है। उन्हे स्वयं उनकी ही संपति से बेदखल तक कर रही है। हेल्पेज के आंकडे कहते है कि देश में 34 फीसदी बुर्जग अपने बेटे एंव 31 फीसदी अपनी बहुओ के गलत व्यवहार के चलते स्वयं को प्रताडित महसूस करते है। इसके सम्बन्ध में नीति आयोग की ‘भारत में वरिष्ठ नागरिक देखभाल प्रतिमान परिकल्पना’शीषर्क से प्रकाशित रिर्पोट कहती है कि वर्ष 2050 तक भारत का हर चौथा व्यक्ति बुर्जुग व्यक्ति की श्रेणी में होगा। वर्तमान में देश की आबादी में बुर्जगो की भागीदारी 10.40 करोड की है, जो कि वर्ष 2050 में जनसंख्या का 19.5 फीसदी यानी कि लगभग 35 करोड होगी।

अतः अब समय आ चुका है कि अपने बुजुर्ग माता-पिता एवं अन्य बड़े-बूढ़ों के प्रति अपना आभार प्रकट करते हुए उन्हें एक सम्माजनक और अपनत्व से भरपूर जीवन प्रदान करें और उनके साथ सम्माजनक तरीके से व्यवहार करें जैसे कि उनकी स्थिति हमारे समाज में पहले हुआ करती थी, उन्हें प्रदान करें ताकि वह आपने आपको एक बार फिर से सम्मानित पूज्यनीय अनुभव कर हमारे मार्गदर्शक के रूप में हमारा मार्ग प्रशस्त करते रहें। 

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।